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मुख्यमंत्री ने कहा - खेतिहर मजदूरों को मिलेगा 2 रुपए किलो चावल

मुख्यमंत्री ने कहा - खेतिहर मजदूरों को मिलेगा 2 रुपए किलो चावल

डिजिटल डेस्क, मुंबई। प्रदेश में बेमौसम बारिश के कारण नुकसान प्रभावित इलाकों के किसानों और खेतिहर मजदूरों को आवश्यकता पड़ने पर 2 रुपए प्रति किलो गेहूं और 3 रुपए प्रति किलो की दर से चावल दिया जाएगा। बैंकों के माध्यम से किसानों के बकाया कर्ज की सख्ती से वसूली नहीं की जाएगी। इसके लिए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने संबंधित अफसरों को निर्देश दिए हैं।  प्रदेश के वित्त मंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने यह जानकारी दी। बुधवार को मुख्यमंत्री ने राज्य अतिथिगृह सह्याद्री में बेमौसम बारिश के कारण हुए नुकसान को लेकर पालक मंत्रियों के साथ बैठक की। बैठक के बाद मुनगंटीवार ने बताया कि राज्य सरकार केंद्र सरकार की तरफ से मिलने वाली निधि का इंतजार किए बिना अपनी ओर से आकस्मिक निधि से किसानों को नुकसान भरपाई देगी। मुनगंटीवार ने कहा कि बेमौसम बारिश के कारण 34 जिलों में लगभग 70 लाख हेक्टेयर क्षेत्र की फसलों का नुकसान होने का अनुमान है। इसमें से अब तक 60 लाख हेक्टेयर क्षेत्र का पंचनामा पूरा हो चुका है। मुनगंटीवार ने कहा कि फसल बीमा की राशि मिलने में किसानों को अड़चन नहीं आए इसको लेकर भी बैठक में चर्चा हुई। मुनगंटीवार ने कहा कि मनरेगा के माध्यम से खेतों की सफाई की जाएगी। इसके साथ ही चारे की पैदावार के लिए अधिकारियों को सूचना दी गई है। मुनगंटीवार ने कहा कि खरीफ की फसलों के कारण हुए नुकसान के बाद अब रबी की फसलों के बुवाई का क्षेत्र बढ़ने की संभावना है। इस दृष्टि से मुख्यमंत्री ने कृषि विभाग को उचित व्यवस्था करने को कहा है। 

उद्धव की घोषणा लागू करे सरकार

वहीं प्रदेश के पर्यावरण मंत्री रामदास कदम ने कहा कि राज्य में बेमौसम बारिश के कारण 60 लाख किसान प्रभावित हुए हैं। शिवसेना पक्ष प्रमुख उद्धव ठाकरे ने किसानों को 25 हजार रुपए प्रति हेक्टेयर नुकसान भरपाई देने की घोषणा की है। शिवसेना के मंत्रियों ने इस घोषणा को तत्काल लागू करने की मांग की। इस पर मुख्यमंत्री फडणवीस ने सहमति जताई है। कदम ने कहा कि कोंकण में मछुआरों को निर्वाह भत्ता देने की मांग की गई है। शिवसेना विधायक दल के नेता व राज्य के स्वास्थ्य मंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि सरकार ने किसानों की मदद के लिए 10 हजार करोड़ रुपए देने की घोषणा की है। लेकिन यदि 25 हजार रुपए प्रति हेक्टयर के हिसाब से मदद दी गई तो लगभग 17 हजार करोड़ रुपए की जरूरत पड़ेगी। इस मांग पर मुख्यमंत्री ने विचार करने का आश्वासन दिया है। शिंदे ने कहा कि सभी किसानों को 25 हजार रुपए प्रति हेक्टेयर मदद देने की मांग की गई है। नुकसान भरपाई की मदद में किसानों के लिए 2 हेक्टेयर खेती की सीमा नहीं होनी चाहिए। शिंदे ने कहा कि किसानों की मदद के लिए बीमा कंपनियों को सख्त भूमिका नहीं अपनानी चाहिए। प्रदेश के परिवहन मंत्री दिवाकर रावते ने कहा कि बेमौसम वर्षा से प्रभावित इलाकों में विद्यार्थियों के एसटी बस पास के किराए को अप्रैल तक के लिए माफ करने की मांग की गई है। इसलिए लिए एसटी महामंडल को राज्य सरकार की ओर से पैसे दिए जाने चाहिए। 

बैठक में आने पर शिवसेना मंत्रियों का स्पष्टीकरण 

शिवसेना की ओर से प्रदेश के पर्यावण मंत्री रामदास कदम ने कहा कि आपदा प्रभावित किसानों की मदद के लिए बैठक बुलाई गई थी। इसलिए शिवसेना के मंत्री पक्ष प्रमुख उद्धव ठाकरे के आदेश पर बैठक में शामिल हुए। कदम ने कहा कि जनता के बीच ऐसा संदेश नहीं जाना चाहिए कि किसानों के जीने-मरने का सवाल है और शिवसेना बैठक में शामिल नहीं हुई। इसके लिए हमने बैठक में हिस्सा लिया। विधानसभा चुनाव के बाद यह पहला मौका था जब मुख्यमंत्री और शिवसेना के मंत्रियों का आमना-सामना हुआ पर भाजपा और शिवसेना के बीच तल्खी बरकरार नजर आई। 

नई सरकार बनाने पर चर्चा नहीं - मुनगंटीवार 

भाजपा नेता मुनगंटीवार ने कहा कि पालक मंत्रियों की बैठक में प्रदेश में नई सरकार बनाने को लेकर शिवसेना के मंत्रियों से कोई चर्चा नहीं हुई। मुनगंटीवार ने कहा कि हमारी प्राथमिकता सत्ता के बजाय किसानों की मदद करने की है। सरकार बनाने के लिए भाजपा और शिवसेना में से कौन सा दल जिद पर अड़ा हुआ है। इस सवाल पर मुनगंटीवार ने कहा कि इस सवाल का जवाब वक्त के साथ आपको मिल जाएगा। मुनगंटीवार ने दावा किया कि बैठक में ऐसा नजर नहीं आया कि भाजपा और शिवसेना के मंत्री अलग-अलग हैं। राज्य में नई सरकार बनाने के सवाल पर मुनगंटीवार ने कहा कि यह सत्य नहीं है कि सरकार बनाने के लिए शिवसेना विपक्षी दल कांग्रेस की मदद लेगी। उन्होंने कहा कि भाजपा और शिवसेना की सरकार बनने की अच्छी खबर का इंतजार करना चाहिए। कभी भी अच्छी खबर मिल सकती है। इसी बीच चंद्रपुर में नदी किनारे बाघ के फंसने के सवाल पर मुनगंटीवार ने कहा कि बाघ कोई भी हो उसका संरक्षण और संवर्धन किया जाएगा। 
 

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।