दैनिक भास्कर हिंदी: क्रेजी कैसल हादसा : एक सप्ताह बाद भी सदमे से उबर नहीं सके मृतकों के परिजन

May 29th, 2018

डिजिटल डेस्क, नागपुर। क्रेजी कैसल हादसे के एक सप्ताह बीत जाने के बाद घटना में मृत सागर और अक्षय का परिवार अब भी घटना को लेकर सदमें में हैं। दोनों ही परिवारों के सदस्य इस घटना से अब तक उबर नहीं पाए और इसके लिए जिम्मेदार हल्दीराम ग्रुप के क्रेजी कैसल वॉटर पार्क के खिलाफ जमकर आक्रोशित हैं। वे न्याय की लड़ाई अकेले ही लड़ रहे हैं और इस बात के लिए भी आश्चर्यचकित हैं कि प्रशासन को इस मामले में जो कार्रवाई करनी चाहिए थी, वह नहीं की गई। पुलिस से लेकर सभी विभाग अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ते नजर आए।

घटना के सप्ताह भर बाद भास्कर ने पीड़ित परिवारों की स्थिति का जायजा लिया। हादसे में मृत अक्षय की मां पूरी तरह से सुध-बुध हो चुकी हैं, 24 घंटे बेड पर ही हैं और बहनें, भाई की किताबों को देखकर दिन में बार-बार रोती हैं। इसी तरह हादसे में मृत सागर के परिवार में उसे पालने वाली दादी की रातों की नींद खत्म हो गई, दो भाई और पिता एक सप्ताह से मौत के लिए जिम्मेदारों पर कार्रवाई के लिए अकेले संघर्ष कर रहे हैं। इस मामले में प्रशासन के रवैये से जमकर नाराज हैं। दूसरी ओर घटना के लिए जिम्मेदार क्रैजी कैसल प्रबंधन ने संबंधितों को किसी भी प्रकार का मुआवजा देना तो दूर, अब तक एक बार भी सांत्वना देने तक नहीं पहुंचा।

किताब में ढूंढ़ रहे अक्षय को
अक्षय बिंड सीए बनना चाहता था। इसके लिए उसने सीए फाउंडेशन कोर्स की क्लास भी लगाई थी। सोमवार से वह क्लास अटेंड करने वाला था। शनिवार को वो सीए की किताबें भी लाया था, मगर रविवार को प्रबंधन की लापरवाही ने उसे निगल लिया। अक्षय के पिता अनिल बिंड को पैरालिसिस है। कुछ दिनों पूर्व ही प्रेशर कूकर की गर्म सिटी लगने से मां ठीक से बोल नहीं पाती। अक्षय की मौत के बाद से वह सुध-बुध खो चुकी हैं। बेड पर पड़ी रहती हैं। अक्षय की बहन सोनल व पूजा सीए की किताबें देखकर अपने भाई को याद कर रही हैं। सोनल और पूजा इसके लिए प्रबंधन को जिम्मेदार मानते हुए उन पर कड़ी कार्रवाई की मांग कर रही हैं। किताब में अक्षय की यादों को संजोने के लिए बेबस हैं। माता-पिता चुपचाप देखते रहते हैं आैर दोनों बहनें अपने भाई को याद कर रोती रहती हैं। एक सप्ताह बाद भी घर में मातम छाया हुआ है।

मौत के बाद भी चल रहा था वेब पूल
सागर सहस्त्रबुद्धे (20) को उसके दोस्तों ने बाहर निकाला। सागर के नाक से खून बह रहा था। मस्तिष्क पर चोट लगी थी। हाथ-पैर में खरोचें आई हुई थीं। डॉक्टर व एंबुलेंस की जरूरत थी। उसे एक कमरे में ले जाया गया। वहां पलंग पर रख दिया गया। वेब का पानी बंद नहीं किया गया आैर हादसे के बाद भी शाम 5.50 बजे तक वेब पूल शुरू था। दोस्त ऑटो में सागर व अक्षय को अस्पताल ले गए। हादसे के 35 मिनट बाद तक कोई स्वास्थ्य सुविधा नहीं मिली। बाउंसर, लाइफ गार्ड या कर्मचारियों ने अस्पताल पहुंचकर हाल-चाल जानना भी जरूरी नहीं समझा।

हल्दीराम समूह द्वारा संचालित क्रेजी कैसल में हुए हादसे में लापरवाही की परतें खुलतीं जा रही हैं। क्रेजी कैसल में मारे गए दो युवाआें को तुरंत स्वास्थ्य सुविधा मिलती, तो उनकी जान बच सकती थी। क्रेजी कैसल में रविवार 20 मई को हुए हादसे में अक्षय अनिल बिंड (19), सागर गंगाधर सहस्त्रबुद्धे (20) की मौत हो गई थी। क्रेजी कैसल के जिस वेब पूल में यह हादसा हुआ, उसमें क्षमता से ज्यादा लोगों को उतारा गया था। वेव पुल में पहले से 4 फीट पानी था आैर वेब (लहरें) शुरू करने के बाद इसमें 7 फीट तक पानी भर गया था। बताया गया कि वेब छोड़ते समय लेवल का जरा भी ध्यान नहीं रखा गया आैर सीधे लेवल-4 से वेब छोड़ी गई, जिससे पुल में खेल रहे युवा लहरों की बौछार से पलट गए थे।

पूल में मौजूद करीब 200 लोगों की जान की हिफाजत के लिए केवल लाइफ गार्ड रखा गया था। अक्षय, सागर व स्नेहल जब जान बचाने के लिए हाथ-पैर मार रहे थे, तब किसी ने भी वेब कम करने अथवा उन्हें बाहर निकालने की कोशिश नहीं की। दोनों अपने दोस्तों की मदद से अचेतावस्था में पूल से बाहर निकले, तो लाइफ गार्ड या प्रबंधन के किसी आदमी ने इन्हें पंपिंग नहीं की, जबकि इनके शरीर में क्लोरीनयुक्त पानी घुस चुका था।

फ्रूटी और वेपर्स लाने की सलाह
तीनों अचेतावस्था में थे, तभी क्रेजी कैसल की महिला कर्मचारी ने स्नेहल के लिए फ्रूटी और वेपर्स लाने की सलाह उसके दोस्त अमोल जनबंधु को दी। अमोल ने सबसे पहले स्नेहल को पंपिंग कर उसके शरीर से पानी बाहर निकालने का काम किया। इसके बाद वेपर्स लाया। मामला बिगड़ते देख अमोल, स्नेहल को कैब से सीधा वोक्हार्ट अस्पताल ले गया। अक्षय व सागर को पंपिंग नहीं की गई। इन्हें कोई प्रथम उपचार नहीं मिला। इन्हें अस्पताल ले जाने के लिए एंबुलेंस भी नहीं थी। इनके दोस्त असहाय होकर केवल दुआ कर रहे थे। इस बीच एक दोस्त ने आटो किया आैर वोक्हार्ट अस्पताल पहुंचाया। अस्पताल पहुंचने पर दोनों की मौत हो चुकी थी। करीब 35 मिनट तक इन्हें कोई स्वास्थ्य सुविधा नहीं मिली। प्रबंधन की तरफ से डाक्टर या एंबुलेंस उपलब्ध कराने की कोई कोशिश नहीं हुई।

स्नेहल के पेट में अभी भी है क्लोरिन
हादसे में जिंदा बचे स्नेहल मोटघरे (19) के शरीर में अभी भी क्लोरीन होने से उसके पेट में दर्द जारी है। क्लोरीनयुक्त पानी उसके शरीर के हर हिस्से में फैल चुका है। स्नेहल को बचानेवाले अमोल जनबंधु ने बताया कि अक्षय, सागर व स्नेहल तीनों अचेतावस्था में थे आैर किसी को भी क्रैजी कैसल की तरफ से स्वास्थ्य सुविधा नहीं दी गई। मुझे फ्रूटी व वेपर्स लाने को कहा गया था। यह समझ से परे है। हमने पंपिग की आैर खुद कैब से स्नेहल को अस्तपाल पहुंचाया। बाकी दोनों को भी आटो से अस्पाताल पहुंचाया, लेकिन काफी समय हो चुका था। समय पर इलाज होता तो अक्षय व सागर भी बच सकते थे।

बाउंसर, लाइफ गार्ड व कर्मचारी पंपिंग या अन्य प्रक्रिया से शरीर से पानी बाहर निकालने की बजाय चुपचाप देख रहे थे। मदद तो दूर किसी ने हालचाल तक नहीं पूछा। पुलिस की भूमिका भी सवाल खड़े कर रही है। अब तक किसी पर मामला दर्ज नहीं किया। पंचनामे के दौरान पुलिस के सामने जो वेव छोड़ी गई, वह लेवल-4 की नहीं थी। फुटेज भी गायब हो चुके हैं। प्रबंधन काफी प्रभावी है, लेकिन दोषियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

मुझे मेरा लाल चाहिए
गंगाधर सहस्त्रबुद्धे ने कहा कि मुझे मेरा लाल (सागर) चाहिए। इसकी मौत के लिए जिम्मेदार लापरवाह प्रबंधन पर कड़ी कार्रवाई करने की उन्होंने मांग की। घर में पूरा परिवार ही सागर की याद में आंसू बहा रहा है। किस तरह एक रसूखदार के लिए सारे नियम ताक पर रख दिए जाते हैं और कैसे जिम्मेदार विभागों का बड़े लोगों के लिए अपना रवैया बदल लेते हैं, यह इस मामले में सामने आ रहा है। जिन्हें कार्रवाई करना चाहिए था, वे प्रबंधन के हितों को साधने में लगे हुए हैं।