दैनिक भास्कर हिंदी: हड़ताल पर सफाईकर्मी : नागपुर स्टेशन पर पसरी गंदगी, मिनिमम वेज नहीं दे रहा ठेकेदार

April 7th, 2019

डिजिटल डेस्क, नागपुर। नागपुर रेलवे स्टेशन पर शुक्रवार को नियमानुसार वेतन की मांग को लेकर सफाईकर्मियों ने काम बंद कर दिया। सुबह से  परिसर में सफाई के अभाव से स्टेशन पर गंदगी का आलम बना रहा। आने वाली कुछ गाड़ियों की भी सफाई नहीं होने से कोच में यात्रियों को बदबूदार माहौल में सफर करने की नौबत आई। सफाईकर्मियों का आरोप है कि, संबंधित ठेकेदार की ओर से उन्हें नियमानुसार वेतन नहीं दिया जा रहा है। रेलवे स्टेशन पर रोजाना बड़ी संख्या में यात्रियों का आवागमन होता है। स्टेशन पर दिन में तीन बार सफाई करना जरूरी होती है। नागपुर मंडल की गाड़ियों में भी सफाई जरूरी रहती है। रेलवे ने निजी तौर पर परिसर की सफाई व ट्रेनों की सफाई का जिम्मा दिया है। प्लेटफार्म नंबर-1 से 8 तक की सफाई के लिए 80 सफाईकर्मी निजी तौर पर एक ठंकेदार के माध्यम से काम करते हैं। दिन में तीन शिफ्ट में लगातार काम करते हुए स्टेशन परिसर में चकाचक रखते हैं। साथ ही यह कर्मचारी ट्रेनों में नागपुर मंडल की गरीबरथ एक्सप्रेस, सेवाग्राम एक्सप्रेस, आमला पैसेंजर, इटारसी, नंदीग्राम, प्रेरणा एक्सप्रेस, इंटरसिटी एक्सप्रेस आदि ट्रेनों के कोच की नियमित सफाई करते हैं। 

ठेकेदार नहीं देता मिनिमम वेजेज

नियमानुसार इन्हें 568 रु. प्रतिदिन वेतन मिलना जरूरी है, लेकिन कुछ ठेकेदार इससे कम वेतन देते हैं। आरोप है कि, ठेकेदार की ओर से मिनिमम वेजेस नहीं दिया जा रहा है। साथ ही पीएफ भी नहीं काटा जाता है। गत दो माह से ही बैंक से वेतन किया जा रहा है। अब तक हाथों से पैसे दिए जाते थे। ऐसे में इटारसी एंड की ओर सफाईकर्मियों ने सुबह से धरना देकर ठेकेदार की लापरवाही के खिलाफ का आरोप लगाया। हालांकि इससे यात्रियों को परेशान होना पड़ा। परिसर में फैली गंदगी से स्टेशन पर बदबूदार माहौल बना रहा। 

कई बार हुई यही स्थिति 

हालांकि मध्य रेलवे नागपुर मंडल की ओर से प्रतिवर्ष सफाई को लेकर करोड़ों का टेंडर निकाला जाता है, लेकिन सफाई नियमित तौर पर नहीं होती है। गत एक वर्ष में सफाईकर्मियों में व ठेकेदारों में आए दिन वेतन को लेकर अनबन होने से सफाई काम बंद रहता है, जिससे यात्रियों को परेशान होना पड़ता है। 

उधर... मनपा सिर्फ आंकड़े जुटा कर ताल ठोंक रही है, जबकि करोड़ों का फंड

शहर में स्वाइन फ्लू का संक्रमण जारी है। नागरिकों के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी मनपा की है। मनपा के पास स्वास्थ्य के लिए करोड़ों रुपए फंड भी रहता है। इसके बावजूद स्वाइन फ्लू के प्रति मनपा प्रशासन गंभीर नहीं है। केवल मरीजों के आंकड़े जुटाने तक सीमित भूमिका निभाकर जिम्मेदारी से बचे जा रही है। हालांकि तापमान बढ़ने से स्वाइन फ्लू के संक्रमण से फिलहाल थोड़ी राहत जरूर मिली है, लेकिन पूरी तरह थमा नहीं है। जनवरी से अभी तक प्रभावित मरीजों की संख्या 209 हो गई है, जबकि 14 लोगों की मृत्यु हो गई। जनवरी से शुरू हुए स्वाइन फ्लू के संक्रमण की तीव्रता मार्च महीने में सर्वाधिक रही। जनवरी और फरवरी महीने में 112 पॉजिटिव मरीज मिले थे। मार्च महीने में तेजी से संक्रमण बढ़कर पॉजिटिव मरीजों की संख्या 180 के पार चली गई। तापमान में वृद्धि होने के बाद संक्रमण की रफ्तार कम हो गई है। फिलहाल प्रतिदिन एक-दो पॉजिटिव मरीज मिलने की स्वास्थ्य विभाग के सूत्राें ने जानकारी दी। अभी तक 209 पॉजिटिव मरीज मिलने की मनपा के स्वास्थ्य िवभाग ने भी पुष्टि की है। मार्च के अंत तक मृतकों की संख्या 14 हो गई थी। इस महीने में किसी की मौत की जानकारी नहीं है।  स्वाइन फ्लू के लिए 42 केंद्र स्थापित किए गए हैं। इन केंद्रों में मरीजाें की प्राथमिक जांच करने पर संदिग्ध मरीजों को उपचार के लिए शासकीय मेडिकल अस्पताल तथा मेयो अस्पताल में भेजा जा रहा है। हालांकि स्वाइन फ्लू की पुष्टि होने वाले लगभग मरीजों ने निजी अस्पतालों में जांच कराई है।