दैनिक भास्कर हिंदी: कंगना और अर्णब के खिलाफ हुई कार्रवाई पर फडणवीस ने उठाए सवाल, बोले - सत्ता सिर नहीं चढ़नी चाहिए

December 15th, 2020

डिजिटल डेस्क, मुंबई। अभिनेत्री कंगना रनौत और पत्रकार अर्णब गोस्वामी के खिलाफ हुई कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए विधानसभा में विरोधी पक्ष नेता देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि सत्ता सिर पर नहीं चढ़नी चाहिए। उन्होंने कहा कि दोनों के खिलाफ सिर्फ इसलिए पुलिस और प्रशासन का बेजा इस्तेमाल किया गया क्योंकि उन्होंने मुख्यमंत्री और सरकार के खिलाफ बोला। विधानसभा में पूरकमांगों पर चर्चा के दौरान फडणवीस ने कहा कि मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और आदित्य ठाकरे के खिलाफ कंगना और अर्णब ने जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया वे उससे सहमत नहीं हैं राज्य के मुखिया का नाम आदर से लिया जाना चाहिए। लेकिन दोनों ने जो गलती की उसके लिए 50 ऐसे कानून है जिसके तहत उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती थी। लेकिन  सरकार ने बदला लेने की भावना से कंगना का घर तोड़ा और बंद हो चुके अन्वय नाईक की आत्महत्या के मामले को फिर से खोलकर कार्रवाई की। अर्णब मामले में सर्वोच्च न्यायालय जबकि कंगना मामले में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की कार्रवाई को गलत बताया है। फडणवीस ने कहा कि सरकार के खिलाफ बोलने वालों के खिलाफ पुलिस का इस्तेमाल किया जा रहा है। मौजूदा सरकार ने सोशल मीडिया पर अपने खिलाफ बोलने वाले हर शख्स को जेल भेज रही है। लेकिन यह कार्रवाई एकतरफा है। मेरे  और मुनगंटीवार के खिलाफ आपत्तिजनक पोस्ट करने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। फडणवीस ने कहा कि अर्णब ने मेरे खिलाफ भी तीन बार मीडिया ट्रायल चलाया था। अमेरिका में इन्वेस्टर्स मीट के दौरान उनके कैमरे मेरा पीछा कर रहे थे लेकिन मैंने उन्हें जेल में नहीं डाला। वापस आकर सवालों के जवाब दिए। कंगना ने अपमानजनक ट्वीट किया था तो मानहानि के मामले में कार्रवाई की जा सकती है लेकिन जबरन घर नहीं तोड़ा जा सकता। हर चीज के लिए देश में कानून है यह पाकिस्तान नहीं है।  

नियमों के तहत कार्रवाई-परब

परिवहन मंत्री अनिल परब ने कंगना और अर्णब के खिलाफ हुई कार्रवाई का बचाव किया। उन्होंने कहा कि कार्रवाई नियमों के तहत ही हुई है। अर्णब मामले में सुप्रीमकोर्ट के फैसले के खिलाफ हम अपील करेंगे। उन्होंने कहा कि सुप्रीमकोर्ट ने अर्णब की एफआईआर रद्द करने की मांग खारिज कर दी है। इसलिए कार्रवाई गलत नहीं है।   

विशेषाधिकार समिति को और समय

शिवसेना विधायक प्रताप सरनाईक द्वारा अभिनेत्री कंगना रनौत और अर्णब गोस्वामी के खिलाफ दाखिल विशेषाधिकार हनन के प्रस्ताव पर सुनवाई कर रही समिति की अवधि अगले अधिवेशन के अंतिम दिन तक बढ़ा दी गई है। समिति के अध्यक्ष  दीपक केसरकर ने रिपोर्ट सौंपने के लिए समयावधि बढ़ाने की मांग की। लेकिन वरिष्ठ भाजपा नेता सुधीर मुनगंटीवार ने सवाल उठाया कि क्या विशेषाधिकार का दायरा बढ़ाया जा रहा है। सदन के बाहर किसी व्यक्ति के खिलाफ अगर कोई अपमानजनक बयान देता है तो उसके खिलाफ मानहानि का मामला दर्ज किया जा सकता है। ऐसे मामले के लिए विशेषाधिकार का इस्तेमाल क्यों किया जा रहा है। अगर ऐसा किया गया तो हजारों इस तरह के मामले आने लगेंगे। भाजपा विधायक अतुल भातखलकर ने भी दोनों के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का इस्तेमाल करने को गलत बताया। लेकिन संसदीय कार्यमंत्री अनिल परब ने यह कहते हुए फैसले का बचाव किया कि सदस्यों को विशेष अधिकार दिए गए हैं अगर इसका इस्तेमाल नहीं किया गया तो क्या फायदा। अन्न व नागरिक आपूर्ति मंत्री छगन भुजबल ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव को मंजूरी दे चुके हैं अब सिर्फ उसकी समयावधि बढ़ाने का प्रस्ताव है। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष नाना पटोले ने कहा कि मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे राज्य के प्रमुख हैं यह किसी व्यक्ति का मामला नहीं है। उनका अपमान पद का अपमान है और पद का अपमान राज्य और विधानसभा का भी अपमान है। इसके बाद उन्होंने समिति को मोहलत दिए जाने का प्रस्ताव सदन के सामने पेश किया जिसे ध्वनिमत से मंजूर कर लिया गया। सरनाईक ने 7 सितंबर को कंगना और अर्णब के खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव पेश किया था। 
 

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