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लापरवाह सीएमएचओ व सिविल सर्जन पर गिरी कार्रवाई की गाज, दोनों को हटाया, मामला बच्चों की मौत का 

लापरवाह सीएमएचओ व सिविल सर्जन पर गिरी कार्रवाई की गाज, दोनों को हटाया, मामला बच्चों की मौत का 


डिजिटल डेस्क शहडोल।   जिला चिकित्सालय में बच्चों की मौत के मामले में बड़ी कार्रवाई हुई है। शहडोल पहुुंचे स्वास्थ्य मंत्री तुलसीराम सिवालट ने सीएमएचओ डॉ. राजेश पाण्डेय तथा सिविल सर्जन डॉ. उमेश नामदेव को पद से हटाने के निर्देश जारी कर दिए हैं।  जिला चिकित्सालय शहडोल में 12 घंटे के भीतर 6 बच्चों की मौत से सरकार सकते में है। मामले को तूल पकड़ता देख आनन-फानन में हालात का जायजा लेने के लिए बुधवार को स्वास्थ्य मंत्री तुलसीराम सिलावट जिला चिकित्सालय पहुंचे। करीब डेढ़ घंटे तक यहां रुके स्वास्थ्य मंत्री ने जहां हॉस्पिटल के विभिन्न वार्डों का निरीक्षण किया, वहीं मरीजों व हॉस्पिटल स्टॉफ से चर्चा भी की। स्वास्थ्य मंत्री ने अस्पताल प्रबंधन सहित जिला प्रशासन को तीन दिन के भीतर अस्पताल में व्याप्त तमाम अव्यस्थाओं को दूर करने की हिदायत दी।
एसएनसीयू में करीब 15 मिनट तक रुके स्वास्थ्य मंत्री ने वहां मौजूद चिकित्सा सुविधाओं का जायजा लिया और आवश्यक दिशा निर्देश दिए। इस दौरान उन्होंने कहा कि यहां उपलब्ध संसाधनों का भरपूर उपयोग कर बच्चों को बेहतर चिकित्सा उपलब्ध कराएं। एसएनसीयू का निरीक्षण करने के बाद मंत्री अस्पताल के प्रायवेट वार्ड और आई वार्ड का निरीक्षण करने पहुंचे। इसके बाद ट्रामा यूनिट का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने देखा कि टायलेटों में गंदगी है। बिजली और पानी की सुविधा भी नहीं है।
मंत्री के सामने भिड़े भाजपा-कांग्रेसी
जिला चिकित्सालय के बाहर उस समय अजीब सी स्थिति बन गई जब स्वास्थ्य मंत्री और जिले के प्रभारी मंत्री के साथ ही भाजपा और कांग्रेस कार्यकर्ता भिड़ गए। मंत्री को बीच-बचाव करना पड़ा। दरअसल, हॉस्पिटल का निरीक्षण करके जब स्वास्थ्य मंत्री और प्रभारी मंत्री बाहर निकल रहे थे, तभी हॉस्पिटल के बाहर जयसिंहनगर विधायक जयसिंह मरावी के साथ भाजपा कार्यकर्ताओं ने उन्हें रोक लिया। भाजपा नेताओं ने छह बच्चों की मौत के मामले में उनको ज्ञापन दिया। इसके बाद भाजपा नेताओं ने उनसे कार्रवाई के बारे में बात की तो कोतमा विधायक उखड़ गए। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री स्वयं यहां आए हैं। यह बड़ी बात है। भाजपाइयों ने कहा कि उनका आना बड़ी बात नहीं है, क्या कार्रवाई की यह बड़ी बात है। इस बीच दोनों के बीच बहस होने लगी। बाद में स्वास्थ्य मंत्री को बीच-बचाव करना पड़ा। 
गुप्ता समाज के लोगों ने की कार्रवाई की मांग-
जिला चिकित्सालय में ही इलाज के दौरान हुई प्रसूता सुधा गुप्ता की मौत के मामले में कार्रवाई के लिए ज्ञापन दिया। इस दौरान सुधा गुप्ता के पति ने कहा कि अगर कार्रवाई नहीं हुई तो मैं आत्महत्या कर लूंगा। उन्होंने  आरोप लगाया गया कि हॉस्पिटल में पत्नी का सीजर ऑपरेशन करने के लिए 25 हजार रुपए की रिश्वत की मांग की गई थी। पैसा नहीं दिया तो उनकी पत्नी का ऑपरेशन नहीं किया, जिससे उसकी मौत हो गई।
पार्षद ने सौंपा ज्ञापन, डॉक्टरों को बहाल करें-
इधर कांग्रेस नेता और पार्षद सुफियान खान व अन्य से स्वास्थ्य मंत्री को ज्ञापन सौंप कर पिछले दिनों निलंबित किए गए डॉ. डीके सिंह और डॉ. रीना गौतम को तत्काल बहाल करने की मांग की है। ज्ञापन में कहा गया है कि सिविल सर्जन ने अपनी कमियां छिपाने के लिए दोनों डॉक्टरों के ऊपर पूरा ठीकरा फोड़ दिया है। साथ ही छह बच्चों की मौत के मामले में उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग भी गई है।
नर्सिंग स्टाफ को लेकर की बातचीत-
प्रसूती वार्ड के निरीक्षण के दौरान वार्ड में काम करने वाले नर्सों से हॉस्पिटल में नर्सिंग स्टाफ की कमी को लेकर स्वास्थ्य मंत्री से बात की। उन्होंने बताया कि वर्तमान में जिला चिकित्सालय में नर्सों के 165 पद स्वीकृत हैं, जबकि
106 नर्स ही कार्यरत हैं। इनमें भी करीब 20 छुट्टी पर हैं। जिससे 86 नर्सों के भरोसे ही हॉस्पिटल चल रहा है। स्वास्थ्य मंत्री जल्द से जल्द समस्या के निदान का भरोसा दिलाया।
कांग्रेस नेताओं का लगा रहा जमावड़ा-
स्वास्थ्य मंत्री के निरीक्षण के दौरान हॉस्पिटल परिसर में कांग्रेस नेताओं का जमावड़ा लगा रहा। शहडोल सहित धनपुरी और बुढ़ार तक के वरिष्ठ कांग्रेस नेता हॉस्पिटल पहुंचे हुए थे। इसके अलावा काफी संख्या में कार्यकर्ता भी थी। हॉस्पिटल के भीतर भी मंत्री के साथ-साथ काफी संख्या में कांग्रेस नेता चल रहे थे। ऐसा लग रहा था जैसे कांग्रेस नेता अपने हिसाब से ही मंत्री को हॉस्पिटल का निरीक्षण करा रहे हैं।

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