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दो विभागों की मंजूरी के लिए अटका अजनी इंटर मॉडल स्टेशन, करना होगा और इंतजार

दो विभागों की मंजूरी के लिए अटका अजनी इंटर मॉडल स्टेशन, करना होगा और इंतजार

डिजिटल डेस्क, नागपुर । मध्य रेलवे  नागपुर मंडल का नागपुर स्टेशन सबसे महत्वपूर्ण स्टेशन है। इसके साथ ही अजनी भी महत्वपूर्ण स्टेशन है। अजनी स्टेशन को इंटर मॉडल स्टेशन बनाने की तर्ज पर कार्य किया जाएगा। यहां एक ही स्थान से शहरवासियों और रेलवे से आने वाले यात्रियों को मेट्रो सुविधा, बस, टैक्सी सुविधा मिल सकेगी। इस इंटर मॉडल स्टेशन के लिए रेल लैंड डेवलपमेंट अथॉरिटी और एनएचएआई भी एमओयू साइन किया। इसके साथ ही अजनी रेलवे स्टेशन के पीछे की जमीन पर भी इमारतों का निर्माण कर वहां ऑफिस और कर्मशियल उपयोग के लिए रखा जाएगा। इसमें एक दिन में 3 लाख यात्रियों की क्षमता है। इसके लिए जून 2018 में स्टेट इनवॉयरमेंट इंपैक्ट असेसमेंट अथॉरिटी से अब तक इनवॉयरमेंटल क्लीयरेंस ही नहीं मिल पाया है। एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर ने विभाग अधिकारी से तारीख देने की बात की थी जो दिवाली के बाद देने की बात कही गई थी।

इस तरह बनने वाला था इंटर मॉडल स्टेशन
इस इंटर मॉडल स्टेशन के पीछे ही कमर्शियल उपयोग के लिए भी इमारतें बनाई जाएंगी। साथ ही इसमें रेलवे के भी क्वार्टर और ऑफिस सहित हेल्थ सेंटर, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, जोन 4 डीसीपी ऑफिस भी लगभग 70 करोड़ में बनेगा। इसके साथ ही पर्यावरण की दृष्टि से रेल वॉटर हार्वेस्टिंग और सोलर पैनल का उपयोग होगा। 

अजनी स्टेशन पर कार्य 
रेलवे टर्मिनल में अजनी रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर 7 का निर्माण किया जाएगा, जहां पर एस्केलेटर और लिफ्ट लगाई जाएगी। इसके साथ ही स्टेशन से  आईएमएस की कोर बिल्डिंग तक 3 फीट ओवरब्रिज तैयार किए जाएंगे। इसमें दो ब्रिज 10 मीटर चौड़ाई के रहेंगे और एक ब्रिज 30 मीटर चौड़ा रहेगा। रेलवे स्टेशन बिल्डिंग का भी रिनाेवेशन किया जाएगा। आईएमएस के कोर और रेलवे के बीच में भविष्य में होने वाले विकास के लिए 270 मीटर की जगह भी छोड़ी जाएगी।

परमिशन नहीं मिलने के कारण अटका हुआ है कार्य
इस निर्माण कार्य में जेल की भी जमीन का उपयोग होने वाला था, जिसके कारण कार्य रुके जाने की जानकारी सामने आ रही थी, लेकिन पहले फेज में केवल रेलवे की जमीन पर कार्य होना है उसके लिए वन, पर्यावरण मंत्रालय और स्टेट इनवॉयरमेंट इंपैक्ट असेसमेंट अथॉरिटी (एसईआईएए) की ही मंजूरी नहीं मिली है, जिसके कारण कार्य अटका हुआ है। 

16 और 19 माह बाद भी अनुमति नहीं
इसके फेज वन के कार्य के लिए परमिशन और अप्रूवल भेज दिए गए हैं, लेकिन कुछ विभागों से अभी तक अप्रूवल नहीं मिल पाया है, जिसके कारण कार्य शुरू नहीं हो पा रहा है। इसमें एनवॉयरमेंट क्लीयरेंस के लिए स्टेट इनवॉयरमेंट इंपैक्ट असेसमेंट अथॉरिटी (एसईआईएए) को 19 जून 2018 को प्रपोजल भेजा था। प्रपोजल भेजने के 16 महीने बाद भी अभी तक अप्रूवल नहीं मिल पाया है।

अप्रूवल के लिए एनएचएआई के अधिकारी लगातार कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अभी तक एसईआईएए ने तारीख नहीं दी है। अब कुछ समय पहले विभाग के मेंबर सेक्रेटरी से बात करने पर उन्होंने दिवाली के बाद तारीख देने की बात की थी। रेलवे की जमीन पर कई पेड़ भी हैं जिन्हें काटने के लिए एमओईएफ वन, पर्यावरण मंत्रालय से भी अप्रूवल नहीं मिल पाया है। इसके लिए एनएचएआई ने 31 मार्च 2018 को अप्रूवल भेजा था, लेकिन वह भी अभी तक मंजूर नहीं हो पाया। इसे भी 19 माह हो चुके हैं।

बस सुविधा के लिए
ग्राउंड फ्लोर -   टिकट ऑफिस, काउंटर, शौचालय, 1600 लोगों के लिए वेटिंग एरिया, क्लोक रूम, स्टाॅफ रूम, मेंटेनेंस रूम, रेवेन्यू ऑफिस, कैंटीन 
रेलवे सुविधा के लिए
ग्राउंड फ्लोर :  स्टाॅफ ऑफिस, वीआईपी रूम, पार्सल रूम, पार्सल स्टोरेज, कंट्रोल रूम, 6 रेलवे और 6 बसों के लिए 35 वर्ग मीटर की 12 रिटेल दुकानें, 350 कवर की हुई कार पार्किंग 
फर्स्ट फ्लोर : डोरमिटरीज टिकट ऑफिस, टिकट काउंटर, शौचालय, वेटिंग रूम (1600 लोग), वीआईपी रूम, 10 रिटेल दुकान 
सेकंड फ्लाेर : टिकट ऑफिस, फूड कोर्ट, रेस्टोरेंट और लाउंज
दिवाली के बाद तारीख 

देने की हुई बात
वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से पेड़ कटाई के संबंध में अप्रूवल और एसईआईएए से इनवॉयरमेंटल क्लीयरेंस के संबंध में अप्रूवल नहीं मिला है अप्रूवल के लिए दिवाली के बाद की तारीख देने की बात हुई है। अब तारीख मिलते ही अप्रूवल मिल जाएगा।
-अभिजीत जिचकार, प्रोजेक्ट डायरेक्टर
 

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।