दैनिक भास्कर हिंदी: छात्र की मौत मामले में हाईकोर्ट ने और बढ़ाया मुआवजा-ट्रिब्यूनल के फैसले के खिलाफ दायर थी याचिका, सिडको को राहत

May 20th, 2020

डिजिटल डेस्क, मुंबई। बॉम्बे हाईकोर्ट ने बस में चढ़ने से पहले उसे आगे बढ़ाने के कारण हुई दुर्घटना में जान गवाने वाले 15 साल के बच्चे के माता-पिता को दिया 22 लाख रुपये मुआवजे का आदेश कायम रखा है। इसके साथ ही उसमें चार लाख रुपए की बढ़ोतरी भी की है। मामले से जुड़े तथ्यों पर गौर करने के बाद न्यायमूर्ति आर डी धानुका ने पाया कि कक्षा दसवीं में पढ़ने वाला ध्रुव ठक्कर नामक छात्र स्कूल जाने के लिए बस पकड़ने के लिए बस स्टॉप पर खड़ा था। लेकिन जैसे ही ठाणे म्युनिसिपल ट्रांसपोर्ट (टीएमटी) की बस पहुंची कंडक्टर के घंटी बजाने से ड्राइवर ने बस आगे बढ़ा दी। इससे बस में चढ़ने की कोशिश कर रहा ध्रुव नीचे गिरकर गंभीर रुप से घायल हो गया। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। 

इसके बाद ध्रुव के माता पिता ने मुआवजे की मांग को लेकर ठाणे के मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल में दावा दायर किया। ट्रिब्यूनल ने जुलाई 2018 में सारे पहलूओं पर गौर करने के बाद टीएमटी को ध्रुव के माता पिता को कुल 22 लाख रुपये आठ प्रतिशत ब्याज के साथ मुआवजे के रुप में देने का निर्देश दिया। जिसमें ध्रुव का इलाज करनेवाले अस्पताल का बिल भी शामिल था। ट्रिब्यूनल के आदेश के खिलाफ टीएमटी के प्रबंधक ने हाईकोर्ट में अपील की। 

न्यायमूर्ति के सामने टीएमटी के वकील एन. बूबना ने कहा कि सड़क दुर्घटना ध्रुव की लापरवाही के चलते हुई है। वह बस रुकने से पहले ही बस में चढ़ गया था। लेकिन बाद में वह नीचे गिर गया। इसलिए उसके परिजन बिल्कुल भी मुआवजे के हकदार नहीं हैं। जबकि ध्रुव के अभिभावकों के वकील निखिल मेहता ने कहा कि ड्राइवर ने ध्रुव के चढ़ने से पहले ही बस चला दी थी। क्योंकि कंडक्टर ने घंटी बजाई थी। इस दौरान ड्राइवर ने ध्रुव की ओर देखा भी नहीं। इसलिए ड्राइवर की लापरवाही के चलते बस से हादसा हुआ है। 

इस मामले से जुड़े सभी पक्षों को सुनने और प्रकरण से जुड़े दस्तावेजी सबूतों पर गौर करने के बाद न्यायमूर्ति ने कहा कि ध्रुव के अभिभावकों ने मामले में ड्राइवर की लापरवाही को साबित किया है। इस मामले में ट्रिब्यूनल ने सही निष्कर्ष निकाला है। ध्रुव की उम्र महज 15 साल थी। इसे देखते हुए व अन्य पहलुओं पर विचार करते हुए न्यायमूर्ति ने मुआवजे की रकम को 26 लाख कर दिया और इसे आठ प्रतिशत ब्याज के साथ भुगतान करने का निर्देश दिया। 

अब सिडको नहीं करना पड़ेगा 300 करोड़ का भुगतान

इसके अलावा बॉम्बे हाईकोर्ट ने राज्य सरकार व उसके निगम कोंकण सिंचाई महामंडल (केआईडीसी) व सिटी एंड इंडस्ट्रियल डेवलपमेन्ट कॉर्पोरेशन को राहत दी है। इसके तहत अब सिडको व केआईडीसी को एफए एंटरप्राइजेस को 303 करोड़ रुपए का भुगतान नहीं करना पड़ेगा। इससे पहले आर्बिट्रेशन ट्रिब्यूनल ने  पिछले साल सिडको व केआईडीसी को एफए एंटरप्राइजेस को 303 करोड़ रुपए भुगतान करने का आदेश जारी किया था। एफए एंटरप्राइजेस को यह राशि बालगंगा बांध प्रोजेक्ट के निर्माण  से जुड़े कार्य के बाकी बिल के भुगतान के रुप में देनी थी। वर्ष 2009 में इस प्रोजेक्ट का काम शुरु हुआ था। लेकिन लागत में बढ़ोतरी के चलते पीने के पानी की आपूर्ति के लिए रायगढ़ जिले का यह प्रोजेक्ट विवादों में घिर गया था। एफए एंटरप्राइजेस की भी संदिग्ध भूमिका सामने आयी थी। विवाद के बाद अनुबंध की शर्तों के तहत मामला अरिबिट्रेशन ट्रिब्यूनल के पास भेजा गया था। ट्रिब्यूनल ने एफए एंटरप्राइजेस के पक्ष में फैसला सुनाया। जिसे राज्य सरकार, सिडको व केआईडीसी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर चुनौती दी थी।न्यायमूर्ति आर डी धानुका के सामने याचिका पर सुनवाई हुई। मामले से जुड़े दोनों पक्षों को सुनने के बाद न्यायमूर्ति ने ट्रिब्यूनल के आदेश को अवैध पाया। और कहा कि सिर्फ एक अधिकारी ने रकम के भुगतान के बारे में आदेश दिया था। इस अधिकारी की मामले में संदिग्ध भूमिका है। यह कहते हुए न्यामूर्ति ने आर्बिट्रेशन ट्रिब्यूनल के आदेश को खारिज कर दिया। 
 

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