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बड़े दलों ने छोटे मित्र दलों को दिया धोखा, युति-आघाडी का एक जैसा हाल 

बड़े दलों ने छोटे मित्र दलों को दिया धोखा, युति-आघाडी का एक जैसा हाल 

डिजिटल डेस्क, मुंबई। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में सत्ताधारी भाजपा और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस से गठबंधन करने वाले छोटे दल ठगा महसूस कर रहे हैं। पक्ष और विपक्ष के प्रमुख दलों के चक्कर में छोटे दल पिस गए हैं। विधानसभा चुनाव में भाजपा चार सहयोगी दलों के साथ शिवसेना से महायुति करके चुनाव लड़ रही है। महायुति के सीट बंटवारे में भाजपा ने सहयोगी दलों के लिए 14 सीटें छोड़ने की घोषणा की, लेकिन भाजपा ने बड़ी चुतराई से सभी 14 सीटों पर अपनी पार्टी के उम्मीदवार उतार दिए। यानी ये सभी उम्मीदवार भाजपा के चुनाव चिन्ह पर लड़ेंगे। खास बात यह है कि इन 14 सीटों पर महायुति की ओर से जो उम्मीदवार मैदान में हैं उसमें से अधिकांश प्रत्याशी मूल रूप से भाजपा के ही हैं। 

भाजपा ने हमें ठगाः जानकर 

भाजपा के सियासी चाल से नाराज राष्ट्रीय समाज पक्ष (रासप) संस्थापक अध्यक्ष व प्रदेश के पशुपालन मंत्री महादेव जानकर ने अपने सहयोगी दल भाजपा पर धोखा देने का आरोप लगाया है। जानकर की पार्टी रासप के चुनाव चिन्ह पर भाजपा ने किसी को उम्मीदवारी नहीं दी है। केंद्रीय सामाजिक न्याय व अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास आठवले ने अपनी पार्टी आरपीआई को 5 सीटें मिलने का दावा किया है। लेकिन पांचों सीटों पर आरपीआई के कोटे से जो उम्मीदवार खड़े हैं उन सभी को भाजपा ने आरपीआई में भेजा है। मूल रूप से आरपीआई के एक भी नेता को उम्मीदवारी नहीं मिल सकी है। प्रदेश के कृषि राज्य मंत्री सदाभाऊ खोत के रयत क्रांति संगठन को भाजपा ने 3 सीटें दी हैं। खोत की पार्टी का दावा है कि 3 में से 2 सीटों पर पार्टी ने अपने मूल नेताओं को उम्मीदवार दी है। वहीं शिव स्मारक समिति के अध्यक्ष विनायक मेटे की पार्टी शिवसंग्राम को भाजपा ने दो सीटें दी हैं। मेटे ने बताया कि शिवसंग्राम को मुंबई की वर्सोवा और नांदेड़ की किनवट सीट से उम्मीदवारी मिली है। दोनों सीटों पर उम्मीदवार भाजपा के चुनाव चिन्ह पर लड़ेंगे। 

जानकर के बागी तेवर, शिवसेना की सीट पर उतारा उम्मीदवार 

महायुति में भाजपा की सहयोगी रासप ने बगावत कर दी है। रासप ने शिवसेना कोटे की गंगाखेड़ (परभणी) सीट पर अपना उम्मीदवार उतार दिया है। रासप के मुखिया जानकर ने कहा कि भाजपा ने रासप के चुनाव चिन्ह पर एक भी उम्मीदवार को चुनाव नहीं लड़ने दिया ऐसा करके भाजपा ने हम पर अन्याय किया है। इसके बावजूद रासप महायुति में बनी रहेगा क्योंकि अब चुनाव के लिए कुछ ही समय रह गया है। जानकर ने कहा कि भाजपा के शीर्ष नेतृत्व की ओर से रासप के लिए पुणे की दौंड सीट और परभणी की जिंतूर सीट छोड़ी गई थी। लेकिन आखिरी मौके पर भाजपा के प्रदेश नेतृत्व ने दोनों सीटों पर हमारे उम्मीदवारों को पर्चा भरने के लिए अपना बी फार्म दे दिया। दौंड़ सीट से उम्मीदवार राहुल कुल और गंगाखेड सीट से उम्मीदवार मेघना बोर्डीकर साकोरे ने भाजपा का बी फार्म भरा। जिसके बाद रासप ने कुल और मेघना को पार्टी से निकाल दिया है। रासप ने परभणी की गंगाखेड़ सीट पर रत्नाकर गुट्टे को प्रत्याशी बनाया है। लेकिन बंटवारे में गंगाखेड़ की सीट शिवसेना के कोटे में है। गंगाखेड़ सीट पर शिवसेना और रासप के बीच मैत्रीपूर्ण लड़ाई होगी। जानकर ने कहा कि मैंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष चंद्रकांत पाटील से पूछा कि भाजपा ने दोनों सीटों पर रासप के उम्मीदवीरों को बी फार्म कैसे दिया तो दोनों नेताओं ने कहा कि मुझे नहीं मालूम। जानकर ने कहा कि मेरी मुख्यमंत्री और शिवसेना पक्ष प्रमुख उद्धव ठाकरे से अपील है कि वे मुझे एक सीट पर सहयोग करें मैं उन्हें 287 सीटों पर सहयोग देने के लिए तैयार हूं। 

कांग्रेस के मन में कपट, सपा के साथ धोखा किया- आजमी

दूसरी ओर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी का गठबंधन बनते-बनते आखिरकार बिगड़ गया है। समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रदेश अध्यक्ष अबू आसिम आजमी ने दैनिक भास्कर से बातचीत में कहा कि कांग्रेस के मन में कपट है। कांग्रेस ने सपा के साथ धोखा किया है। कांग्रेस ने सपा के उम्मीदवार के लिए भिवंड़ी पूर्व की सीट छोड़ने का वादा किया था। लेकिन अंतिम समय में कांग्रेस ने इस सीट पर अपना उम्मीदवार उतार दिया। इसके बाद हमने कांग्रेस से गठबंधन तोड़ दिया है।

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