दैनिक भास्कर हिंदी: अदालत से नदारद रहने पर याचिकाकर्ता पर लगा जुर्माना, सरकारी अधिकारी थे मौजूद

September 26th, 2019

डिजिटल डेस्क, मुंबई। बांबे हाईकोर्ट ने अदालत और सरकारी अधिकारियों को समय नष्ट करने  के लिए एक शैक्षणिक संस्था पर जुर्माना लगाया है। कोर्ट ने संस्था को चार अधिकारियों को ढाई-ढाई हजार रुपए देने का निर्देश दिया है।  मामला वारना मोरना शिक्षण संस्था से जुड़ा है। संस्था के खिलाफ राज्य सरकार ने कार्रवाई की है लेकिन उससे जुड़े दस्तावेज उसे नहीं दिखाए जा रहे थे। लिहाजा हाईकोर्ट ने मंत्रालय के सामाजिक न्याय विभाग व वीजेएनटी विभाग के अधिकारियों को जरुरी दस्तावेज के साथ अदालत में बुलाया था। 

अदालत के निर्देश के तहत 29 अगस्त 2019 को समाज कल्याण विभाग के दो अधिकारी कोर्ट में मौजूद थे। जबकि 19 सितंबर को आदिवासी कल्याण व समाजिक न्याय विभाग के दो अधिकारी अदालत आए थे। इस दौरान अदालत में याचिकाकर्ता का कोई भी प्रतिनिधि मौजूद नहीं था। जो सरकारी अधिकारियों द्वारा लाए गए दस्तावेजों को देख सके। इस बात को जानने को बाद न्यायमूर्ति एससी धर्माधिकारी व न्यायमूर्ति गौतम पटेल की खंडपीठ ने नाराजगी जाहिर की। खंडपीठ ने कहा कि वैसे इन अधिकारियों को अपने कार्यालय में मौजूद रहना चाहिए था। लेकिन अदालत के निर्देश के तहत सारे अधिकारी मामले की सुनवाई के दौरान मौजूद थे। ताकि याचिकाकर्ता का प्रतिनिधि मामले से जुड़े दस्तावेज देख सके। लेकिन उनका कोई प्रतिनिधि कोर्ट में आया ही नहीं। ऐसे में सरकारी अधिकारियों के हित का संरक्षण जरुरी है।

यह कहते हुए खंडपीठ ने याचिकाकर्ता को अदालत में दो तारीखों पर अदालत में मौजूद हर अधिकारी को ढाई हजार रुपए देने का निर्देश दिया है। 4 अधिकारियों को दी गई इस रकम का प्रमाण कोर्ट में पेश करने के लिए कहा गया है। यदि याचिकाकर्ता हर अधिकारी को ढाई हजार नहीं देता है तो इस याचिका को खारिज माना जाए। 

 

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