दैनिक भास्कर हिंदी: एफडीए को 4 माह में 143 सैंपल की रिपोर्ट नहीं मिली, 15 दिन में आनी चाहिए

August 25th, 2019

डिजिटल डेस्क, नागपुर। अन्न व औषधि विभाग की ओर से भले ही लगातार कार्रवाई हो रही हैं, लेकिन सक्षम लैब के अभाव में जांच रिपोर्ट आने में देरी हो रही है। अप्रैल से जुलाई की बात करें तो कुल 279 सैंपल टेस्टिंग के लिए भेजे गए, जिसमें से अब तक 143 की रिपोर्ट नहीं मिली है। ऐसे में घटिया दर्जे के सैंपल पर कैसे कार्रवाई होगी। नियमानुसार 15 दिन के भीतर सैंपल की रिपोर्ट मिलना अपेक्षित है, ताकि दोषी व्यवसायियों पर कार्रवाई की जा सके। लेट-लतीफी के चलते मिलावट करने वाले व्यापारी विभाग की पकड़ से दूर हैं। 
मैन पावर की भी है कमी

खाद्य पदार्थों में विक्रेताओं की मिलावटखोरी पर अंकुश लगाने के लिए अन्न व औषधि विभाग काम करता है। नागपुर के प्रशासकीय इमारत क्रमांक 2 में नागपुर विभाग का कार्यालय है। जिसके अंतर्गत शहर ही नहीं नागपुर जिले के ग्रामीण इलाकों में भी मिलावटखोरों पर कार्रवाई करने का जिम्मा है। हालांकि जनसंख्या के अनुसार इस विभाग के पास मैन पावर की काफी कमी है। बावजूद इसके लगातार कार्रवाई की जाती है। लेकिन सैंपल की रिपोर्ट आने में हो रही देरी कार्रवाई को प्रभावित कर रही है। अप्रैल 2019 से जुलाई 2019 तक विभाग द्वारा 279 सैंपल जांच के लिए प्रयोगशाला में भेजे गए, जो नागपुर में ही सदर इलाके में है। इसमें 87 सैंपल पूरी तरह से सुरक्षित पाए गए, वहीं 30 असुरक्षित मिले, इसमें 11 में मिलावट मिली। वहीं 8 सैंपल दर्जेदार नहीं हैं। इन सब पर नियमानुसार विभाग की ओर से कार्रवाई हो रही है। लेकिन इसमें 143 सैंपल की अब तक रिपोर्ट ही नहीं भेजी गई है। हालांकि नियमानुसार सैंपल की रिपोर्ट आने में 15 दिन का ही समय लगना अपेक्षित है, लेकिन महीनों सैंपल का रिपोर्ट नहीं आने से मिलावटखोरों पर कार्रवाई नहीं हो पा रही है। 

मिलावटखोरी की जानकारी संबंधित विभाग को देने के बाद विभाग इन पर छापामार कार्रवाई करते हैं। नियमों के विरोध में होने पर इनके सैंपल लेकर लैब भेजा जाता है। उपरोक्त अवधि में ऐेसे 28 मामले हैं, जिसमें 2 मामले प्रलंबित हैं। 
कुछ रिपोर्ट में एक महीना भी लग जाता है

सह आयुक्त शशिकांत केकरे अन्न व औषधि विभाग के मुताबिक किसी भी सैंपल की रिपोर्ट 15 दिन में आना अपेक्षित है। लेकिन कुछ रिपोर्ट को आने में एक महीना लग जाता है। जिसके बारे में जानकारी दी जाती है। एक माह के भीतर रिपोर्ट आ जाती है। कार्रवाई प्रभावित नहीं होती है।
    

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