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बांबे हाईकोर्ट ने दाभोलकर-पानसरे हत्याकांड मामले में CBI-SIT को लगाई फटकार

August 02nd, 2018 22:29 IST
बांबे हाईकोर्ट ने दाभोलकर-पानसरे हत्याकांड मामले में CBI-SIT को लगाई फटकार

डिजिटल डेस्क, मुंबई। बांबे हाईकोर्ट ने सामाजिक कार्यकर्ता नरेंद्र दाभोलकर व गोविंद पानसरे की हत्या से जुड़े मामले की जांच में सक्रियता न दिखाने के लिए केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई व राज्य सीआईडी की विशेष जांच टीम (एसआईटी) को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने कहा है कि देश में बेहद दुखद दौर दिखाई दे रहा है। लोग न खुलकर घूम सकते हैं और न ही बोल सकते हैं। फिर भी जांच एजेंसियां इन दोनों मामले की जांच में सक्रियता नहीं दिखा रही है। राज्य में जहां देखो लोग बस जला रहे हैं। पुलिस पर पथराव कर रहे हैं। कानून व्यवस्था बिगड़ने से अराजकता का माहौल दिख रहा है। यह हृदय विदारक स्थिति है।

दाभोलकर व पानसरे मामले की जांच रिपोर्ट पर असंतोष व्यक्त करते हुए न्यायमूर्ति एससी धर्माधिकारी व न्यायमूर्ति भारती डागरे की खंडपीठ ने गुरुवार को सीबीआई व एसआईटी की ओर से पेश की गई गोपनीय जांच रिपोर्ट को बिना देखे वापस कर दिया। खंडपीठ ने कहा कि बार-बार एक जैसी रिपोर्ट पेश की जा रही है। जिसमें गोपनीय जैसा कुछ नहीं नजर आ रहा है। खंडपीठ ने कहा कि देश एक दुखद दौर से गुजर रहा है। जहां लोग न बेखौफ घूम सकते हैं और न ही खुलकर बोल सकते हैं। फिर भी जांच एजेंसिंया हत्या से जुड़े दोनों मामलों की जांच में सक्रियता नहीं दिखा रही है।

दाभोलकर की 20 अगस्त 2013 को पुणे में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। जबकि पानसरे की 16 फरवरी 2015 में कोल्हापुर में गोली मारकर हत्या की गई थी। सीबीआई दाभोलकर मामले की जांच कर रही है जबकि एसआईटी पानसरे मामले की तहकीकात कर रही है। खंडपीठ के सामने पानसरे व दाभोलकर के परिजनों की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई चल रही है। याचिका में मांग की गई है। इन दोनों प्रकरणों की जांच हाईकोर्ट की निगरानी में की जाए।

खंडपीठ ने कहा कि हम दोनों मामलों की जांच से नाखुश हैं। इतने संवेदनशील मामले की जांच में असंवेदनशीलता नजर आ रही है। अदालत ने कहा कि आज का दौर देख कर लगता है कि एक दिन हर कोई घूमने व खुलकर बोलने के लिए भी पुलिस सुरक्षा की मांग करेगा। आज राज्य में क्या हो रहा है? लोग बसो में तोड़ फोड और आगजनी कर रहे हैं। ऐसा लगता है जैसे लोग कुछ भी करने के लिए स्वतंत्र है। खंडपीठ ने कहा कि राज्य और सरकार दो भिन्न चीजे हैं।

अदालत ने कहा कि कल को सरकार बदल जाएगी लेकिन राज्य कायम रहेगा। राज्य में करोड़ो लोगों के घर हैं। ऐसी स्थिति में क्या हर ऐसे शख्स को पुलिस सुरक्षा दी जाएगी जो खुलकर बोलना चाहता है। और अपने मन की बात को व्यक्त करना चाहता है। मामले की जांच को लेकर हमने सीबीआई व सरकार के आला अधिकारियों को तलब किया था फिर भी सामान्य रिपोर्ट पेश की गई है। यह दर्शाता है कि सरकार की प्राथमिकताएं क्या है। यदि यहीं स्थिति रहेगी तो कोई कोर्ट क्यों आएगा? हमें जांच एजेंसियों को समय देने में दिक्कत नहीं बशर्ते वे ठोस परिणाम हमारे सामने पेश करे।

जांच से जुड़े अधिकारी कश्मीर से लेकर त्रिपूरा तक घूम रहे पर यहां खाली हाथ लौट रहे है। और कोई उनसके कुछ नहीं पूछ रहा है। जैसे आनंद यात्रा में गए हो। खंडपीठ ने कहा कि इसका समाज पर विपरीत असर पड़ेगा। खुद से अपनी पीठ थपथपाने का कोई मतलब नहीं। खंडपीठ ने यह बात हर मामलेें में प्रेस कांफ्रेंस करने वाले पुलिसकर्मियों के संबंध में कही। हाईकोर्ट ने फिलहाल इस मामेल की सुनवाई 6 सितंबर तक के लिए स्थगित कर दिया है।  

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