एक साथ कार्रवाई: कैफे की आड़ में कुछ चल रहा है!, 17 ठिकानों पर पुलिस की दबिश, 20 के खिलाफ केस

कैफे की आड़ में कुछ चल रहा है!, 17 ठिकानों पर पुलिस की दबिश, 20 के खिलाफ केस
  • अब दूसरे इलाकों के कैफे की जांच और शिकायतों पर समय रहते एक्शन लेने की चुनौती
  • नंदनवन से वाठोड़ा तक एक साथ कार्रवाई
  • कार्रवाई के बाद अब दूसरे इलाकों पर नजर

डिजिटल डेस्क, नागपुर। शहर में कैफे की गतिविधियों की जांच के लिए पुलिस ने 8 अक्टूबर को विशेष अभियान चलाया। पुलिस आयुक्त विश्वास नागरे पाटिल के मार्गदर्शन में अपराध शाखा और स्थानीय पुलिस की टीमों ने छह थाना क्षेत्रों में एक साथ छापेमारी कर 17 कैफे के खिलाफ कार्रवाई की। इस दौरान कुल 20 लोगों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए। अचानक हुई कार्रवाई से कैफे संचालकों में हड़कंप मच गया। पुलिस की इस मुहिम में नंदनवन, सक्करदरा, कोतवाली, अजनी, अंबाझरी और वाठोड़ा क्षेत्र शामिल रहे। संबंधित प्रतिष्ठानों की जांच के बाद पुलिस ने कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की। हालांकि, पुलिस की ओर से प्रत्येक कैफे में मिली अनियमितताओं और कार्रवाई के अलग-अलग कारणों का विस्तृत ब्योरा जारी नहीं किया गया है। ऐसे में किसी विशेष प्रतिष्ठान को लेकर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

इन 17 कैफे पर हुई कार्रवाई

नंदनवन क्षेत्र में पार्टनर कैफे, कैफे ओ-ब्लिस, स्क्वायर बकेट कैफे, कैफे बाइट्स, ईगल कैफे एंड रेस्तरां और कैफे एलोरा पर कार्रवाई की गई। सक्करदरा में कैफे डॉट कॉम, टू चेयर्स कैफे, द केकेस कैफे, टीओएफ कैफे और कैफे एनईएस पुलिस की जांच के दायरे में आए।

वहीं, कोतवाली क्षेत्र के सी-3 कैफे कल्चर क्लब और ईंट एंड बाइट कैफे, अजनी के लियोपोल्ड कैफे और टीसीएच कैफे तथा अंबाझरी एवं वाठोड़ा क्षेत्र के मिलियन डॉलर कैफे और कैफे क्रू विंग्स के खिलाफ कार्रवाई की गई।

कार्रवाई के बाद अब दूसरे इलाकों पर नजर

एक ही दिन में 17 कैफे पर कार्रवाई और 20 लोगों के खिलाफ मामले दर्ज होने के बाद अब पुलिस अभियान की निरंतरता अहम होगी। मनीष नगर, बेसा-पिपला, बेलतरोड़ी, हुडकेश्वर, धरमपेठ, सीताबर्डी, सदर और प्रतापनगर जैसे इलाकों में संचालित कैफे व खाद्य प्रतिष्ठानों की भी नियमानुसार जांच की मांग उठ सकती है। हालांकि, इन क्षेत्रों में किसी प्रतिष्ठान के खिलाफ अनियमितता की पुष्टि के लिए अलग से तथ्य आवश्यक हैं।

शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं?

पुलिस के सामने चुनौती केवल छापेमारी तक सीमित नहीं है। यदि किसी प्रतिष्ठान के खिलाफ बार-बार शिकायतें मिलती हैं, तो उनकी समय रहते जांच कर कार्रवाई करना भी जरूरी है। अब देखना होगा कि यह अभियान नियमित रूप से जारी रहता है या कुछ समय बाद स्थिति फिर पहले जैसी हो जाती है।

Created On :   9 Oct 2026 8:35 PM IST

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