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37 साल बाद इस दिवाली बना है ये महासंयोग, जानिए क्या है खास

37 साल बाद इस दिवाली बना है ये महासंयोग, जानिए क्या है खास

डिजिटल डेस्क, नागपुर। दीपों के पर्व दीपावली पर रविवार को भौतिक सुखों को प्रदान करने वाली देवी माता लक्ष्मी की पूजा-अर्चना और आराधना की जा रही है। इस वर्ष दीपावली के दिन पूरे 37 साल बाद सूर्यदेव का दिन, चित्रा नक्षत्र और अमावस्या मिलकर एक महासंयोग बना रहे हैं। यह महासंयोग महालक्ष्मीजी की कृपा बरसाएगा। दीपावली का पर्व कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को धूमधाम से मनाया जाता है। अमावस्या तिथि 27 अक्टूबर को दोपहर 12.23 से आरंभ होगी और सोमवार, 28 अक्टूबर को सुबह 9.8 बजे खत्म होगी।

मां लक्ष्मी को नहीं चढ़ा सकेंगे तुलसी

मां लक्ष्मी की पूजा में तुलसी अर्पित किया जाता है, लेकिन रविवार को लक्ष्मी पूजा होने के कारण तुलसी नहीं चढ़ा सकेंगे। रविवार को तुलसी का पत्ता तोड़ना वर्जित माना जाता है। इसलिए इस बार मां लक्ष्मी की पूजा तुलसी के बगैर होगी।

मां भगवती गिरिजा के अनेक रूप हैं और प्रत्येक रूप में वह अपने गुणों को साकार करती हैं। वह अपने भक्तों की सब बाधाएं दूर करती हैं। मां के उग्र स्वरूप को देखकर शत्रुओं का मुख मलीन पड़ जाता हैं, वह पापियों को सदा दुःख देती हैं और पुण्यात्माओं को सुख पहुंचाती हैं। आयोजन की सफलतार्थ अध्यक्ष शिवकिसन अग्रवाल (हल्दीराम), सागरमल अग्रवाल, सत्यनारायण अग्रवाल, संतोष यादुका, सत्यनारायण लोया, हर्ष अग्रवाल, विमल अग्रवाल, मनोहरलाल अग्रवाल, राजेन्द्र अग्रवाल, सुशील अग्रवाल, कमल अग्रवाल, शंकरलाल जालान, शंकरलाल खंडेलवाल, प्रेमनाथ शर्मा, अशोक गोयल, श्यामबिहारी गोयल, सुनील अग्रवाल, रमेशकुमार गर्ग, शंभुभाई पटेल आदि प्रयास कर रहे हैं। कथा का समय नित्य सुबह 6 से 6.45 बजे तक रखा गया है।

नृसिंह मंदिर में कार्तिक महात्म्य कथा ज्ञानयज्ञ 

रौद्ररूप भगवान शिव अपने वीरगणों के साथ नंदी पर चढ़कर हंसते हुए युद्ध भूमि में आए। भीषण रूपधारी रुद्र को देखकर दैत्य इधर- उधर भागने लगे। अपने दैत्यों को भागते हुए देख जलंधर हजारों बाण छोड़ता हुआ शिव की ओर दौड़ा और शिव ने अपने अन्य बाणों की आंधी से दैत्यों को पीड़ित कर दिया। यह उद्गार नृसिंह मंदिर, धारस्कर रोड, इतवारी में महंत रोहितदास शर्मा के मार्गदर्शन में जारी कार्तिक महात्म्य ज्ञानयज्ञ कथा में पं. प्रमोदकुमार पांडेय ने अपनी अमृतमयवाणी में व्यक्त किए।  पं. आनंदीलाल के अनुसार कथा का समय सुबह 6.30 से 7.30 बजे तक रखा गया है।

दीपावली पर भूलों की क्षमा मांगे : माधवदास

थाड़ेश्वरी राम मंदिर, तिलक पुतला, महल के महामंडलेश्वर माधवदास महाराज ने कहा कि दीपावली एक ऐसा महान पर्व है जिसमें सभी शिष्यों और भक्तों को वर्ष भर किए हुए भूलों की क्षमा मांगनी चाहिए। इस पर्व को जितना अधिक शुद्ध हृदय से मनाओगे उतना ही अधिक आनंद आएगा।

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