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खुलासा: घरेलू कामगार महिलाओं का सच हैरान करने वाला, 5,019 केस स्टडी, 70% बगैर पहचान, 92% बेसहारा

Nagpur News. दूसरों के घरों को संभालने और उनकी दिनचर्या को आसान बनाने वाली घरेलू कामगार महिलाएं खुद अपनी जिंदगी में असुरक्षा, अनदेखी और संघर्ष का सामना कर रही हैं। सुबह से शाम तक कई घरों में काम करने के बावजूद उन्हें न तो स्थायी आय मिलती है, न सामाजिक सुरक्षा और न ही कानूनी संरक्षण। कम शिक्षा, पारिवारिक जिम्मेदारियों और आर्थिक मजबूरी के कारण ये महिलाएं वर्षों तक इसी काम में जुड़ी रहती हैं। कई महिलाएं अपने परिवार की एकमात्र कमाने वाली हैं, फिर भी उनके काम की कोई निश्चित शर्तें नहीं हैं।
रिपोर्ट में बड़ा खुलासा
‘यूथ फॉर यूनिटी एंड वॉलंटरी एक्शन (युवा)' के अध्ययन ने इन घरेलू कामगार महिलाओं की उस सच्चाई को सामने रखा है, निजी घरों में काम करने के कारण वे अक्सर अपमान, असुरक्षा और शोषण का सामना करती हैं, लेकिन शिकायत का कोई ठोस माध्यम न होने से उनकी आवाज दबकर रह जाती है। यह अध्ययन 15 जिलों में किया गया, जिसमें नागपुर भी शामिल है। रिपोर्ट के अनुसार, यह समस्या पूरे महाराष्ट्र की है।
कम उम्र से ही संघर्ष
रिपोर्ट बताती है कि कई महिलाओं ने बहुत कम उम्र में काम शुरू किया और 50-60 साल की उम्र तक काम करने को मजबूर हैं। करीब 83% महिलाएं कई घरों में काम करती हैं। करीब एक-तिहाई महिलाएं कभी स्कूल नहीं जा पाईं, और 45% सिर्फ प्राथमिक शिक्षा तक सीमित रह गईं। इनमें से बड़ी संख्या विधवा, तलाकशुदा या छोड़ी गई महिलाएं हैं। करीब 40% अपने परिवार की अकेली कमाने वाली हैं।
जिस घर को सुरक्षित समझा, वहीं मिला डर
रिपोर्ट का सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि 0.3% महिलाओं ने यौन उत्पीड़न, 5.7% ने गाली-गलौज और 0.6% ने शारीरिक हिंसा झेलने की बात कही। सबसे बड़ी सच्चाई यह हिंसा अक्सर उसी घर में होती है, जहां वे काम करती हैं।
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फिर भी आवाज नहीं उठा पातीं
शिकायत का कोई सिस्टम नहीं, और काम खोने का डर हर समय सिर पर मंडराता रहता है। हर दिन एक अनजाने डर के साथ काम करती हैं, जहां सम्मान मिलना तय नहीं, लेकिन अपमान का खतरा हमेशा रहता है। एनसीआरबी के 2024 आंकड़ों के अनुसार, नागपुर में 96 यौन उत्पीड़न के मामले दर्ज हुए, जबकि महिलाओं के खिलाफ कुल अपराधों की संख्या 1,513 रही।
सिस्टम से दूरी, उम्मीद भी अधूरी
सरकार की योजनाएं कागजों में जरूर हैं, लेकिन इन महिलाओं तक नहीं पहुंचतीं। करीब 70% कामगार पंजीकृत ही नहीं हैं, और 57% ने कभी आवेदन ही नहीं किया, क्योंकि उन्हें प्रक्रिया ही नहीं पता या भरोसा नहीं। और जो जुड़ी भी हैं, उनमें से 92% को कोई लाभ नहीं मिला।
Created On :   5 July 2026 6:46 PM IST













