comScore

© Copyright 2019-20 : Bhaskarhindi.com. All Rights Reserved.

सोशल मीडिया पर कमेंट, दो पक्ष आपस में भिड़े - कोतवाली थाने में दोनों पक्षों पर दर्ज हुआ प्रकरण

सोशल मीडिया पर कमेंट, दो पक्ष आपस में भिड़े - कोतवाली थाने में दोनों पक्षों पर दर्ज हुआ प्रकरण

डिजिटल डेस्क शहडोल । सोशल मीडिया में भेजे गए संदेश और उस पर की गई टिप्पणी को लेकर दो पक्ष आपस में भिड़ गए। दोनों ओर से लाठी डंडे चलने लगे। सूचना पर पहुंची पुलिस ने मामले को संभाला। शिकायत के आधार पर दोनों पक्षों पर विभिन्न धाराओं में प्रकरण पंजीबद्ध किया गया है। इधर, घटना के तुरंत बाद जिला प्रशासन ने जिले में सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट करने पर पाबंदी लगा दी है और इसकी मॉनीटरिंग भी शुरू कर दी है। 
   पुलिस के अनुसार घटना शुक्रवार रात करीब साढ़े 10 बजे की है। बस स्टैंड के पास सोहागपुर और सौखी मोहल्ला के कुछ लोगों के बीच संघर्ष शुरू हो गया था। बताया जाता है कि सोशल मीडिया पर दूसरे राज्य का कोई वीडियो वायरल हुआ था, जिसको लेकर एक पक्ष के लोगों ने कुछ टिप्पणी कर दी थी। इसके बाद दूसरे पक्ष के लोगों ने इसके विरोध में टिप्पणी की और देखते ही देखते दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। दोनों पक्ष के लोग लाठी-डंडा लेकर एक-दूसरे के ऊपर टूट पड़े। हालांकि विवाद बढ़ता और शहर में अशांति फैलती इससे पहले ही पुलिस मौके पर पहुंच गई थी।
इन पर दर्ज हुआ प्रकरण 
राहुल सिंह पिता स्व. बलवंत सिंह (40) निवासी वार्ड नं. 21 सौखी मोहल्ला की शिकायत पर सुफियान खान, अय्या, विक्की खान, शाहरुख खान निवासी सोहागपुर सहित अन्य पर तथा सुफियान खान पिता मो. गुफरान खान (33) निवासी वार्ड नं. 3 सोहागपुर की शिकायत पर राहुल सिंह ,अमित गुप्ता, रब्बू सिंह, गजेन्द्र सिंह, शक्ति सिंह आदि पर गाली गलौच, मारपीट करने व जान से मारने की धमकी देने पर धारा 147, 148, 294, 323, 506 भादवि के तहत प्रकरण पंजीबद्ध किया है। 
प्रशासन ने लगाया प्रतिबंध
इस घटना के बाद जिला प्रशासन ने सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट करने और इस पर कमेंट करने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है। अपर जिला दंडाधिकारी अशोक ओहरी की ओर से जारी किए गए आदेश में कहा गया है कि जिले की संपूर्ण राजस्व सीमा में सोशल मीडिया पर किसी भी तरह की आपत्तिजनक एवं उद्वेलित करने वाली फोटो अथवा पोस्ट डालने एवं उस पर कमेंट करने पर प्रतिबंध लगाया जाता है। यह आदेश 28 सितंबर से 28 अक्टूबर तक प्रभावशील रहेगा। इस अवधि में आदेश का उल्लंघन धारा 188 के तहत दंडनीय अपराध की श्रेणी में आ जाएगा। 
 

कमेंट करें
NT2jQ
NEXT STORY

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

जानिए भास्कर प्रॉपर्टी के बारे में:
भास्कर प्रॉपर्टी ऑनलाइन रियल एस्टेट स्पेस में तेजी से आगे बढ़ने वाली कंपनी हैं, जो आपके सपनों के घर की तलाश को आसान बनाती है। एक बेहतर अनुभव देने और आपको फर्जी लिस्टिंग और अंतहीन साइट विजिट से मुक्त कराने के मकसद से ही इस प्लेटफॉर्म को डेवलप किया गया है। हमारी बेहतरीन टीम की रिसर्च और मेहनत से हमने कई सारे प्रॉपर्टी से जुड़े रिकॉर्ड को इकट्ठा किया है। आपकी सुविधाओं को ध्यान में रखकर बनाए गए इस प्लेटफॉर्म से आपके समय की भी बचत होगी। यहां आपको सभी रेंज की प्रॉपर्टी लिस्टिंग मिलेगी, खास तौर पर जबलपुर की प्रॉपर्टीज से जुड़ी लिस्टिंग्स। ऐसे में अगर आप जबलपुर में प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान बना रहे हैं और सही और सटीक जानकारी चाहते हैं तो भास्कर प्रॉपर्टी की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।