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कांग्रेस -एनसीपी ने कहा - नैतिक आधार पर इस्तीफा दें फड़नवीस, चुनाव लड़ने लगे पाबंदी

कांग्रेस -एनसीपी ने कहा - नैतिक आधार पर इस्तीफा दें फड़नवीस, चुनाव लड़ने लगे पाबंदी

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़नवीस के खिलाफ निचली अदालत में मामला चलाने की सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी मिलने के बाद अब कांग्रेस पार्टी भी फड़नवीस पर हमलावर हो गई है। पार्टी ने कहा है कि जब किसी मुख्यमंत्री के खिलाफ आपराधिक मामला चलाया जाता है तब उसे नैतिक आधार पर पद पर बने रहने का अधिकार नहीं है। कांग्रेस के प्रवक्ता शक्ति सिंह गोहिल ने यहां कहा कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने अपने हलफनामे में दो आपराधिक मामलों को छुपा लिया था और फिर ट्रायल पर स्टे ले लिया था। अब सुप्रीम कोर्ट ने उनके खिलाफ निचली अदालत में आपराधिक मुकदमा चलाने की मंजूरी दे दी है। उन्होने कहा कि जब हम हलफनामा देते हैं तो ईश्वर की कसम खाकर कहते हैं कि वे जो लिख रहे हैं  वो सही है। लेकिन यहां मुख्यमंत्री ने अपने खिलाफ दो मामले छुपा लिए। प्रवक्ता ने कहा कि यह परंपरा है कि जिसके खिलाफ आपराधिक मामला चलता है वह नैतिक आधार पर इस्तीफा देता है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री का मामला इससे अलग नहीं है। उन्होने कहा कि तत्कालीन रेल मंत्री पवन बंसल ने तो महज इस आधार पर मंत्री पद छोड़ दिया था क्योंकि एफआईआर में उनके भांजे का नाम आ गया था।   

फडणवीस पर लगे चुनाव लड़ने पर पाबंदीः मलिक

उधर मुंबई में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने कहा है कि अब सुप्रीम कोर्ट में भी साबित हो चुका है कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने चुनाव नामांकन के साथ दिए गए शपथ पत्र में अपने खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों की जानकारी छुपाई है। इस लिए मुख्यमंत्री को तुरंत अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए। राकांपा प्रवक्ता नवाब मलिक ने मंगलवार को कहा कि मुख्यमंत्री फडणवीस ने 2014 के विधानसभा चुनाव के लिए चुनाव आयोग को दिए गए अपने शपथ पत्र में आपराधिक मामलों की जानकारी छुपाई थी। अब यह बात सुप्रीम कोर्ट में भी साबित हो गई है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में मुख्यमंत्री के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति दे दी है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए मलिक ने कहा कि अब फडणवीस को पद पर बने रहने का नैतिक अधिकार नहीं रहा। राज्य के मुख्यमंत्री खुद अपने खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों की जानकारी छुपाते हैं। इस लिए उन्हें राजनीति में बने रहने का अधिकार नहीं है। इस लिए मामले में अंतिम निर्णय आने तक फडणवीस के चुनाव लड़ने पर रोक लगाई जानी चाहिए।
 

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