दैनिक भास्कर हिंदी: छत से कूदे तो बिछ जाएगा नेट, चावल के पानी का ऑर्गेनिक फार्मिंग, जानिए नागपुर यूनिवर्सिटी में तैयार मॉडलों की खूबियां

January 4th, 2019

डिजिटल डेस्क, नागपुर। आधुनिक युग में रिसर्च और नवाचार का बोलबाला है। जीवन को आसान बनाने की दृष्टि से लगातार आविष्कार हो रहे हैं। इसमें हमारे युवा बढ़-चढ़ कर अपना योगदान दे रहे हैं। राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय द्वारा आयाेजित प्रतियोगिता में इसकी बानगी देखने को मिली।

इस साल 13वां राज्य इंटर यूनिवर्सिटी रिसर्च फेस्टिवल "आविष्कार 2019' का आयोजन 15 जनवरी से गोंडवाना विश्वविद्यालय में होने जा रहा है। नागपुर यूनिवर्सिटी इसमें अपने 48 प्रोजेक्ट्स भेजेगा। इन्हीं के चयन के लिए यूनिवर्सिटी की ओर से शहर के महल स्थित सीपी एंड बेरार में 3 और 4 जनवरी को इंटर कॉलेज प्रतियोगिता आयोजत की गई है। गुरुवार को इसका उद्घाटन हुआ। इस प्रतियोगिता में नागपुर यूनिवर्सिटी और सम्बद्धित कॉलेजों से 151 एंट्री आई है। यहां घरेलू समस्याओं से लेकर अंतरिक्ष तक की समस्याओं के समाधान के लिए युवाओं ने बेहतरीन समाधान दिए हैं। इन विद्यार्थियों में नागपुर, भंडारा, गोंदिया और वर्धा जिलों के स्टूडेंट शामिल हैं। 6 श्रेणियों में कॉमर्स, मैनेजमेंट, लॉ, भाषा, ह्यूमेनिटिज, फाइन आर्ट्स, साइंस, एग्रीकल्चर, मेडिसिन और फार्मेसी जैसे विषय हैं। इन एंट्रियों में से 48 एंट्रियां चुन कर स्टेट लेवल प्रतियोगिता में नागपुर यूनिवर्सिटी का प्रतिनिधित्व करेंगी। 

आत्महत्या की घटनाएं रोकने के लिए टैरेस प्रोटेक्शन
ऊंची इमारतों से कूद कर आत्महत्याओं के मामले आए दिन सामने आते हैं। शहर के कमला नेहरू महाविद्यालय की एमएससी प्रथम वर्ष प्राची बालपांडे एंड रविना सेवतकर ने एक सेंसर आधारित मॉडल तैयार किया है। इसमें इमारतों के पैरापिट पर सेंसर लगे होंगे। जैसे ही कोई व्यक्ति पैरापिट पर खड़ा होगा, सेंसर तुरंत उसे डिटेक्ट कर लेगा और पैरापिट से एक नेट निकलेगा, कूदने वाला उसमें ही अटक जाएगा, नीचे नहीं गिरेगा।

अंतरिक्ष के वेस्ट मैनेजमेंट की समस्या अब नहीं रहेगी
अंतरिक्ष यात्रियों के लिए अंतरिक्ष यात्रा के दौरान सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट एक बड़ी समस्या है। मौजूदा वक्त में यह सारा वेस्ट फुटबॉल में वापस धरती पर लाया जाता है। शहर के इंस्टीट्यूट ऑफ सायंस के सीबीजेड शाखा के दूसरे वर्ष के विद्यार्थी दुशांत बागडे और अमिशा निचांत ने इस समस्या पर एक मॉडल बनाया है। इसके जरिए अंतरिक्ष यान का सारा सॉलिड वेस्ट प्रोसेस करके समाप्त किया जा सकता है। इससे मिथेन गैस निकलेगी, जो अंतरिक्ष यान में ही इस्तेमाल की जाएगी।

चावल का पानी बड़ा गुणकारी
शहर के शिवाजी सायंस कॉलेज की एमएससी मायक्रोबायोलॉजी की छात्रा ऐश्वर्या कापसे ने एक प्रोजेक्ट तैयार किया है। "होममेड लैक्टोबैसिलस सिरम' नामक इस प्रोजेक्ट में चावल को धोने के बाद बचे पानी में दूध की बूंदें मिलाने से एक हरफनमौला द्रव्य तैयार होता है। दावा है कि इसे जूतों या गिले कपड़ों पर छिड़कने से बदबू की समस्या दूर हाे जाएगी। यहां तक कि बाथरूम में होने वाले ब्लॉकेज में यह द्रव्य डालने से इसमें मौजूद बैक्टीरिया ब्लॉकेज खा जाएंगे। इसके अलावा इसे फिश टैंक में डालने से मच्छलियों की गंदगी को भी बैक्टिरिया खा जाएंगे। ऑर्गेनिक फार्मिंग में भी इसका उपयोग किया जा सकता है।

कांक्रीट नहीं रोक पाएंगे पानी 
मौजूदा वक्त में हो रहे निर्माणकार्यों में बड़े पैमाने पर कांक्रीट का इस्तेमाल होता है। सड़क, फुटपाथ, इमारतों में कांक्रीट का इस्तेमाल होता है। इससे वर्षा का पानी जमीन के भीतर नहीं जा पाता। इससे आस पास के पेड़-पौधे सूख जाते हैं। नागपुर यूनिवर्सिटी कैंपस के केमेस्ट्री विभाग की छात्रा उफैरा पटेल ने एक ऐसा कांक्रीट सिस्टम तैयार किया है, जिसकी मदद से पानी सतह पर नहीं रुकेगा, बल्कि जमीन के भीतर चला जाएगा।

मोबाइल की तरह अब बिजली मीटर भी प्री-पेड
प्रदर्शनी में प्री-पेड बिजली मीटर का भी प्रदर्शन किया गया है। मोबाइल रिचार्ज की ही तरह बिजली मीटर रिचार्ज किया जा सकता है। यह सिस्टम आपके मोबाइल नंबर से कनेक्ट होगा। एक निर्धारित यूनिट इस्तेमाल के बाद आपके मोबाइल पर एसएमएस अलर्ट आना शुरू हो जाएंगे। विद्यार्थियों का दावा है कि इस मॉडल के इस्तेमाल से एवरेज बिल या फिर अन्य प्रकार के अतिरिक्त खर्चों से निजात मिलेगी।