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नागपुर खंडपीठ: ध्वनि प्रदूषण पर सख्त रुख - हाईकोर्ट ने पुलिस आयुक्त के प्रति जताई नाराजगी, ऑनलाइन पोर्टल बनाने के निर्देश

Nagpur News. बढ़ते ध्वनि प्रदूषण पर सख्त रुख अपनाते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने पुलिस आयुक्त के प्रति कड़ी नाराजगी जताई है। जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट कहा कि यदि उसके आदेशों का सही तरीके से पालन नहीं हुआ, तो यह जिम्मेदारी किसी अन्य एजेंसी को सौंपी जाएगी या फिर मामले की जानकारी सीधे पुलिस महानिदेशक (डीजी) को दी जाएगी। यह टिप्पणी न्यायमूर्ति अनिल पानसरे और न्यायमूर्ति निवेदिता मेहता की पीठ ने बुधवार को सुनवाई के दौरान की। याचिका डॉ. भूपेंद्र कुमार वासनिक द्वारा दायर की गई थी, जिसे न्यायालय ने अन्य जनहित याचिकाओं के साथ संयुक्त रूप से सुना।
पिछली सुनवाई में न्यायालय ने शहर के लॉन्स और मंगल कार्यालयों में बजने वाले डीजे पर नियंत्रण के निर्देश दिए थे। इस पर पुलिस आयुक्त ने बताया कि संबंधित स्थलों को नोटिस जारी किए गए हैं और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए हैं। हालांकि, न्यायालय ने इस कार्रवाई में उपयोग किए गए कानूनी प्रावधानों की वैधता पर सवाल उठाया। यह भी सामने आया कि मामले भारतीय न्याय संहिता के बजाय भारतीय दंड संहिता के तहत दर्ज किए गए हैं, जिस पर अदालत ने नाराजगी जताई। न्यायालय ने पूछा कि क्या की गई कार्रवाई कानूनी रूप से टिकाऊ है? और क्या यह अदालत में परीक्षण के दौरान कायम रह सकेगी? इस संबंध में पुलिस को विस्तृत स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए गए। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि उसके आदेशों का गंभीरता से पालन होना चाहिए। यदि ऐसा नहीं होता, तो जिम्मेदारी अन्य एजेंसी को सौंपी जाएगी या वरिष्ठ अधिकारियों इस बारे में अवगत किया जाएगा।
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तो आम नागरिक और मूक पशुओं की स्थिति क्या होगी?
शहर में कितने लॉन और मंगल कार्यालय संचालित हैं तथा उनमें से कितनों ने डीजे बजाने की अनुमति ली है, इसकी जानकारी प्रस्तुत करने के निर्देश मनपा आयुक्त और जिलाधिकारी को दिए गए थे। हालांकि, मनपा की ओर से यह जानकारी अब तक प्रस्तुत नहीं किए जाने पर न्यायालय ने नाराजगी व्यक्त की। न्यायालय ने यह भी उल्लेख किया कि मनपा आयुक्त, जिलाधिकारी और पुलिस आयुक्त के सरकारी आवास सिविल लाइंस क्षेत्र में ही स्थित हैं। इसके बावजूद वहां के 13 लॉन में से केवल 3 ने ही अनुमति ली है। इस पर न्यायालय ने सवाल उठाया कि जब उच्च पदस्थ अधिकारी ही ध्वनि प्रदूषण से प्रभावित हो रहे हैं, तो आम नागरिकों और मूक पशुओं की स्थिति क्या होगी।
ऑनलाइन पोर्टल बनाने के निर्देश
न्यायालय ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि ध्वनि और वायु प्रदूषण की शिकायतों के लिए एक ऑनलाइन पोर्टल शुरू किया जाए। इस पोर्टल पर नागरिक फोटो और अन्य साक्ष्यों के साथ सीधे शिकायत दर्ज कर सकेंगे। साथ ही, प्राप्त शिकायतों और उन पर हुई कार्रवाई की जानकारी भी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराई जाए। मामले की अगली सुनवाई 2 अप्रैल को निर्धारित की गई है।
Created On :   26 March 2026 7:32 PM IST












