दैनिक भास्कर हिंदी: कैंसर मरीज के नाम पर चल रहा था कंफर्म रेल टिकट का फर्जीवाड़ा, पोलखुली तो जबलपुर से भागा संदिग्ध

May 7th, 2019

डिजिटल डेस्क, मुंबई। पश्चिम रेलवे के सतर्कता विभाग ने कैंसर मरीजों के नाम पर रेलवे के कंफर्म टिकट कम दाम पर हासिल करने के एक रैकेट का भंडाफोड़ किया है। आरोपी डॉक्टरों के फर्जी प्रमाणपत्र का इस्तेमाल कर विशेष कोटे से टिकट आरक्षित करा रहे थे। सतर्कता विभाग के हाथ 74 फर्जी सर्टिफिकेट लगे हैं हालांकि मामले में एक संदिग्ध भागने में कामयाब हो गया। पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी रविंद्र भाकर ने बताया कि कुछ सूचनाओं और संदिग्ध कागजात के आधार पर यह कार्रवाई की गई है। मामले में जल्द ही कुछ और आरोपियों पर शिकंजा कसा जा सकता है।

दरअसल संदेह के आधार पर सतर्कता विभाग की एक टीम ने दादर पीआरएस पर छानबीन की। छानबीन कर रही रेलवे के सतर्कता विभाग के इंस्पेक्टर मनोज यादव और सौरभ मासेकर ने पाया कि मुंबई में कैंसर मरीजों के कोटे के तहत बड़ी संख्या में टिकट निकालकर उनका आरक्षण कराया जा रहा है। छानबीन कर रही टीम को 74 फर्जी अर्जियां मिली। जिसके बाद 4 मई को महानगरी एक्सप्रेस ट्रेन से सफर कर रहे सूरज पांडे नाम के यात्री की जबलपुर पहुंचने पर जांच की गई। कैंसर मरीज के कोटे से सफर कर रहे पांडे ने एसी द्वितीय श्रेणी का  2350 रुपए का टिकट सिर्फ 1205 रुपए में बुक किया था। 

पांडे के साथ उसके परिचर का भी टिकट कैंसर प्रभावितों के कोटे से आरक्षित हुआ था। अधिकारियों ने उसे कैंसर मरीज होने से जुड़े कागजात दिखाने को कहा लेकिन वह कागजात नहीं दिखा पाया। वहीं कैंसर कोटे के तहत आने वाली अर्जियों की छानबीन शुरू की गई तो उसमें डॉ एम डी अग्रवाल के सर्टिफिकेट के आधार पर कैंसर कोटे से कई अर्जियां पाईं गईं। जाने माने कैंसर विशेषज्ञ डॉ अग्रवाल बांबे, लीलावती और ब्रीचकैंडी जैसे प्रतिष्ठित अस्पतालों में अपनी सेवाएं देते हैं। रेलवे अधिकारियों ने डॉक्टर अग्रवाल से संपर्क किया तो उन्होंने किसी को इस तरह का प्रमाणपत्र देने से इनकार किया। जिसके बाद साफ हुआ कि आरोपियों ने फर्जी तरीके से प्रमाणपत्र तैयार किया था। भाकर ने बताया कि कैंसर मरीजों के नाम पर टिकट आरक्षित कराने के सभी मामलों की जांच की जा रही है। इसमें से संदिग्ध मामलों की छानबीन की जाएगी। 


 

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