comScore

खींच-तान : शिवसेना को मुख्यमंत्री पद नहीं देगी बीजेपी, विपक्ष की शह पर भी शाह की नजर

October 28th, 2019 19:27 IST
खींच-तान : शिवसेना को मुख्यमंत्री पद नहीं देगी बीजेपी, विपक्ष की शह पर भी शाह की नजर

डिजिटल डेस्क, मुंबई। महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री पद को लेकर भाजपा और शिवसेना के बीच जारी खींचतान जल्द खत्म होती नहीं दिख रही है। मुख्यमंत्री पद पर नजरें जमाई शिवसेना जहां सत्ता में 50 प्रतिशत भागीदारी लेने को आतुर है तो वहीं भाजपा उसकी यह शर्त्त मानने को तैयार नहीं है। जानकारी के मुताबिक भाजपा नेतृत्व ने तय किया है कि महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री पद भाजपा के पास ही रहेगा। हरियाणा में मनोहर लाल के नेतृत्व में सरकार बनाने के बाद अब भाजपा की प्राथमिकता महाराष्ट्र है। इस क्रम में प्रदेश की सियासी गुत्थी सुलझाने के मकसद से भाजपा अध्यक्ष अमित शाह 30 अक्टूबर को मुंबई में शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे से मुलाकात कर सकते हैं। हालांकि इस मुलाकात को लेकर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। सूत्र बताते हैं कि भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष जे पी नड्‌डा के मंगलवार को हिमाचल प्रदेश से दिल्ली लौटने के बाद ही यह तय होगा कि अमित शाह मुंबई जाएंगे या नहीं। शायद मुंबई के सियासी तापमान के हिसाब से शाह का कार्यक्रम तय होगा। यह भी संभव है कि अमित शाह के मुंबई नहीं जाने की सूरत में जे पी नड्‌डा को वहां भेज दिया जाए।  

उपमुख्यमंत्री पद व 40 फीसदी हिस्सेदारी देने की है योजना

भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री पद पर शिवसेना की ‘दावेदारी’ को महज दबाव की रणनीति बताते हुए कहा कि मुख्यमंत्री पद शिवसेना के खाते में नहीं जा रहा है। उन्होने यहां तक कहा कि सत्ता में शिवसेना को 50 प्रतिशत हिस्सेदारी देने को लेकर भी अभी कोई फैसला नहीं हुआ है। सूत्र बताते हैं कि शिवसेना की जिद को देखते हुए भाजपा ने उसे उपमुख्यमंत्री पद और मंत्रिमंडल में 40 प्रतिशत हिस्सेदारी देने की योजना बनाई है। यदि शिवसेना ने उपमुख्यमंत्री पद पर जोर नहीं दिया तो उसे सरकार में 40 के बजाए 50 प्रतिशत हिस्सेदारी देने में भाजपा को कोई दिक्कत नहीं है।    

विपक्ष की शह पर है शाह की पैनी नजर

हालांकि अमित शाह राकांपा और कांग्रेस की ओर से शिवसेना को मिल रही ‘शह’ पर भी नजरें जमाए हुए है। पार्टी का मानना है कि विपक्ष की चाल में आकर शिवसेना मामले को कुछ दिन और लटका सकती है। ऐसे में सरकार गठन में देरी होने के आसार हैं। बता दें कि महाराष्ट्र चुनाव में भाजपा को सबसे ज्यादा 105 सीटें मिली है तो शिवसेना के खाते में 56 सीटें आई है। राकांपा और कांग्रेस को क्रमश: 54 व 44 सीटें मिली हैं।
 

कमेंट करें
yw0I7
NEXT STORY

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।