दैनिक भास्कर हिंदी: सिम्स की बिल्डिंग निर्माण से पहले ही विवादों में, सामग्री सप्लाई का मामला

September 5th, 2019

डिजिटल डेस्क,छिंदवाड़ा। सिम्स (छिंदवाड़ा इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस) यानी सुपर स्पेशिलिटी हॉस्पिटल बिल्डिंग निर्माण से पहले ही विवादों में आ गई है। हाल ही में बिल्डिंग निर्माण की टेंडर प्रक्रिया के बाद अब बिल्डिंग में लग रहे वायवीय ट्यूब समेत अन्य सामग्री की सप्लाई को लेकर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं। पीडब्ल्यूडी पीआईयू के जरिए हुई टेंडर प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसकी शिकायत मुख्यमंत्री, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री, स्टेट हेल्थ मिनिस्टर, चीफ सेक्रेटरी के अलावा ईओडब्ल्यू, लोकायुक्त और विजिलेंस से की गई है।
वायवीय ट्यूब समेत अन्य मटेरियल की टेंडर प्रक्रिया पीआईयू के माध्यम से जून माह में हो चुकी है। सूत्रों के मुताबिक दिल्ली की जिस कंपनी को ठेका मिला है उसने सप्लाई भी लगभग शुरू कर दी है।  दिल्ली की ही कंपनी ई-स्पेक्ट्रम के माध्यम से सवाल उठाए जा रहे हैं। ई-स्पेक्ट्रम कंपनी के लेटर हेड पर एक शिकायती पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। जिसमें वायवीय ट्यूब समेत मटेरियल की गुणवत्ता पर सवाल किए गए हैं। उक्त कंपनी ने ही सीएम समेत तमाम जगह शिकायत प्रेषित की है।

क्या होना है सप्लाई

शिकायती पत्र के अनुसार सिम्स के लिए वायवीय ट्यूब जिसके तहत बिल्डिंग में लगने वाली ऑक्सीजन व नाइट्रोजन पाइप लाइन, एसी, वेंटीलेशन, गैस पाइप लाइन, लैब मटेरियल सहित अस्पताल के लिए जरूरी अन्य मटेरियल की सप्लाई व इरेक्शन किया जाना है। कहा जा रहा है कि एक ही कंपनी को सभी सामग्री की सप्लाई व इरेक्शन का जिम्मा दिया गया है।

बिल्डिंग के लिए री-टेंडर की नौबत

सुपर स्पेशिलिटी हॉस्पिटल बिल्डिंग के लिए भी री-टेंडर की स्थिति बनी है। इसको लेकर भी यहां से लेकर भोपाल तक हल्ला मचा। दरअसल टेंडर में 1300 करोड़ लागत कोड किए जाने और तकनीकी स्वीकृति 800 करोड़ रुपए की होने से विवाद की स्थिति बनी। हालांकि टेंडर की दरें अधिक होने की वजह से प्रक्रिया निरस्त कर री-कॉल किया जा रहा है।

इनका कहना है

हमारा काम सिर्फ बिल्डिंग निर्माण का है। वायवीय ट्यूब व अन्य मटेरियल का टीएस इलेक्ट्रिकल विभाग के जरिए हुआ है। - अवनींद्र सिंह, ईई, पीआईयू पीडब्ल्यूडी छिंदवाड़ा

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