comScore

महाराष्ट्र : अखिलेश की पार्टी ने जीती दो सीट, मायावती का खाता भी नहीं खुला 

October 28th, 2019 18:12 IST
महाराष्ट्र : अखिलेश की पार्टी ने जीती दो सीट, मायावती का खाता भी नहीं खुला 

डिजिटल डेस्क, मुंबई। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी (सपा) अपनी विरोधी बहुजन समाज पार्टी (बसपा) पर भारी पड़ गई है। उत्तर प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली सपा-बसपा महाराष्ट्र की राजनीति में भी जोरआजमाईश करती रहती हैं। इस विस चुनाव में भी समाजवादी पार्टी बसपा के मुकाबले बीस रही है। हालांकि महाराष्ट्र में सपा की अपेक्षा बसपा का संगठन व जनाधार बेहतर माना जाता है। विदर्भ अंचल में मजबूत माने जाने वाली बसपा का वोट बैंक अब धीरे-धीरे क्षीण हो रहा है। राज्य विधानसभा चुनाव में बसपा ने 288 में से 262 सीटों पर उम्मीदवार उतारा था। लेकिन बसपा एक भी सीट नहीं जीत सकी। जबकि सपा ने 7 सीटों पर उम्मीदवार खड़े कर दो सीटों पर जीत हासिल की है। मुंबई की मानखुर्द-शिवाजीनगर सीट से अबू आसिम आजमी और भिवंडी पूर्व सीट से रईस शेख निर्वाचित हुए हैं। 

वंचित आघाडी ने लगाई सेंध

साल 2014 के विधानसभा चुनाव के मुकाबले इस चुनाव में बसपा का वोट प्रतिशत में भी गिरावट आई है। वंचित बहुजन आघाडी के मैदान में उतरने के कारण बसपा के वोट में सेंध लगी है। साल 2014 के विधानसभा चुनाव में बसपा ने 2.25 प्रतिशत मत के साथ 11 लाख 91 हजार 846 वोट मिले थे। इस बार के विधानसभा चुनाव में बसपा को 0.92 प्रतिशत मत यानि  5 लाख 4 हजार 911 वोट मिले हैं। वहीं साल 2014 के विधानसभा चुनाव में सपा को 0.17 मत के साथ 92 हजार 304 वोट मिले हैं। जबकि साल 2019 के विधानसभा चुनाव में सपा को 0.2 प्रतिशत मत यानी 1 लाख 23 हजार 267 वोट मिले हैं। 

महाराष्ट्र में अब तक खाता नहीं खोल पाई बसपा 

महाराष्ट्र में अब तक 7 विधानसभा चुनाव लड़ने वाली बसपा अपना खाता नहीं खोल सकी है जबकि 6 विधानसभा चुनाव लड़ने वाली सपा के अब तक 12 विधायक निर्वाचित हो चुके हैं। साल 1990 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में बसपा ने 122 उम्मीदवार उतारे थे लेकिन सभी उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई। साल 1995 के विधानसभा चुनाव में बसपा ने 145 उम्मीदवार उतारे थे 142 उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई। पार्टी को एक भी सीट पर सफलता नहीं मिल सकी। साल 1999 के विधानसभा चुनाव में बसपा के 83 उम्मीदवारों में से एक भी उम्मीदवार जमानत नहीं बचा सके। साल 2004 के विधानसभा चुनाव में बसपा के 272 उम्मीदवारों में से 263 उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई और पार्टी को एक भी सीट नहीं मिल पाई। साल 2009 के विधानसभा चुनाव में बसपा के 281 उम्मीदवारों में से 279 उम्मीदवार जमानत नहीं बचा पाए। इस चुनाव में भी पार्टी खाता नहीं खोल सकी। साल 2014 के विधानसभा चुनाव में बसपा के 280 उम्मीदवारों में से 275 उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई और एक सीट भी हासिल नहीं हुई। साल 2019 के विधानसभा चुनाव में बसपा के 262 उम्मीदवारों में से अधिकांश उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई है। इस चुनाव में भी पार्टी का खाता नहीं खुल पाया। 

सपा के अब तक बने 12 विधायक

महाराष्ट्र में सपा ने अब तक 6 विधानसभा चुनाव लड़ा है। इन 6 विधानसभा चुनावों में सपा के 12 विधायक निर्वाचित हुए हैं। साल 1995 में पहली बार महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव लड़ने वाली सपा ने 22 उम्मीदवार उतारे थे जिसमें से पार्टी को 3 सीटों पर सफलता मिली थी। 15 उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई थी। साल 1999 के विधानसभा चुनाव में सपा के 15 उम्मीदवारों में से 2 उम्मीदवार विजयी हुए। जबकि 10 प्रत्याशी अपनी जमानत नहीं बचा सके। साल 2004 के विधानसभा चुनाव में सपा के 95 उम्मीदवारों में से 91 उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई। इस चुनाव में सपा का एक भी उम्मीदवार चुनाव नहीं जीत पाया। साल 2009 के विधानसभा चुनाव में सपा के 31 उम्मीदवारों में से 4 उम्मीदवार विधायक बन गए।। साल 2014 के विधानसभा चुनाव में सपा के 22 प्रत्याशियों में से केवल 1 प्रत्याशी प्रदेश सपा अध्यक्ष अबू आसिम आजमी की जीत हुई थी। जबकि 21 प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई। साल 2019 के विधानसभा चुनाव में सपा के 7 उम्मीदवारों में से 2 उम्मीदवारों ने जीत हासिल की। जबकि 5 उम्मीदवार जमानत नहीं बचा पाए। कांग्रेस ने कांग्रेस-राकांपा से गठबंधन कर चुनाव लड़ा। 

कमेंट करें
WHOAp
NEXT STORY

डिजिटल इंडिया को गति देता रोहित मेहता का Startup Digital Gabbar

डिजिटल इंडिया को गति देता रोहित मेहता का Startup Digital Gabbar

डिजिटल डेस्क,भोपाल। "सफलता सिर्फ उनको नहीं मिलती जो सफल होने की इच्छा रखते है, सफल हमेशा वही होता है जो आगे बढ़ कर उन्हे पाने की चाहत रखते है।" ये उद्धहरण उनके लिए नहीं है जो आराम की जिंदगी को छोड़ कर बाहर नहीं निकालना चाहते, बल्कि ये उनपे लागू होती है जो निरंतर प्रयास करते रहते है।

इसी तर्ज पर चलते हुए, बिहार के पटना के शहर से आने वाले आईटी और तकनीक प्रेमी डबल मास्टर्स डिग्री धारी ने डिजिटल मार्केटिंग के क्षेत्र में उल्लेखनीय यात्रा शुरू की थी, लेकिन आज वो इस मुकाम पर पहुँचे जाएंगे उन्होंने ऐसा नहीं सोचा होगा, की कुछ साल बाद, वह उन युवाओं के लिए प्रेरणा बनेंगे जो digital content curation में करियर बनाने की इच्छा रखते हैं।

उक्त व्यक्ति और कोई नहीं, बल्कि प्रसिद्ध digital marketer रोहित मेहता हैं, जो एक ब्लॉगर के रूप में उत्कृष्ट हैं और एक प्रख्यात आईटी विशेषज्ञ हैं, जिन्होंने अपनी ज्ञानवर्धक ई-पुस्तकों के साथ दुनिया के साथ अपने ज्ञान को साझा करते हुए कई अहम भूमिकाएँ निभाई हैं।

एक दशक से अधिक की अवधि के लिए IT industry में काम करने के बाद, रोहित मेहता ने खुद को एक ऐसे tech blogger के रूप में प्रतिष्ठित किया है जो अपने पाठकों के साथ ऐसी तकनीकी ज्ञान को साझा करता है जो उन्हें बेहतर बेहतर बनने में मदद करती है।

हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओ में अपनी किताब को करने वाले रोहित ने ये साबित कर दिया है की डिजिटल मार्केटिंग केवल अंग्रेजी जानने वालों के लिए नहीं है। हिंदी में भी पढ़ कर आप इसे सिख सकते है ओर अपना करियर बन सकते है। इनकी सबसे अधिक लोकप्रिये बुक '15 Proven Secrets of Internet Traffic Mastery' है, जिसमे अपने अनलाईन बिजनस या ब्लॉग पर ट्राफिक (पाठक) लाने के 15 बेहतरीन तरीके बताए है।

आज, रोहित मेहता डिजिटल गब्बर (Digital Gabbar) नामक भारत के सबसे बड़े डिजिटल कंटेंट प्लेटफ़ॉर्म के संस्थापक संपादक हैं, एक अभूतपूर्व विज़न जिसका नेतृत्व डिजिटल उत्साही लोगों के एक समूह द्वारा किया जा रहा है।

जीवन में अपनी विभिन्न गतिविधियों पर रोहित के साथ बातचीत में, वे कहते हैं, " हर दूसरे आदमी की तरह, मैं भी इंटरनेट की दुनिया में नया था जब मैनें इसमे कदम रखा था। शुरू से ही कुछ नया सीखने और उसको साझा करने की चाहते ने मुझे ब्लॉगिंग में अपना करियर शुरू करने की प्रेरणा दी, तब से मैंने पीछे नहीं देखा हर एक नए सुबह के साथ इच्छा सकती मजबूत होती गई, Digital Gabbar शुरू करने से पहले बहुत से ब्लॉग/वेबसाइटें शुरू की मगर खुशी (kick) नहीं मिली”।

"डिजिटल गब्बर केवल एक ड्रीम प्रोजेक्ट नहीं है, बल्कि हमारे पाठकों के साथ जुड़ने का जरिया है जो किसी भी सीमा से परे है। हम ब्लॉगिंग, एफिलिएट से सम्बंधित टिप्स और ट्रिक्स की अपडेटेड जानकारी साझा करते हैं। जैसे : मार्केटिंग, एसईओ, ड्रापशीपिंग, सोशल मीडिया, ऑनलाइन मनी मेकिंग, गाइड्स, ट्यूटोरियल्स और बहुत कुछ।  

डिजिटल मार्केटिंग के क्षेत्र में एक उल्लेखनीय कैरियर का नेतृत्व करने के बाद, डिजिटल गब्बर की टीम लोकप्रिय डिजिटल मार्केटर्स, ब्लॉगर्स, YouTubers, उद्यमियों के साथ साक्षात्कार की एक श्रृंखला शुरू करने पर विचार कर रही है, ताकि भविष्य में डिजिटल इंडिया उनकी एक झलक दिखा सकें। जीवन की कहानियां जो प्रेरणा मिलती है वो सायद ही किसी और कार्य से मिलती होंगी।

रोहित मेहता के प्रमुख योगदान

आज दूरदर्शी रोहित मेहता ने डिजिटल मार्केटिंग, ब्लॉगिंग, एफिलिएट, एसईओ, ड्रापशीपिंग, सोशल मीडिया, ऑनलाइन मनी मेकिंग मे अनेकों गाइड्स और सुझावों इत्यादि अपने पाठकों के डिजिटल गब्बर पे बिल्कुल मुफ़्त में साझा करते है।

साथ ही अपने सोशल मीडिया अकाउंट के जरिए नए उधमियों को मुफ़्त मे सलाह भी साझा करते है। @bloggermehta से आप इन्हे फ़ेसबुक, इंस्टाग्राम,ट्विटर इत्यादि पे संपर्क कर सकते है।

गब्बर रोहित का लक्ष्य

अपने ब्लॉग डिजिटल गब्बर के अनुशार रोहित बताते है की उनका लक्ष्य सिर्फ जानकारी को साझा करना नहीं है, बल्कि डिजिटल इंडिया के युवाओ से उसको अमल भी करवाना चाहते है। ताकि आने वालों कुछ सालों में डिजिटल के क्षेत्र में इंडिया युवा पीढ़ी किसी से काम न रहे। यही कारण है की इन्होंने डिजिटल गब्बर की शुरुवात हिंदी और इंग्लिश दोनों भाषाओ में एक साथ की है।

https://www.digitalgabbar.com/ और https://www.digitalgabbar.in/ क्रमशः रोहित के इंग्लिश और हिंदी के ब्लॉग है।

साथ ही साथ रोहित मेहता ने अपने जैसे युवाओ और start-up को बढ़ावा देने के लिए Indian Gabbar के नाम से एक साइट शुरू किया है। Digital Gabbar सभी उधमी और startup को Indian gabbar के रूप में संबोधित करते हुए उनकी आर्टिकल को बिल्कुल मुफ़्त में साझा कर रहा है।

कोई भी इच्छुक व्यक्ति या संस्थान आपनी कहानी प्रकाशित करने के लिए Indian Gabbar से संपर्क करें। 

NEXT STORY

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।