दैनिक भास्कर हिंदी: नौकरी के लिए सालों से भटक रहे 32 परिवार, मामला जमुनिया पठार कोयला खदान का

May 10th, 2019

डिजिटल डेस्क, छिंदवाड़ा/परासिया। जमीन देकर नौकरी की आस लगाए सरकारी आदेश का इंतजार कर रहे 32 परिवार अब हताश हो गए हैं। कोयला खदान के लिए शासन ने जमीन तो ले ली, लेकिन परिवार के सदस्यों को आज तक नौकरी नहीं दी। हताश हो चुके ये लोग कई बार स्थानीय स्तर से लेकर वेकोलि के आला अधिकारियों से शिकायत कर चुके हैं, लेकिन इन पीड़ित परिवारों की सुनने वाला कोई नहीं। मामला पेंचक्षेत्र की जमुनिया पठार खदान का है। जो स्वीकृति के बाद से ही अब तक आधा दर्जन विवादों में घिर चुकी है।

यह है मामला-
410 करोड़ की लागत वाली इस भूमिगत कोयला खदान के लिए वेकोलि ने 323 किसानों की 297.826 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित की थी। प्रभावित किसानों को 14 करोड़ 84 लाख का मुआवजा देने के बाद दो एकड़ या उससे अधिक जमीन वाले 227 किसानों के एक परिवार के सदस्य को नौकरी दी जानी थी, लेकिन सालों बीत जाने के बाद अभी तक 195 किसान के परिवार को ही नौकरी दी गई है। 32 किसान ऐसे भी हैं, जिन्हें आज भी नौकरी का इंतजार है, लेकिन इनका ये इंतजार सालों बाद भी खत्म नहीं हो पा रहा है।

सुरंग का काम बंद, पांच सालों में नही हुआ पूरा-
इस भूमिगत खदान में पांच साल पहले 800 मीटर की दो सुरंगों का निर्माण कार्य शुरु किया गया था, जो आज तक पूरा नहीं हुआ है। डेढ़ महीने पहले अधिकारियों ने यहां सुरंग का काम भी बंद कर दिया है। काम बंद करने की वजह किसी के पास नहीं है। पांच सालों में अधिकारी महज 380 मीटर सुरंग ही खोद पाए हैं।

37 सालों तक होगा उत्पादन-
37 सालों तक जमुनिया पठार खदान से कोयला उत्पादन किया जा सकता है। इस खदान में 22.27 मिलियन टन कोयला का भंडार है। 37 सालों में अधिकारियों ने यहां 0.72 मिलियन टन प्रतिवर्ष कोयला उत्पादन का टारगेट तय किया है।

नई तकनीक के लिए 30 करोड़ का प्रपोजल-
सुरंग का काम बंद होने के बाद यहां नई तकनीक से सुरंग खुदाई के लिए 30 करोड़ का प्रस्ताव वेकोलि को भेजा गया है। अधिकारियों का तर्क है कि इससे आधुनिक मशीनों से यहां खुदाई की जाएगी। प्रबंधन के अधिकारी दावा कर रहे हैं कि बोर्ड ऑफ डायरेक्टर से इसकी अनुमति मिल चुकी है।

कंगाली में जी रहे जमीन मालिक-
जिन किसानों ने अपनी जमीन सरकारी नौकरी की आस में वेकोलि को दी थी वे अब कंगाली में जीवन जी रहे हैं। सालों बीतने के बाद भी इन्हें नौकरी नहीं दी गई और अधिकारियों ने जमीन अलग ले ली। नौकरी के लिए पीड़ितों ने धरना प्रदर्शन, शिकायतें सहित अनशन तक कर लिया, लेकिन नौकरी का सपना पूरा नहीं हो पाया।

इनका कहना है-
जिन भू-स्वामियों ने नौकरी संबंधित दस्तावेज जमा नहीं किए हैं या फिर जिनका प्रकरण न्यायालय में पेंडिंग हैं। उन्हें छोड़कर सभी को नौकरी दी गई है। रही बात सुरंग के काम की तो इसे नई तकनीक से खोदा जाएगा।
आरके केसलीवार, उपक्षेत्रीय प्रबंधक, नेहरिया

जमुनिया पठार सहित क्षेत्र की तमाम खदानों में व्याप्त अनियमितता और कामगारों की समस्या को लेकर 16 मई को बैठक आयोजित की गई है। जिसमें सभी मुद्दों पर चर्चा की जानी है।
मनोज तिवारी, पेंचक्षेत्र अध्यक्ष, इंटक