दैनिक भास्कर हिंदी: भारी बारिश-बाढ़ से चौपट हुई 4 लाख 9 हजार हेक्टेयर खेती, नागपुर का तोतलाडोह अबतक लबालब नहीं

August 22nd, 2019

डिजिटल डेस्क, मुंबई। प्रदेश भर में बीते डेढ़ महीने में अतिवृष्टि और बाढ़ की स्थिति के कारण 4 लाख 9 हजार 516 हेक्टेयर क्षेत्र की फसलें चौपट हो गई है। अतिवृष्टि और बाढ़ की मार गन्ना, कपास, मक्का, सोयाबीन, तुअर, मूंग, उड़द, मूंगफली, बाजरा और सब्जियों की खेती पर पड़ी है। इसका असर खरीफ फसलों के उत्पादन पर पड़ना तय माना जा रहा है। राज्य सरकार के कृषि विभाग के एक अधिकारी ने ‘दैनिक भास्कर’ से बातचीत में कहा कि कोल्हापुर विभाग में नदी किनारे और आसपास के इलाकों में लगातार बारिश के कारण गन्ना, सोयाबीन, मूंग, उड़द, बाजरा, ज्वार और हल्दी की फसलों को क्षति पहुंची है। कृषि विभाग के अनुसार राज्य में खरीफ फसलों की अब तक 135.08 लाख हेक्टेयर क्षेत्र यानि 90 प्रतिशत बुवाई पूरी हो चुकी है। 

कम हुई गन्ने की बुवाई

इस बार सबसे कम बुवाई गन्ने की फसल की हुई है। प्रदेश में गन्ने की फसल का बुवाई क्षेत्र 9.05 लाख हेक्टेयर है पर अभी तक केवल 1.05 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई हुई है। नागपुर विभाग में खरीफ फसलों की 82 प्रतिशत बुवाई हुई है। लेकिन यहां कपास की फसलों पर गुलाबी बोंडअली का प्रभाव नजर आया है। कीड़े का असर सोयाबीन और धान की फसलों पर भी हुआ है। अमरावती विभाग में 96 प्रतिशत बुवाई हुई है। अमरावती विभाग के जिलों में लगातार बारिश न होने के कारण मूंग और उड़द की फसलों का उत्पादन कम होने की संभावना है। पुणे विभाग में 138 प्रतिशत बुवाई हुई है। लेकिन यहां पर गन्ने की फसलों पर हुमणी रोग का असर नजर आ रहा है। औरंगाबाद विभाग में 100 प्रतिशत बुवाई हुई है पर बीड़ में कम बारिश के कारण फसलों की वृद्धि पर असर पड़ा है। लातूर विभाग में 95 प्रतिशत बुवाई हुई है। यहां पर कपास और सोयाबीन की फसल पर कीड़ रोग लगा हुई है। नाशिक विभाग में 91 प्रतिशत बुवाई है। इस विभाग में उड़द और कपास की फसलों की स्थिति अच्छी है। जबकि कोंकण विभाग में 85 प्रतिशत बुवाई हुई है। इस विभाग के पालघर और रत्नागिरी जिले में फसलों पर करपा रोग का थोड़ा प्रभाव है। 

प्रदेश के 16 जिलों में 100 प्रतिशत से अधिक बारिश 

राज्य में 1 जून से 16 अगस्त के बीच औसत वर्षा 782.40 मिमी हुई है। राज्य भर में औसत की तुलना में 108.88 प्रतिशत बरसात हुई है। प्रदेश के 16 जिलों में 100 प्रतिशत से अधिक वर्षा हुई है। जबकि 13 जिलों में 75 से 100 प्रतिशत के बीच और 5 जिलों में 50 से 75 प्रतिशत तक बारिश हुई है। 

 

मराठवाडा के लोगों को कृत्रिम बारिश का न दिखाएं स्वप्न - चव्हाण

मराठवाडा में कृत्रिम बारिश का प्रयोग असफल होने के बाद सरकार को वास्तविकता स्वीकार करते हुए लोगों को झुठे सपने दिखाना बंद कर देना चाहिए। यह बात पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण ने कही है। उन्होंने कहा कि दुनियाभर में कृत्रिम बारिश को लेकर प्रयोग किए जाते हैं। महाराष्ट्र में भी कई वर्षों से यह शुरु है। कृत्रिम बारिश के प्रयोग को लेकर किसी का विरोध नहीं है लेकिन मराडवाडा में लगातार कृत्रिम बारिश का प्रयोग असफल रहा है। सरकार द्वारा कृत्रिम बारिश के लिए नया-नया मुहुर्त निकाला जाता है। जनता को हर बार यही उम्मीद रहती है कि इस बार बारिश होगी। लेकिन उन्हें निराश होना पड़ता है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता चव्हाण ने कहा कि सूखा अथवा कृत्रिम बारिश का मुद्दा राजनीति का मसला नहीं है। यदि किसी तकनीकी या प्राकृतिक कारणों की वजह से कृत्रिम बारिश संभव नहीं होती है तो सरकार को यह बात साफ करनी चाहिए। पर केवल सरकार की तत्परता दिखाने के लिए अनायास करोड़ों रुपए बर्बाद नहीं करने चाहिए। इस राशि का इस्तेमाल सूखा राहत कार्यों के लिए किया जा सकता है।      

तोतलाडोह में संतोषजनक नहीं भरा पानी, 31 अगस्त तक जारी बंदी

उधर खबर नागपुर से , जहां पश्चिम महाराष्ट्र सहित राज्य के कुछ क्षेत्रों में बाढ़ ने हाहाकार मचा रखा है। वहीं जिले सहित आसपास के क्षेत्र में पर्याप्त बारिश नहीं होने से जलाशय सूखे पड़े हैं। नागपुर शहर को जलापूर्ति करने वाले तोतलाडोह व नवेगांव खैरी प्रकल्प में पर्याप्त जलभंडारण नहीं हुआ है। जिस कारण शहर को एक दिन अंतराल से जलापूर्ति आगामी 31 अगस्त तक कायम रखने का निर्णय लिया गया है। पिछले साल बारिश कम होने के कारण मनपा का जल-नियोजन गड़बड़ा गया है। इस साल ऐन बारिश में पानी कटौती की नौबत मनपा पर आ गई है। पानी मिलने के सभी रास्ते बंद होने के बाद अंतत: जून महीने में ‘डेड स्टॉक’ से पानी लिया गया। 22 अगस्त तक पानी कटौती कायम रखने का निर्णय जुलाई में लिया गया था। लेकिन अभी भी संतोषजनक बारिश नहीं हुई है। तोतलाडोह और नवेगांव खैरी के जलभंडारण में बढ़ोतरी हो रही है, लेकिन पर्याप्त नहीं है। इसे ध्यान में रखते हुए पानी कटौती 31 अगस्त तक कायम रखने का निर्णय गुरुवार को मनपा जलप्रदाय समिति की बैठक में लिया गया। नागपुर शहर को जलापूर्ति, विद्युत प्रकल्प, सिंचाई व कलमेश्वर को जलापूर्ति करने के लिए इस प्रकल्प में कम से कम 600 एमएमक्यूब पानी आवश्यक है। फिलहाल प्रकल्प में इस्तेमाल करने योग्य 82.33 एमएमक्यूब पानी है।