दैनिक भास्कर हिंदी: चंद्रपुर में शराब बंदी हुई तो बढ़ी अफीम, गांजा और अल्प्राजोलम पाउडर की बिक्री

January 22nd, 2019

डिजिटल डेस्क, चंद्रपुर। शराबबंदी के फैसले के बाद ड्रग्स माफियाओं के लिए चंद्रपुर बड़ी मंडी के रूप में उभरने लगा है। पाबंदी के बाद जिले में तस्करी कर लाई जाने वाली शराब महंगी हो गई है। नतीजतन नशा भी फीका हो गया। लेकिन इसे चरम पर पहुंचाने के लिए जिले में एक चालाक गिरोह सक्रिय हो गया है। ये गिरोह अल्प्राजोलम (कुत्ता गोली) को पीसकर उसे छोटे-छोटे प्लास्टिक के पैकेट में भरकर नशे के आदी लोगों को ड्रग्स के रूप में बेच रहा है। इसके अलावा अफीम, गांजा और ब्राउन शुगर भी बेचा जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार, चंद्रपुर शहर में इसका सबसे अधिक कारोबार हो रहा है। अल्प्राजोलम ड्रग्स के एक पैकेट की कीमत 50 से लेकर 200 रुपए तक होती है। पड़ोसी जिलों के अलावा मध्य प्रदेश व तेलंगाना जैसे पड़ोसी राज्यों से भी इसकी सप्लाई होती है। गौरतलब है कि राज्य सरकार ने चंद्रपुर जिले में 1 अप्रैल 2015 को शराबबंदी लागू की थी। 

चिमूर को जिला बनाने की उठ रही मांग
जिले के कुछ लोगों का आरोप है कि शराब का अड्‌डा बनाने के लिए चिमूर को स्वतंत्र जिला घोषित करने की मांग हो रही है। लोगों का यह भी कहना है कि चिमूर को जिला बनाने में कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन वहां भी शराबबंदी लागू होनी चाहिए। 

इसलिए घातक है अल्प्राजोलम 
अन्न व औषधि प्रशासन से जुड़े सूत्रों ने बताया कि अल्प्राजोलैम गोली बीमारी के इलाज के लिए बनाई गई है, लेकिन दुर्भाग्य से इसका उपयोग नशे के लिए हो रहा है। इसके भयंकर दुष्परिणाम सामने आ सकते हैं। इस दवा का सेवन करने से इंसान की किडिनियां और फेफड़े निष्क्रिय हो जाते हैं। हृदयपर भी बुरा असर होता है।  

शराब माफियाओं का बड़ा रोल
अल्प्राजोलम की गोलियों की तस्करी में शराब तस्करों का नेटवर्क बड़ी भूमिका निभा रहा है। सूत्रों के अनुसार चंद्रपुर जिले में तेलंगाना के सीमावर्ती इलाके से शराब के बॉक्स में गोलिया पहुंच रही हैं। बताया जा रहा है कि गुजरात, राजस्थान भी कुत्ता गोली सप्लाई के मुख्य केंद्र हैं। कई बार इसकी तस्करी के लिए रेलवे और निजी यात्री वाहनों का भी उपयोग होता है। गोलियों की खेप गंतव्य पर पहुंचने के बाद थोक खरीदार इन्हें मिक्सर में पीसकर वजन के हिसाब से इसके पैकेट बनाते हैं। इसके बाद पैकेट बिक्री के लिए रिटेलर के पास पहुंचते हैं। बताया जा रहा है की, शहर के भंगाराम, बाबुपेठ के समता चौक, जुनाना चौक, गोलबजार, खंजर मोहल्ला, बंगाली कैम्प, घूघूस फाटा, रामनगर, नेहरूनगर चौक जैसे इलाकों के कुछ ठिकानों पर इसकी बिक्री हो रही है। 

शराबबंदी के बाद बढ़ी नशीले पदार्थों की बिक्री
सरकार का निर्णय उचित है। लेकिन इससे उद्देश्य की पूर्ति होते नहीं दिख रही है। शराबबंदी के बावजूद शराब के साथ ही अन्य नशीले पदार्थों की बिक्री बढ़ गई है। पाबंदी से पूर्व मैं खुद सरकार को प्रतिवर्ष 39 करोड़ रुपए इनकम टैक्स देता था, जो देना अब बंद हो गया है। 
- दीपक जयस्वाल,नगरसेवक, राकांपा चंद्रपुर मनपा 

होगी कड़ी कार्रवाई


चंद्रपुर और नागपुर में कुत्ता गोली को लेकर कार्रवाई हो रही है। अब तक इस मामले में कोई पुख्ता सुराग नहीं मिला है। चंद्रपुर में कर्मियों की कमी है। केवल एक निरिक्षक कार्यरत है। लेकिन इस प्रकरण को गंभीरता से लेकर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। नागरिक भी इस मामले में शिकायत के लिए संपर्क कर सकते हैं। 
- राकेश तिरपुड़े, सहायक आयुक्त, अन्न व औषधि प्रशासन विभाग, नागपुर (चंद्रपुर का अतिरिक्त पदभार)

फैसले पर पुनर्विचार तो इस  जीवन में संभव नहीं

शराब बिक्री को लेकर केवल वे लोग ही हल्ला मचा रहे हैं, जिनकी दुकानें इस निर्णय से बंद हो चुकी हैं। अन्य नशीले पदार्थों की बिक्री देश के हर शहर में हो रही है। वहां तो शराब पर पाबंदी नहीं है। राज्य सरकार ने आम नागरिकों के नुकसान को ध्यान में रखकर निर्णय लिया है। इस पर पुनर्विचार इस जीवन में तो संभव नहीं है। रही बात शराब समेत अन्य नशीले पदार्थों की बिक्री तो संबंधित अधिकारियों को कड़ाई बरतने के निर्देश दिए जाएंगे। 
- सुधीर मुनगंटीवार, पालकमंत्री, चंद्रपुर