दैनिक भास्कर हिंदी: नहीं बिक रही धनिया, किसान बांट रहे मुफ्त

April 28th, 2020


डिजिटल डेस्क छिंदवाड़ा/चौरई। अप्रैल से जून माह तक रायपुर, हैदराबाद सहित देश के कई हिस्सों में छिंदवाड़ा का हरा धनिया अपनी खुशबू के कारण किसानों के चेहरे पर लाली लाता था। लॉक डाउन के कारण इस साल वाहनों की आवाजाही पर प्रतिबंध के कारण किसानों को खरीददार नहीं मिल रहे हैं। हालात यह है कि कहीं किसान मुफ्त में बांट रहे हैं तो कहीं किसानों ने खेतों में सिंचाई बंद कर दी है, ताकि धनिया खेतों में ही सूख जाए। खेतों में हरा धनिया लहलहा रहा है, इधर किसानों के चेहरे पीले पड़ रहे हैं। उन्हें लाखों का नुकसान हो रहा है।
जानकारी के मुताबिक चौरई क्षेत्र में 2 हजार हेक्टेयर में संभार यानी हरा धनिया का उत्पादन किया जाता हैं। इस बार लॉकडाउन के कारण सब्जियों का परिवहन नहीं हो पा रहा हैं। किसानों के खेतों में लगे संभार के दाम नहीं मिल पा रहे हैं। किसान रामविलास वर्मा ने बताया कि 2 एकड़ में लगे संभार के खरीदार नहीं मिल पा रहे हैं। आलम यह हैं कि उन्हें अब संभार खेत में ही सुखाना पड़ रहा हैं। कई किसान खेत में रोटावेटर चलाकर संभार के अवशेष को मिट्टी में मिलाकर जैविक खाद बनाने की तैयारी में है। इससे अगली फसल में उन्हें लाभ मिलेगा।
गांवों में खड़े वाहन-
चौरई नगर के कई व्यापारी किसानों से हरा धनिया खरीदकर रायपुर, जबलपुर, सिवनी, बालाघाट, गोंदिया और हैदराबाद तक भेजते हैं। चौरई से सिवनी मार्ग में बसे खैरी गांव के लोगों का मुख्य काम संभार का व्यापार हैं। इस गांव में 50 से अधिक ट्रक और अन्य वाहन हैं। इस बार लॉकडाउन के कारण बाजार बंद होने से संभार का परिवहन बंद है, इस कारण ये वाहन गांवों में खड़े नजर आ रहे हैं।
- किसान ने मुफ्त में बांटा संभार-
नगर के वार्ड 7 निवास किसान नंदकिशोर पिता सुमरलाल वर्मा ने बताया कि संभार के दाम नहीं मिल पा रहे हंै। ऐसे में उन्होंने मंगलवार को नगर के वार्ड 7, 9 और 10 में लोगों को मुफ्त में संभार बांट दिया। यही हाल मुआरी के काशीराम वर्मा के हैं, उन्होंने खेत खाली करने के लिए संभार में बकरियों को चरने के लिए छोड़ दिया।
मूंग की फसल लेते तो ज्यादा फायदा होता-
जिले में चौरई के अलावा मोहखेड़़, चौरई और बिछुआ विकासखंड के कई गांवों में किसान गर्मी में हरा धनिया की खेती करते हंै। विवाह सीजन में किसानों को संभार से अच्छी खासी आमदनी हो जाती है। इस साल लॉक डाउन के कारण किसानों के लिए संभार की खेती मुसीबत का सबब बन गई है। किसानों का कहना है कि वे संभार की जगह मूंग की फसल लेते तो ज्यादा फायदा होता।

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