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कभी सुर्खियां बटोर चुका खैरलांजी हो चुका है शांत, आरोपियों को सजा दिलवाने अंतिम क्षण तक लड़ता रहा भैयालाल

कभी सुर्खियां बटोर चुका खैरलांजी हो चुका है शांत, आरोपियों को सजा दिलवाने अंतिम क्षण तक लड़ता रहा भैयालाल

डिजिटल डेस्क, भंडारा। जिला मुख्यालय से करीब 37 कि.मी. दूरी पर स्थित तुमसर तहसील के ग्राम खैरलांजी में 14 वर्ष पूर्व 29 सितंबर 2006 को  दलित परिवार के चार सदस्यों की निर्मम हत्या कर दी गई थी। पूरे देश को इस घटना ने झकझोर कर रख दिया था। घटना के 14 वर्ष बाद इस परिवार का कोई सदस्य अब न्याय पाने के लिए नहीं बचा है।  परिवार के मुखिया भैयालाल भोतमांगे की सांसें न्याय मिलने तक इंतजार न कर सकीं। 20 जनवरी 2017 में उसने नागपुर के निजी अस्पताल में हृदय विकार से जूझते हुए दम तोड़ दिया। कभी इस हत्याकांड के कारण सुर्खियां बटोर चुका यह गांव अब बिल्कुल शांत हो चुका है।

खैरलांजी के किसान भैयालाल भोतमांगे के परिवार में उसकी पत्नी सुरेखा, बेटी प्रियंका, बेटा रोशन और दिलीप यह पांच सदस्य थे। इस परिवार का जमीन को लेकर गांव के कुछ लोगों के साथ विवाद चल रहा था जिसकी शिकायत भोतमांगे परिवार ने पुलिस थाने में की और इसके बाद कुछ ग्रामीणों ने 29 सितंबर की देर रात अचानक इस परिवार पर हमला कर दिया। हमले के समय भैयालाल घर से बाहर था इसलिए उसकी जान  बच गई। किंतु ग्रामीणों ने भैयालाल की पत्नी, बेटी और  दोनों बेटों की निर्ममता से हत्या कर दी। हत्या से पूर्व उन्हें अमानवीय यातनाएं दी गईं। मामले ने तूल पकड़ा तो तत्कालीन सरकार ने मामला सीबीआई को सौंप दिया। जांच के बाद वर्ष 2006 में 11 लोगों के खिलाफ षडय़ंत्र रचने, महिलाओं के साथ छेड़छाड़ और सबूत मिटाने के आरोप में अपराध दर्ज कर चार्जशीट न्यायालय में पेश की गई। 14 जुलाई 2010 को मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ ने 8 लोगों को 25 वर्ष के सश्रम कारावास  की सजा सुनाई। अदालत के इस निर्णय से असंतुष्ठ  भैयालाल ने न्याय के लिए सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर कर  

आरोपियों को फांसी की सजा देने की मांग की। इससे पूर्व की सर्वोच्च न्यायालय का फैसला आता, काल भैयालाल को लेने आ गया और हृदयाघात के कारण उसकी मौत हो गई। भैयालाल का न्याय के लिए संघर्ष अधूरा ही रह गया। हालांकि  8 में से 3 आरोपियों की भी कारावास में सजा काटते समय मौत हो गई। 

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