छिंदवाड़ा : भंडारकुंड ट्रेन के हाल: 13 बोगी की ट्रेन, दस दिन में सिर्फ 37 यात्रियों ने किया सफर

January 27th, 2022

डिजिटस डेस्क   छिंदवाड़ा  इंदौर से भंडारकुंड तक चलने वाली ट्रेन १६ जनवरी से शुरू हो गई है। इस ट्रेन के समय को लेकर पहले से ही अलग-अलग संगठनों ने विरोध दर्ज कराया है, लेकिन रेलवे अधिकारियों ने इस मामले में गंभीरता नहीं दिखाई है। रेलवे के इस अजीबों गजीब समय सारणी का नतीजा निकला है कि छिंदवाड़ा से भंडारकुंड तक चलने वाली इस ट्रेन के शुरू होने के दस दिन बाद सिर्फ ३८ यात्रियों ने इसमें सफर किया है। आंकड़ों के अनुसार छिंदवाड़ा रेलवे स्टेशन से भंडारकुंड के बीच के लिए यात्रा करने वाले सिर्फ ३८ यात्री यानी औसत तीन से चार यात्रियों ने इसमें सफर किया है। दरअसल रात को पौने चार बजे यह ट्रेन छिंदवाड़ा से रवाना होती। इसके कारण यात्रियों की संख्या कम है। एसी सहित कुल १३ बोगियों की इस ट्रेन में यात्रियों की संख्या से सीधे रेलवे को होने वाली आय प्रभावित हो रही है।
ऐसे रही यात्रियों की संख्या
छिंदवाड़ा से भंडारकुंड रूट के लिए १६ से २५ जनवरी के बीच सिर्फ ३८ टिकट छिंदवाड़ा से कटी है। १६ जनवरी को ०२, १७ जनवरी को ००, १८ जनवरी को ०८, १९ जनवरी को ०२, २० जनवरी को ०६, २१ जनवरी को ०३, २२ जनवरी को ०१, २३ जनवरी को ०३, २४ जनवरी को ०५ और २५ जनवरी को सिर्फ ०८ टिकट बिकी है।
वापसी के ऐसे रहे हाल
उमरानाला स्टेशन से १६ जनवरी को ०२, १७ जनवरी को ०३, २० जनवरी को ०२, २२ जनवरी को ०४ टिकट बिकी है। इसके अलावा भंडारकुंड से २१ जनवरी को २, २३ जनवरी को २ टिकट बिकी है। लिंगा स्टेशन से एक भी टिकट नहीं बिकी है।
ऐसा है समय
इंदौर से चलकर छिंदवाड़ा आने वाली पेंचवेली एक्सप्रेस रात ३.३० पर छिंदवाड़ा  पहुंचकर ३.४५ पर भंडारकुंड के लिए रवाना होती है। यह ट्रेन शिकार पुर ३.५९, लिंगा ४.०४, उमरानाला ४.२२ और भंडारकुंड ४.५० पर पहुंचती है। यही ट्रेन छिंदवाड़ा के लिए रवाना होकर बैतूल तक जाती है।
ऐसी है पेंचवेली एक्सप्रेस
पेंचवेली एक्सप्रेस को लेकर पश्चिम रेलवे की ओर से जारी हुए शेड्यूल के अनुसार इस ट्रेन में एक थर्ड एसी, चार स्लीपर और आठ सामान्य श्रेणी के कोच हैं। ट्रेन क्रमांक १९३४३ इंदौर-भंडारकुंड एक्सप्रेस और छिंदवाड़ा इंदौर एक्सप्रेस टे्रन का नंबर १९३४४ है।
संगठनों ने उठाई मांग
छिंदवाड़ा से ट्रेनों के समय को बदलने के लिए जोनल रेलवे सदस्य, जनप्रतिनिधियों सहित अलग-अलग संगठनों की ओर से मांग उठाई जा चुकी है। इसके बावजूद इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

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