comScore

© Copyright 2019-20 : Bhaskarhindi.com. All Rights Reserved.

किसान कर्जमाफी, सस्ती बिजली चार धाम यात्रा का किया वादा 

किसान कर्जमाफी, सस्ती बिजली चार धाम यात्रा का किया वादा 

डिजिटल डेस्क, मुंबई। चुनावी बेला में मतदाताओं को रिझाने के लिए शिवसेना ने वादों का पिटारा खोल दिया है। पार्टी ने सत्ता में आने पर अल्पभूधारक और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के किसानों के बैंक खाते में प्रतिवर्ष 10 हजार रुपए जमा कराने का वादा किया है। किसानों की संपूर्ण कर्जमाफी की घोषणा भी की गई है। शनिवार को मुंबई स्थित मातोश्री में शिवसेना पक्ष प्रमुख उद्धव ठाकरे ने पार्टी का घोषणापत्र जारी किया। इसे वचननामा नाम दिया गया है। घोषणापत्र में 300 यूनिट तक इस्तेमाल की जाने वाली घरेलू बिजली की दर में 30 प्रतिशत कटौती करने का वादा किया गया है। 1 रुपए में स्वास्थ्य जांच के लिए क्लिनिक खोलने समेत 10 रुपए में भरपेट भोजन देने का भी ऐलान किया है। वहीं, प्रदेशवासियों को राम जन्मभूमि, चार धाम, वैष्णोदेवी, काशी और मानसरोवर की यात्रा कराने महाराष्ट्र राज्य पर्यटन विकास महामंडल के माध्यम से विशेष केंद्र खोले जाएंगे। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार की लड़कियों के लिए कॉलेज तक मुफ्त शिक्षा के साथ शिवसेना ने भूमिपुत्रों को 80 प्रतिशत नौकरी देने वाले कानून को सख्ती से लागू करने और इसमें असंगठित व ठेका कामगारों को शामिल करने की बात भी कही है। उद्धव ने कहा है कि सरकारी खजाने की हालत को ध्यान में रखते हुए यह घोषणापत्र तैयार किया गया है। 

धुलिया में बोले उद्धव-पीछे से वार करना भगवा संस्कृति नहीं

उधर धुलिया में पक्ष प्रमुख उद्धव ठाकरे ने नाम लिए बिना भाजपा कार्यकर्ताओं पर निशाना साधा है। शनिवार को धुलिया शहर सीट पर खड़े युति उम्मीदवार और शिवसेना नेता हिलाल माली की प्रचार सभा के दौरान उन्होंने कहा, ‘पीछे से वार करना हमारी संस्कृति नहीं, लेकिन यहां भाजपा कार्यकर्ता खुलेआम निर्दलीय उम्मीदवार का प्रचार कर रहे हैं, यह भगवा संस्कृति नहीं है।’ भाजपा द्वारा ऐसे कार्यकर्ताओं पर कोई कार्रवाई नहीं किए जाने को उन्होंने चिंताजनक बताया।
ठाकरे ने अपरोक्ष रूप से पर्यटन मंत्री जयकुमार रावल को शिवसेना उम्मीदवार की मदद करने की नसीहत देते हुए कहा कि धुलिया ग्रामीण सीट बंटवारे में भाजपा को दी गई है, जहां हम भाजपा की हरसंभव मदद कर रहे हैं लेकिन भाजपा कार्यकर्ता निर्दलीय उम्मीदवार के प्रचार में जुटे हैं। भाजपा द्वारा अभी तक बागी कार्यकर्ताओं पर कोई कार्रवाई नहीं किए जाने को भी उन्होंने चिंताजनक बताया। 

कमेंट करें
FToEx
NEXT STORY

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

जानिए भास्कर प्रॉपर्टी के बारे में:
भास्कर प्रॉपर्टी ऑनलाइन रियल एस्टेट स्पेस में तेजी से आगे बढ़ने वाली कंपनी हैं, जो आपके सपनों के घर की तलाश को आसान बनाती है। एक बेहतर अनुभव देने और आपको फर्जी लिस्टिंग और अंतहीन साइट विजिट से मुक्त कराने के मकसद से ही इस प्लेटफॉर्म को डेवलप किया गया है। हमारी बेहतरीन टीम की रिसर्च और मेहनत से हमने कई सारे प्रॉपर्टी से जुड़े रिकॉर्ड को इकट्ठा किया है। आपकी सुविधाओं को ध्यान में रखकर बनाए गए इस प्लेटफॉर्म से आपके समय की भी बचत होगी। यहां आपको सभी रेंज की प्रॉपर्टी लिस्टिंग मिलेगी, खास तौर पर जबलपुर की प्रॉपर्टीज से जुड़ी लिस्टिंग्स। ऐसे में अगर आप जबलपुर में प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान बना रहे हैं और सही और सटीक जानकारी चाहते हैं तो भास्कर प्रॉपर्टी की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।