दैनिक भास्कर हिंदी: शिक्षा विभाग के खिलाफ 45 स्कूलों ने ली हाईकोर्ट की शरण

November 28th, 2020

डिजिटल डेस्क, नागपुर। जिले के 45 निजी सीबीएसई स्कूलों ने शिक्षा विभाग के उस आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट की शरण ली है, जिसमें शिक्षा विभाग ने स्कूलों का वर्ष 2017 से लेकर अब तक का सारा ऑडिट करने का निर्णय लिया है। स्कूलों ने अनएडेड स्कूल वेलफेयर एसोसिएशन के नाम से दायर इस याचिका में जिला प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षाधिकारियों के उस निर्देश का भी विरोध किया है, जिसमें अधिकारियों ने स्कूलों को फीस नहीं भरने वाले विद्यार्थियों की ऑनलाइन पढ़ाई भी जारी रखने के आदेश दिए थे। मामले में याचिकाकर्ता का पक्ष सुनकर राज्य सरकार और शिक्षाधिकारियों को नोटिस जारी कर तीन सप्ताह में जवाब मांगा है। जब तक स्कूलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं करने के आदेश दिए गए हैं। 

यह है मामला 

19 मार्च को राज्य सरकार ने सभी स्कूल-कॉलेज बंद करने का आदेश जारी किया। 8 मई को राज्य सरकार ने जीआर जारी करके स्कूलों को फीस बढ़ाने से रोका और फीस चुकाने के लिए पालकों को कुछ राहत देने का भी आदेश दिया। याचिकाकर्ता के अनुसार इस आदेश में सरकार ने कहीं पर भी स्कूलों को बकाया फीस मांगने से नहीं रोका, लेकिन 3 जून 2020 को जिला प्राथमिक शिक्षा अधिकारी ने सभी स्कूलों को आदेश दिया कि वे लॉकडाउन अवधि में पालकों से फीस न लें, लॉकडाउन के बाद फीस मांगें। इसके बाद बॉम्बे हाईकोर्ट ने पालकों की फीस संबंधी याचिका खारिज की। 8 जुलाई को फिर शिक्षाधिकारी ने स्कूलों को निर्देश दिए कि फीस नहीं देने वाले विद्यार्थियों की ऑनलाइन क्लासेस बंद न की जाएं। इस आदेश का उल्लंघन करने वाले स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई की भी चेतावनी दी गई। इस संबंध मंे 15 अक्टूबर को शिक्षाधिकारी ने स्कूलों को निर्देश दिए कि राज्यमंत्री बच्चू कडू फीस संबंधी पालकों की शिकायत पर बैठक लेंगे। ऐसे में उनके प्रतिनिधि बैठक में उपस्थित रहे। 11 सितंबर को शिक्षाधिकारी ने लेखा अधिकारी को सीबीएसई स्कूलों के खिलाफ जांच बैठा दी। स्कूलों का वर्ष 2017 से लेकर, तो अब तक का लेखा-जोखा मंगाया गया। याचिकाकर्ता के अनुसार शिक्षाधिकारी राजनेताओं और कुछ पालक संगठनों के दबाव में आकर स्कूलों को प्रताड़ित कर रहे हैं। ऐसे में उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की।

भवंस हिंगनघाट को भी राहत

शिक्षा उपसंचालक नागपुर ने ऐसे ही मामले में हिंगनघाट स्थित भारतीय विद्या भवन के खिलाफ 9 नवंबर को वसूली का आदेश जारी किया था। अधिकारी के अनुसार स्कूल ने फीस के नाम पर पालकों से अतिरिक्त फीस ली है। जो स्कूल प्रबंधन को वापस लौटानी होगी। विभाग ने वर्ष 2014-15 और वर्ष 2018-19 की यह वसूली निकाली।   स्कूल ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी। दावा किया कि शिक्षा विभाग को स्कूल की फीस तय करने का अधिकार ही नहीं है। मामले में हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता का पक्ष सुनकर शिक्षा विभाग को नोटिस जारी किया है। मामले में जल्द ही सुनवाई होगी।
हाईकोर्ट का फैसला, याचिका अभी खारिज नहीं करेंगे

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