दैनिक भास्कर हिंदी: हाईकोर्ट में अनिल देशमुख का दावा- कसाब तक को मिला था लाभ, मेरे मामले में कानूनी प्रक्रिया का हुआ उल्लंघन

July 2nd, 2021

डिजिटल डेस्क, मुंबई। भ्रष्टाचार के मामले में आरोपी राज्य के पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख ने अपने वकील मार्फत बांबे हाईकोर्ट में दावा किया है कि सीबीआई की ओर से उनके खिलाफ की जा रही जांच अवैध है। यह जांच कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन है। उन्होंने दावा किया कि 26/11 आतंकी हमले के मामले में दोषी पाए गए आतंकी अजमल कसाब को भी इन कानूनी प्रावधानों का लाभ मिला था। लेकिन मेरे मामले में कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया है।  

देशमुख की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता अमित देसाई ने कहा कि सीबीआई ने भले ही हाईकोर्ट के आदेश के बाद  मेरे मुवक्किल (देशमुख ) के खिलाफ जांच की शुरुआत की है, लेकिन नियमानुसार देशमुख के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए महाराष्ट्र सरकार से मंजूरी भी नहीं ली है। क्योंकि जब देशमुख के खिलाफ जांच का आदेश दिया गया, उस समय वे मंत्री थे। ऐसे में राज्य सरकार की मंजूरी के बिना देशमुख के खिलाफ सीबीआई की ओर से जारी जांच अवैध है। क्योंकि जांच एजेंसी कानून की जरुरतों को नजरअंदाज कर सकती है। सीबीआई को इस मामले में राज्य सरकार से मंजूरी लेनी चाहिए थी। क्योंकि किसी भी हालत में तय कानूनी प्रक्रिया की अनदेखी नहीं की जा सकती है। हमारे यहां अजमल कसाब जैसे आतंकी को भी कानून के राज का लाभ मिला था। हर कोई कानून के तहत तय की गई प्रक्रिया का लाभ पाने का हकदार है। 

न्यायमूर्ति एसएस शिंदे व न्यायमूर्ति एनजे जमादार की खंडपीठ के सामने देशमुख की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई चल रही है। याचिका में देशमुख ने सीबीआई द्वारा खुद के खिलाफ दर्ज की गई एफआईआर को रद्द करने की मांग की है। शुक्रवार को इस याचिका पर सुनवाई के दौरान देशमुख के वकील देसाई ने अपनी दलीलें दी। हाईकोर्ट ने अप्रैल 2021 में पूर्व मुंबई पुलिस आयुक्त परमवीर सिंह की याचिका पर सुनवाई के बाद सीबीआई को पूर्व मंत्री देशमुख के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच करने का निर्देश दिया था। जांच के बाद सीबीआई ने देशमुख के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। 

सुनवाई के दौरीन देसाई ने कहा कि सीबीआई ने इस मामले की प्रारंभिक जांच हाईकोर्ट के आदेश के तहत की है, लेकिन एफआईआर दर्ज करते समय कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन किया है। भ्रष्टाचार प्रतिबंधक कानून के तहत किसी भी लोकसेवक के खिलाफ मामला दर्ज करने से पहले जांच एजेंसी को सक्षम प्राधिकरण से मंजूरी लेना जरुरी है। जो इस मामले में नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि सीबीआई ने अपने जवाब में खुद कहा है कि देशमुख लोकसेवक के रुप में अपने आधिकारी दायित्व का निर्वाह कर रहे थे । यदि ऐसा है तो लोकसेवक के खिलाफ मामला दर्ज करने से पहले कानूनी प्रक्रिया का पालन क्यों नहीं किया गया। यदि मामले को लेकर सीबीआई के सारे आरोपों पर विश्वास किया जाएगा, तो अराजकता जैसी स्थिति हो जाएगी। खंडपीठ ने अब इस याचिका पर सुनवाई 5 जुलाई 2021 को रखी है।