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राजा पहाड़ी की झिरिया में उतराते मिले लापता जुड़वा भाइयों के शव, क्षेत्र में सनसनी

राजा पहाड़ी की झिरिया में उतराते मिले लापता जुड़वा भाइयों के शव, क्षेत्र में सनसनी


डिजिटल डेस्क छिंदवाड़ा। तीन दिनों से अपनी बड़ी मां के यहां से गायब हुए जुड़वां बच्चों के शव सोमवार की शाम सोनपुर के करीब स्थित राजापहाड़ के करीब एक खेत के कुएं में उतराते मिले हैं। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस दल ने मौके पर पहुंच कर मामले की जांच शुरू की है। प्राथमिक जांच में पुलिस बच्चों की मौत सामान्यत: कुएं के पानी में डूबने के कारण होना बता रही है। रामबाग कैलाश नगर निवासी सतीश सूर्यवंशी के 13 साल के जुड़वां बेटे अमित और सुमित 12 जून से गायब थे। रविवार को उनकी गुमशुदगी की शिकायत कुंडीपुरा थाने में दर्ज की गई। सोमवार की शाम पुलिस को सूचना मिली कि सोनपुर के राजापहाड़ के पास ही एक खेत के कुएं में दो बच्चों के शव पड़े हुए हैं। सूचना पर सीएसपी अशोक तिवारी ने कुंडीपुरा पुलिस के साथ मौके पर पहुंच कर बच्चों की शिनाख्त कराई है। दोनों शव अमित व सुमित के होने की पुष्टि परिजनों ने की है। पुलिस ने शव बरामद कर जांच शुरू कर दी है। दोनों शवों का पोस्टमार्टम मंगलवार को कराए जाएंगे।
12 जून से थे गायब, पहाड़ के ऊपर किसी ने नही की तलाश-
रामबाग कैलाश नगर निवासी दोनों जुड़वां भाई 11 जून को अपनी बड़ी मां के साथ उनके गांव सारसवाड़ा गए थे। 12 जून की दोपहर तक बच्चे सारसवाड़ा में घर में ही खेल रहे थे। उसके बाद से बच्चे गायब थे। बच्चे शाम तक नही मिले तो परिजनों ने उनकी तलाश की और रविवार को गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई। लेकिन बच्चों की तलाश किसी ने भी पहाड़ी के ऊपर नही की जबकि घटना स्थल बच्चों के घर से महज एक किमी की दूरी पर है। सोमवार को खेत जाने वालों ने शव देखकर पुलिस को सूचना दी है।
चोट के कोई निशान नही, कपड़े कुएं के बाहर मिले-
सीएसपी अशोक तिवारी के अनुसार बच्चों के शव पर चोट के कोई निशान नही हैं और उनकी मौत पानी में डूबने के कारण होने का खुलासा हो रहा है। दोनों बच्चों के कपड़े कुएं के बाहर ही पड़े मिले हैं। आशंका जताई जा रही है कि बच्चों ने नहाने के लिए कपड़े बाहर उतारे और बिना कपड़ों के कुएं में कूदे हैं। दोनों शव बिना कपड़ों के बरामद किए गए हैं।
तीन बहनों के बाद हुए थे दो जुड़वा बच्चे, परिवार में छाया मातम
रामबाग कैलाश नगर निवासी सतीश सूर्यवंशी होटल में बावर्ची का काम करता है। उसके दोनों बच्चे जुड़वा थे और सबसे छोटे थे। दोनों जुड़वा बच्चे तीन बहनों के बाद जन्मे थे और पूरे परिवार के लाड़ले थे। बच्चों के लापता होने के बाद से परिवार परेशान था। अब उनकी मौत की खबर सुनने के बाद पूरे परिवार में मातम छा गया है और परिजनों की स्थिति खराब हो रही है।
इनका कहना है-
लापता बच्चों के शव एक पहाड़ी पर स्थित खेत के कुएं में मिले हैं। प्राथमिक जांच में बच्चों की मौत पानी में डूबने से होने का अनुमान है पोस्टमार्टम के बाद सही जानकारी मिल सकेगी।
-अशोक तिवारी, सीएसपी छिंदवाड़ा।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।