फिर भी आवारा पशुओं की धमाचौकड़ी पर नकेल नहीं कस पा रहा नगर निगम: बीमारी और पॉलीथिन की वजह नौ महीने में 56 गायों की मौत

October 21st, 2021


डिजिटल डेस्क छिंदवाड़ा। गायों की दुर्दशा के बाद सुर्खियों में आई नगर निगम की पाठाढाना स्थित गौशाला को आदर्श गौशाला का तमगा मिला है। दो साल पहले इस गौशाला की शुरूआत हुई थी। अफसर हमेशा दावा करते हैं कि ये जिले की सबसे अच्छी गौशालाओं में से एक है, लेकिन गायों की मौत के आंकड़ें कहानी कुछ और ही बता रहे हैं। जनवरी से लेकर सितंबर तक इस गौशाला में अब तक 56 गायों की मौत हो चुकी है।
2018 में प्रदेश की सत्ता परिवर्तित होने के बाद जिले में नई गौशालाओं को बनाने की शुरूआत हुई थी। प्रदेश के मुखिया का गृह जिला होने से पाठाढाना की गौशाला को आदर्श गौशाला का नाम देकर शुरू किया गया था। सुविधाओं से लैस इस गौशाला में अधिकारियों ने करोड़ों खर्च कर डाले, लेकिन गायों की मौतें यहां रुकने का नाम नहीं ले रही हैं। इन नौ महीने में अब तक 56 गायों की मौत इस गौशाला में हो चुकी है। पिछले दिनों ही हिंदूवादी संगठनों ने यहां गायों की दुर्दशा का मामला भी सामने लाया था। तब आनन-फानन में जांच दल का गठन कर पूरे मामले की तफ्तीश करवाई गई।
शुरू से ही विवादों में
बिना टेंडर काम: सबसे पहले यहां बिना टेंडर के काम का मामला सामने आया था। अधिकारियों ने तात्कालिक सीएम के हाथों उद्घाटन कराने के लिए लाखों रुपए के काम बिना टेंडर के कर लिए थे। जिस फर्म को काम दिया गया था। उसको वर्कऑर्डर ही जारी नहीं किया गया।
शेड पर कब्जा: शेड पर कब्जे का मामला भी यहां सुर्खियों में आया था। जबलपुर के व्यापारी ने शिकायत की थी कि नाफेड के शेड को काटकर निगम ने यहां कब्जा कर लिया है। मामला जब मीडिया की सुर्खियां बना तो अब इस शेड को खाली कराने की भी बात कही जा रही है।
क्यों होती है गायों की मौत
पॉलीथिन: इस गौशाला में शहर में आवारा घूमने वाली गायों को ही लाया जाता है। डॉक्टरों का मानना है कि ऐसी गायें चारा न होने से शहर में पॉलीथिन खाती हैं। जिस वजह से पेट में फंस जाने से इस गायों की मौत हो रही है।
बूढ़ी गायें: निगम की टीम शहर से आवारा मवेशियों को पकड़कर गौशाला में लाती है। पशु मालिक बूढ़ी गायों को शहर में छोड़ देते हैं। इसे ही पकड़कर निगम गौशाला में रख रहा है। इन गायों की हालत ऐसी नहीं रहती है कि वे ज्यादा दिन गौशाला में जीवित रह सकें।
इनका कहना है...
॥कमजोर गायें ही गौशाला लाई जाती हैं। गायों की स्थिति मरणासन्न रहती है। इस स्थिति में गायों को बचा पाना मुश्किल होता है।
-अनंत कुमार धुर्वे, सहायक आयुक्त, निगम

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