Nagpur News: पश्चिम बंगाल : घुसपैठ रोकने के लिए करिश्माई वोट जुगाड़ू प्रयोग

पश्चिम बंगाल : घुसपैठ रोकने के लिए करिश्माई वोट जुगाड़ू प्रयोग
नागरिकता सूची से 91 लाख नाम कटना और अब तक अनेक नामों पर निर्णय का मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन

Nagpur News संग्रामपुर से प्रकाश दुबे . नदी का नाम पद्मा नहीं, इच्छामती है। नदी पार कर चुके हैं। दूर तक पसरी चौड़ी नदी के पीले पानी में न तो कहीं मगरमच्छ ने दर्शन दिए और न नाग देवता ने। सीमा जाने वाली सड़क पर आवाजाही करते इक्का दुक्का तिपहिए दिखते हैं।

19 अप्रैल की रात प्रधानमंत्री के पीछे पानी में मुंह फाड़े मगरमच्छ और दोनों तरफ फन फैलाए नाग की तस्वीरों के साथ मिले वीडियो में लिखा था- To secure 375 kms of IND-BAN border. उसके नीचे Bold and innovative move by Home Ministry to plug infiltration routes कुछ छोटे आकार के आखर चमक रहे थे। दूसरे वीडियो में गृहमंत्री विराजमान हैं। एक तरफ चाणक्य और दूसरी ओर सावरकर जी के चित्र टंगे हैं। Amit Shah orders deployement of REPTILES लिखे संदेश को पालिटिकल खबर ने जारी किया है।

दूरदर्शन और अकाशवाणी में 25 साल के अनुभवी स्नेहाशीष सूर, इलेक्ट्रानिक मीडिया विशेषज्ञ मोनीदीपा ने विस्मय प्रकट किया। संदेश की सत्यता जानने के लिए उत्सुक अपर्णा के जीवनसाथी हितेश नामी फोटोग्राफर हैं। कलात्मक कामों में रुचि लेने वाले दंपत्ति अपने स्रोतों से पुष्टि नहीं कर सके। दलों और नेताओं से लेकर देवी-देवताओं पर श्रद्धा रखने वाले विश्वासी अनेक हैं। पौराणिक काल में कालिया नाग को नाथने की कथा है। प्रशंसकों के अनुसार बचपन में वर्तमान प्रधानमंत्री पोखर से मगरमच्छ पकड़ लाए थे। कर्नाटक की किताबों में सावरकर के काला पानी जेल से चिड़िया पर बैठकर परिजनों से मिलने आने का प्रसंग था। बंगालवासी इस तरह के चमत्कार को विधानसभा चुनाव के कारण देख सुन पाए। अब तक उन्हें यही मालूम था कि इच्छामती के टूटते कगारों का पानी और दलदल फैलने से बचाने के लिए राज्य सरकार की कोई योजना बनी है।

पश्चिम बंगाल में घुसपैठ के मुद्दे पर राजनीतिक संग्राम तीखा हो गया है। नागरिकता सूची से 91 लाख नाम कटना और अब तक अनेक नामों पर बनिर्णय का मामला सुप्रीम कोर्ट में है। कोलकत्ता हाई कोर्ट में आज पुलिस आयुक्त नंद इन्हीं सब कामों में उलझे हैं। प्रचारित किए गए वीडियो संदेश में नदी का नाम नहीं है। सोशल मीडिया अनुभवी अमित मालवीय से इसकी सचाई जाने का प्रयत्न निष्फल रहा। विस्मय हो इस बात पर, कि न तो फर्जी कहकर इस सूचना को हटाने और प्रचार करने वालों पर कार्रवाई की तरफ ध्यान दिया गया और न यह बताया जा रहा है कि भारत के बंगाल और बांग्लादेश की सीमा बनाने वाली नदी कौन सी है। हम जहां हैं, वहां से आखरपुर चार किलोमीटर दूर है। इलाके में पद्मा नदी नहीं बहती। इच्छामती दरअस्ल मैदानी इलाके में नदी विभाजन से बनी धारा है।

इतनी मेहनत के बावजूद घुसपैठ का मुद्दा ठंडा पड़ गया है। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़े अरुण मल्लावत के अनुसार बंगाल में दो प्रमुख मुद्दे हैं- पहला ममता टोली का सिंडीकेट और दूसरा तृणमूल सरकार का तुष्टिकरण। श्री मल्लावत कहते हैं- मैंने यह वीडियो नहीं देखा। मैं इस पर ध्यान नहीं देता। कोलकाता के बड़ा बाजार में योगी और अमित शाह समेत कई नेताओं ने कहा है कि बांग्लादेशियों को जाना पड़ेगा। मैं भाजपा का पदाधिकारी नहीं हूं। अपने स्तर पर हमारा सहयोग जारी है। छोटी छोटी बात में दखल देने वाली चुनाव मशीनरी और पुलिस के साइबर सेल की अनदेखी रहस्यमय है। मतदान तिथि के ठीक एक सप्ताह पहले भारतीय जनता पार्टी ने प्रचार की गति और नीति दोनों में बदलाव किया है।

मोदी की गारंटी : कोलकाता में मुख्यमंत्री ममता, चौरंगी से नयना बंद्योपाध्याय आदि के क्षेत्रों में हिंदी और बांग्ला में प्रधानमंत्री का आडियो चलाया जा रहा है जिसमें मोदी की गारंटी बार-बार दोहराई जा रही है। तिपहिया वाहनों में लगे टेप गली कूचों के अंदर तक घुमाए जा रहे हैं। कालिन्स लेन में कल तृणमूल नेता ममता बनर्जी को सभा की अनुमति नहीं दी गई। वे चाय दुकान में बैठ गईं। उपस्थित लोगों से एक-एक कर बात करने लगीं। बंदरगाह यानी पोर्ट इलाके के उम्मीदवार राकेश सिंह के विरुद्ध मामला दर्ज किया गया है। उन्होंने पुलिस अधिकारी को जान से मारने की धमकी दी थी। राकेश कोलकाता महापौर और राज्य के मंत्री समेत कई जिम्मेदारियां निभा रहे फिरहाद हकीम के मुकाबले में खड़े हैं।


Created On :   23 April 2026 12:27 PM IST

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