दैनिक भास्कर हिंदी: कोरोना के चलते महाराष्ट्र में अनाथ हुए 1450 बच्चे

June 1st, 2021

डिजिटल डेस्क, मुंबई। कोरोना के चलते अनाथ हुए बच्चों को बाल कल्याण निधि के तहत दी जाने वाली 11 सौ रुपए की राशि को बढ़ाकर पांच हजार रुपए करने का निर्देश दिया जाए और उनकी शिक्षा को सुनिश्चित किया जाए। इस तरह की मांग को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। यह याचिका पुणे निवासी गायत्री पटवर्धन ने दायर की है। याचिका में दावा किया गया है कि कोरोना के चलते राज्य भर में करीब 1450 बच्चे अनाथ हुए। इन सभी बच्चों व वयस्क युवाओं को बाल न्याय कानून 2015 के तहत शिक्षा का इंतजाम करने का भी निर्देश दिया जाए। याचिका में कहा गया है कि अनाथ बच्चों की पहचान से जुड़े दस्तावेजों को भी सरकार को सुरक्षित रखने के लिए कहा जाए। इसके अलावा यदि अनाथ बच्चों को पहचान पत्र दिया जाता है तो यह उनकी शिक्षा व रोजगार के लिए कारगर होगा। याचिका मे आग्रह किया गया है कि बच्चों के लिए बनाई गई हेल्पलाइन 1098 को जिला स्तर पर महिला व बालकल्याण विभाग से जोड़ा जाए। याचिका में कहा गया है कि राज्य सरकार ने अनाथ बच्चों की पहचान के लिए एक कार्यदल का गठन किया है। लेकिन ऐसे बच्चों की सिर्फ पहचान करना पर्याप्त नहीं होगा। सरकार को बच्चों की शिक्षा व उनके देखरेख से जुडी योजना की राशि को बढ़ाकर पांच हजार रुपए करना चाहिए। 

उधर एनसीपीसीआर ने सुप्रीम कोर्ट को बताया, देश में 1742 बच्चों के सिर से उठ गया माता-पिता का साया

उधर नई दिल्ली में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि 20 मार्च के बाद कोरोना के कारण 1742 बच्चों ने अपने माता-पिता को खोया है। सुप्रीम कोर्ट में एनसीपीसीआर की ओर से दाखिल हलफनामें में दी गई जानकारी के मुताबिक नए बनाए गए बाल स्वराज पोर्टल पर कोरोना से प्रभावित हुए 9346 बच्चों की जानकारी अपलोड की गई है। इसमें से 1742 बच्चें ऐसे है, जिन्होंने अपने माता-पिता दोनों को खोया है। जबकि 7464 ऐसे बच्चे हैं जिन्होंने माता-पिता में से किसी एक को खोया है। वहीं मार्च 2020 से 29 मई 2021 तक 140 बच्चों को छोड़ दिया गया है। जस्टिस नागेश्वर राव और जस्टिस अनिरुद्ध बोस की पीठ, कोरोना महामारी के दौरान बच्चों की सुरक्षा के मुद्दे पर स्वत: संज्ञान मामले पर विचार कर रही है, के समक्ष दायर हलफनामें में आयोग ने कहा है कि उसने केन्द्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को सूचित किया है कि देखभाल और सुरक्षा की जरुरत वाले बच्चों को ट्रैक करने के लिए छह चरणों वाली योजना तैयार की है। इसका उद्देश कोविड के कारण अनाथ हुए बच्चों की सहायता के लिए निगरानी करना है। 28 मई को सुनवाई के दौरान पीठ ने कोरोना काल में मार्च 2020 के बाद अनाथ हुए बच्चों की जानकारी तुरंत राष्ट्रीय पोर्टल पर अपलोड करने के बारे में जिला अधिकारियों को निर्देश दिया था।

महाराष्ट्र में 80 बच्चें हुए अनाथ

देश के विभिन्न हिस्सों से ऐसे कई मामलें सामने आए है, जहां कोरोना ने किसी बच्चें के दोनों माता-पिता को लील लिया है या अभिभावक में से एक की मौत हुई है। एनसीपीसीआर ने हलफनामे में पोर्टल पर उपलब्ध कराई गए आंकडों के अनुसार महाराष्ट्र में 29 मई 2021 तक 80 बच्चों के सिर से माता-पिता का साया उठ गया है। वहीं,716 बच्चें ऐसे है, जिन्होंने माता-पिता में से किसी एक को खोया है।

मध्यप्रदेश में सबसे ज्यादा बच्चें हुए अनाथ

हलफनामें के मुताबिक राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों में मध्यप्रदेश एकमात्र राज्य है जहां सबसे ज्यादा 318 बच्चों ने अपने माता-पिता दोनों को खोया है। वहीं, 290 बच्चें ऐसे हैं, जिनकी मां या बाप दुनिया को छोड़कर चला गया है। आयोग के मुताबिक मध्यप्रदेश में 104 बच्चों को छोड़ दिया गया है।