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जो स्वयं को जान ले वह सब कुछ जान गया , आचार्य सुवीरसागर ने बताए आत्मा के प्रकार

जो स्वयं को जान ले वह सब कुछ जान गया , आचार्य सुवीरसागर ने बताए आत्मा के प्रकार

डिजिटल डेस्क, नागपुर। जिसने स्वयं को जाना उसने सब कुछ जान लिया। यह उद्गार आचार्य सुवीरसागर ने श्री चंद्रप्रभ दिगंबर जैन मंदिर बाहुबलीनगर में व्यक्त किए। उन्होंने कहा, जिसने  पर को जाना उसने कुछ नहीं जाना, जिसने स्व को जाना उसने सब कुछ जाना। बहीरात्मा, अंतरात्मा और परमात्मा 3 प्रकार की आत्मा हैं। बहीरत्मा से अंतरात्मा बने और अंतरात्मा से परमात्मा बनने का पुरुषार्थ करें। शरीर, धन, पुत्र, मित्र, परिवार, मकान, दुकान सब करते रहते हैं। यह  बहीरात्मा है। जो इसमें से कुछ समय निकालकर भगवान का अभिषेक, शांतिधारा, पूजन, आरती, समायिक, स्वाध्याय, गुरुभक्ति करता है। वह अंतरात्मा को प्राप्त कर सकता है। क्रमशः आगे बढ़कर जैनेश्वरी मुनि दीक्षा धारण कर अंतरात्मा से परमात्मा बनने का पुरुषार्थ कर सकता है। अंतरात्मा का बोध करने के लिये परमात्मा की आराधना करना पड़ती है। हम अपने स्वरुप को जाने। पैसा पुण्य से मिलता है और पुण्य देव-गुरु-शास्त्र की भक्ति से मिलता है। मिथ्यादृष्टि दान देता है तो वह भोग भूमि को प्राप्त करता है। सम्यग्दृष्टि दान देता है तो वह स्वर्ग को प्राप्त करता है। समन्तभद्र स्वामी ने रत्नकरण्ड श्रावकाचार में श्रावकों के 6 कर्तव्य बताए हैं। 

दान, पूजा, गुरु उपासना, स्वाध्याय, संयम और तप। इन्हें नित्य  नियम से प्रतिदिन करना चाहिए। तभी श्रावक कहलाओगे। जो देता है वह देवता बनता है और जो रखता है वह राक्षस बनता है, ऐसा आचार्य कुन्दकुन्द देव ने बोधपाहुड ग्रंथराज में लिखा है। संसारी जीव अपने शुद्ध भाव, सम्यग्दर्शन, सम्यग्ज्ञान और सम्यक चारित्र से समस्त कर्मजाल कट कर जन्म-मरण से मुक्त हो सकता है। स्वर्ग की प्राप्ति व्रतों से सुलभ है। सब काम करते हुए समय निकालकर भगवान की भक्ति भी करना चाहिए। इससे जो भी काम करोगे, वह और भी आसान हो जायेगा। हमेशा गुरु के आहार-विहार और भक्ति तथा वैयावृत्ति में रहना चाहिए। इससे मोक्ष मार्ग प्रशस्त होगा। दूसरे को देखकर दुःखी होने के स्थान पर स्वयं को जो मिला है उस में संतोष रखने से परम शांति मिलेगी। 

दो दिन और बाहुबली नगर मंदिर में विराजमान 

बुधवार तथा गुरुवार को भी आचार्यश्री बाहुबली नगर स्थित श्री चंद्रप्रभ दिगंबर जैन मंदिर में विराजमान रहेंगे। उनका सान्निध्य लाभ के लिए मंदिर कमेटी के प्रमुख संयोजक राजेंद्र बंड, दीपक दर्यापुरकर, मधुकरराव मखे, सुधीर सावलकर, दिनेश जैन, निलेश घ्यार, पंकज सावलकर, पंडित उदय मोहल, नरेंद्र तुपकर, चंद्रकांत बंड, सुरेश वरुडकर, मनीष विटालकर ने श्रीफल चढ़ाकर निवेदन किया। आचार्यश्री ने भक्तों की भक्ति देखकर स्वीकृति दे दी।  दीप प्रज्वलन कार्याध्यक्ष सतीष पेंढारी, सुमत लल्ला, महेश नायक, उपमंत्री दिनेश जैन, हीराचंद मिश्रीकोटकर, प्रदीप काटोलकर ने किया। चरण प्रक्षाल  राजेंद्र बंड परिवार ने किया। जिनवाणी भेंट चंद्रकांत बंड परिवार ने की। स्वागत गीत एवं मंगलाचरण निकिता दर्यापुरकर, प्राची कस्तुरे, आशु जैन, निधि पलसापुरे ने गाया। संचलन महामंत्री पंकज बोहरा ने किया। 

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