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ऑन लाइन फ्रॉड -2 दिन में बचत खाते से उड़ गए 1.99 लाख! - पता ने कर्ज लेकर बेटे की दी थी रकम 

ऑन लाइन फ्रॉड -2 दिन में बचत खाते से उड़ गए 1.99 लाख! - पता ने कर्ज लेकर बेटे की दी थी रकम 

डिजिटल डेस्क सतना। शिक्षक पिता ने अपने युवा बेराजगार बेटे को रोजगार के लिए 3 लाख का लोन लेकर रकम बेटे के बचत खाते में जमा कराई थी। इसी रकम में से 1 लाख 99 हजार 999 रुपए की राशि ऑन लाइन ठग ने उड़ा दी। खाते से कटौती का सिलसिला 25 नवंबर को महज 5 रुपए से हुआ और फिर क्रमश: 10 ट्रांजेक्शन  के जरिए उक्त राशि पेटीएम में चली गई। पुलिस मामले की जांच कर रही है। शिकायत पर पुलिस की साइबर सेल ने तत्काल फरियादी का डेबिट कार्ड ब्लॉक कराया मगर बावजूद इसके 20-20 हजार रुपए की किश्तों का सिलसिला नहीं थमा। बैंक से संबंधित खाते की डेबिट प्रॉसेस होल्ड किए जाने के बाद भी बकाया रकम बच पाई। 
 ऐसे हुई शुरुआत 
अमरपाटन थाना क्षेत्र ताला निवासी अशोक दहायत का एसबीआई की अमरपाटन ब्रांच में 7 वर्ष से बचत खाता चल रहा है। अशोक के शिक्षक पिता रामनरेश दहायत ने अपने युवा और शिक्षित बेरोजगार बेटे के रोजगार के लिए लगभग 3 लाख का कर्ज लेकर राशि बेटे अशोक के बचत खाते में डाली थी। अमरपाटन थाने में बेटे की ओर से की गई लिखित शिकायत के मुताबिक 24 नवंबर को उसके खाते से महज 5 रुपए की कटौती का एसएमएस आया। इससे पहले की अशोक कुछ समझ पाता अगले दिन 25 नंवबर को दोपहर 2 बज कर 33 मिनट पर उसके खाते से 20 हजार रुपए की राशि उड़ गई। इसके बाद देखते ही देखते 20-20 हजार की 3 कटौती और 19 हजार 999 की एक और रकम निकल गई। इस तरह से अज्ञात ऑन लाइन ठग ने अशोक के खाते से पहले दिन 99 हजार 999 रुपए पार कर दिए। 
  बैंक मैनेजर के देखते -देखते निकल गए एक लाख 
फरियादी अशोक दहायत ने इसी दिन पुलिस की साइबर सेल से संपर्क किया। साइबर सेल ने आनन फानन में उसके डेबिट कार्ड को ब्लॉक करा दिया। मगर,फिर भी राहत नहीं मिली। अगले दिन यानि 26 नवंबर को फरियादी अशोक दहायत ने 
 एसबीआई की अमरपाटन ब्रांच से संपर्क साधा और तत्काल एकाउंट का डेबिट प्रासेस होल्ड करने की अपील की। इससे पहले की ब्रांच मैनेजर डेबिट सुविधा के  होल्ड कर पाते। देखते ही देखते इसी खाते से 20-20 हजार की 5 और किश्ते यानि एक लाख रुपए की रकम खाते से उड़ गई। अशोक दहायत ने पुलिस को बताया कि वो फोन-पे का उपयोग करता है। 
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 ऐसे करें बचाव 
ऑन लाइन फ्रॉड से बचने का एक मात्र उपाय है। हर वक्त सतर्क रहें। विशेषज्ञों के मुताबिक सावधानी हटी और दुघर्टना घटी। फोन-पे हो या गूगल-पे या फिर इंटरनेट बैंकिंग जैसे ऑन लॉइन लेन देन का कोई भी माध्यम हो। जरुरत इस बात की है कि स्मार्ट मोबाइल में अच्छी किस्म के एंटी वायरस यूज करें। इससे भी आवश्यक ये तथ्य है कि मिलने वाले एसएमएम की सर्तकता के साथ जांच करें। अवांछित एसएमएस को सीधे डिलिट कर दें। खासकर लाटरी या आर्थिक संदेशों पर अतिरिक्त सर्तकता बरतें। मसलन- अक्सर, फिसर हिडेन वायरस के साथ खातों में मोटी रकम जमा होने का संदेश देकर उसकी पुष्टि करने का आग्रह करते हैं। ऐसे में लालचवश अगर कोई इस एसएमएस को क्लिक कर देता है तो ऑनलाइन ठग सामने वाले के मोबाइल को अपने कंट्रोल में ले लेता है। ऑनलाइन ठग प्राय: बॉर कोड का भी आप्शन देकर ठगने की कोशिश करते हैं। इन्हीं जानकारों का कहना है कि ऑनलाइन जालसाज ऐसे ही झांसे वाट्सएप, फेसबुक और जी-मेल पर देकर भी ठग सकते हैं। 
 पुलिस के भी बूते की बात नहीं 
बैंकिंग मामलों से जुड़े विशेषज्ञ बताते हैं कि अगर एक बार ऑनलाइन ठग ने किसी के बचत खाते पर हाथ साफ कर दिया तो पुलिस भी जांच के नाम पर महज लकीर ही पीट सकती है। अत्याधुनिक सॉफ्टवेयर और खतरनाक वायरस से लैस मालवेयर पुलिस से बहुत आगे हैं। ऐसे में जरुरत इसी बात की है कि स्वयं सतर्क रहें। लालच में न आएं।   
 

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