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दैनिक भास्कर हिंदी: बायोडाटा वाली पार्टी नहीं है भाजपा,यहां कार्यकर्ताओं का डाटा देखने के लिए कई आंखें हैं

September 18th, 2019

डिजिटल डेस्क, नागपुर। चुनाव तैयारी के तहत बूथ स्तर पर संगठन कार्य में योगदान का आह्वान करते हुए भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने कहा है कि भाजपा बायोडाटा वाली पार्टी नहीं है। टिकट के लिए कार्यकर्ता अपनी केवल दो आंखों से नेता की ओर देखता है। लेकिन कार्यकर्ता के डाटा को देखने के लिए पार्टी में कई आंखें होती है। नड्डा ने यह भी कहा कि राजनीति में कार्य करते समय मेरा क्या होगा का भाव रखना ही पर्याप्त नहीं है। कार्यकर्ताओं को यह भी सोचना होगा कि उन्होंने पार्टी को क्या दिया। चुनात जीतने के लिए संगठनात्मक स्तर पर निचले स्तर पर ध्यान देने की आवश्यकता है। बूथ मजबूत बनाना होगा।

कार्यकर्ताओं की बूथ स्तर पर ऐसी तैयारी हो कि जब भी वे मिले संगठन कार्य के डाटा के साथ मिले। केवल अनुमान के आधार पर जानकारी न दें। बुधवार को सुरेश भट सभागृह में भाजपा का विदर्भ विभागीय विजय संकल्प सम्मेलन हुआ। केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्री नितीन गडकरी की प्रमुख उपस्थिति में श्री नड्डा कार्यकर्ताओं को संबोधित कर रहे हैं। भाजपा की प्रदेश प्रभारी सरोज पांडे, संगठन मंत्री वी.सतीश,पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले, कृषिमंत्री अनिल बोंडे, आदिवासी विकास मंत्री संजय उइके,राज्यमंत्री रणजीत पाटील,पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री हंसराज अहिर, विदर्भ विकास वैधानिक मंडल के अध्यक्ष चैनसुख संचेती, पूर्व सांसद दत्ता मेघे, पूर्व राज्यसभा सदस्य अजय संचेती सहित सांसद, विधायक, विधानपरिषद सदस्य, मनपा , जिप के पदाधिकारी प्रमुखता से उपस्थित थे। श्री नड्डा ने कहा कि संगठन मामले में उनपर नितीन गडकरी का प्रभाव है।

गडकरी ही उन्हें संगठन कार्य के लिए दिल्ली लेकर गए थे। संगठन कार्य व विचारधारा का महत्व समझाते हुए उन्होंने कहा कि कम्युनिस्ट को छोड़ भाजपा ही देश में विचारधारा की राजनीति से जुड़ी है। शेष दल भटके हुए हैं। उनमें भाई भतीजावाद है। भाजपा की सदस्य संख्या 54 दिनों में 17 करोड़ तक पहुंच गई है। दुनिया के 193 देशों में 7 देशों की जनसंख्या को छोड़ अन्य देशों में जितनी जनसंख्या नहीं है उतनी भाजपा की सदस्य संख्या है। जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटाने, ट्रिपल तलाक को रद्द करने के अलावा अन्य विषयों का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस केवल लाेगों को गुमराह करती रही है। धारा 370 अस्थायी थी। कांग्रेस ने उसे स्थायी करने की हिम्मत क्यों नहीं जुटायी। धारा 370 के कारण जम्मू कश्मीर में दलित, आदिवासी व महिलाओं को संवैधानिक अधिकार से वंचित रहना पड़ा है। बाबासाहब आंबेडकर ने इस धारा का विरोध किया था। देश में विचारनिष्ठ होने के बाद भी कई लोगों को राजनीति में असफल रहना पड़ा है। विचारनिष्ठ होने के साथ ही सही विचारधारा को चुनना जरुरी है।