जल संरक्षण: लकड़गंज जोन कार्यालय में रेन वाटर हार्वेस्टिंग का शुभारंभ, महापौर नीता ठाकरे ने किया लोकार्पण

लकड़गंज जोन कार्यालय में रेन वाटर हार्वेस्टिंग का शुभारंभ, महापौर नीता ठाकरे ने किया लोकार्पण
  • 3 लाख लीटर जल संचयन का लक्ष्य
  • रेन वाटर हार्वेस्टिंग के लिए विशेष समिति गठित

Nagpur News. जल संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से महानगरपालिका प्रशासन ने इस वर्ष सभी जोन कार्यालयों के अंतर्गत आने वाली इमारतों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्रणाली स्थापित करने का निर्णय लिया है। इसके लिए प्रत्येक जोन कार्यालय को 5 लाख रुपये की निधि आवंटित की गई है। इस राशि से जोन कार्यालयों के अलावा मनपा स्कूलों, अस्पतालों, पुस्तकालयों तथा अन्य सार्वजनिक इमारतों में वर्षा जल संचयन की व्यवस्था विकसित की जाएगी।

इसी क्रम में सोमवार को लकड़गंज जोन कार्यालय में तैयार की गई रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्रणाली का लोकार्पण महापौर नीता ठाकरे ने किया। इस अवसर पर मनपा आयुक्त डॉ. विपिन ईटनकर, सत्तापक्ष नेता बाल्या उर्फ नरेंद्र बोरकर सहित अन्य अधिकारी एवं जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।

3 लाख लीटर जल संचयन का लक्ष्य

लकड़गंज जोन कार्यालय की छत पर गिरने वाले वर्षा जल का संग्रह कर भूजल स्तर बढ़ाने की योजना बनाई गई है। इसके तहत भवन की छत से चार 4-इंच पाइपों के माध्यम से वर्षा जल को लगभग 3,000 वर्गफुट क्षेत्र से एकत्र कर फिल्टर किया जाएगा। इसके बाद इस पानी को परिसर स्थित कुएं में छोड़ा जाएगा, जिससे भूजल स्तर में सुधार होगा। आवश्यकता पड़ने पर इस जल का उपयोग उद्यानों की सिंचाई के लिए भी किया जाएगा।

इस परियोजना पर जोन कार्यालय के निधि से लगभग एक लाख रुपये खर्च किए गए हैं। जिन परिसरों में कुआं उपलब्ध नहीं है, वहां बोरवेल या रिचार्ज पिट बनाकर वर्षा जल का भूजल पुनर्भरण किया जाएगा। हालांकि, ऐसी व्यवस्था में अपेक्षाकृत अधिक खर्च आने की संभावना है।

रेन वाटर हार्वेस्टिंग के लिए विशेष समिति गठित

शहरभर में रेन वाटर हार्वेस्टिंग परियोजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए मनपा की मुख्य अभियंता लीना उपाध्ये की अध्यक्षता में एक विशेष समिति का गठन किया गया है। समिति में सभी जोन के कार्यकारी अभियंताओं को शामिल किया गया है।

यह समिति प्रत्येक जोन में चिन्हित इमारतों पर वर्षा जल संचयन प्रणाली स्थापित करने का कार्य करेगी। जिन परिसरों में कुआं या बोरवेल उपलब्ध है, वहां फिल्टर किया गया वर्षा जल सीधे उसमें छोड़ा जाएगा। वहीं, जहां ऐसी सुविधा नहीं है, वहां भूमिगत रिचार्ज शाफ्ट बनाकर भूजल पुनर्भरण की व्यवस्था की जाएगी।

Created On :   6 July 2026 6:53 PM IST

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