दैनिक भास्कर हिंदी: मिल गया श्रेष्ठ शिक्षक पुरस्कार,पर नहीं मिल रहे लाभ, हाईकोर्ट ने कहा - 6 महीनें में लें निर्णय

March 13th, 2021

डिजिटल डेस्क, मुंबई। जिला स्तर पर श्रेष्ठ शिक्षक सम्मान पुरस्कार पाने वाले अध्यापकों को निर्धारित लाभ न दिए जाने के मामले को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को 6 माह के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया है। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि साल 2018 से पहले जिला परिषद ने जिन शिक्षको को श्रेष्ठ शिक्षक पुरस्कार प्रदान किया है। ऐसे हर शिक्षक के लाभ से जुड़े दावे को सरकार के 12 दिसंबर 2000 के शासनादेश अंतर्गत विचार किया जाए। इस विषय पर कई शिक्षको ने कोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में दावा किया गया था कि सरकार ने शिक्षकों के अध्यापन कौशल को बेहतरीन बनाने के उद्देश्य से राज्य शिक्षक पुरस्कार योजना की शुरुआत की थी। जिसके तहत जिला स्तर पर श्रेष्ठ शिक्षक का सम्मान पाने वाले अध्यापकों को सालाना इंक्रीमेंट के अलावा एक अतिरिक्त इंक्रीमेंट प्रदान करना तय किया गया था। याचिका के मुताबिक इस आशय को लेकर सरकार ने 12 दिसंबर 2000 को एक परिपत्र भी जारी किया था। परिपत्र में श्रेष्ठ शिक्षक का पुरस्कार पाने वाले अध्यापकों को सालाना वेतन बढ़ोतरी के अलावा एक अतिरिक्त वेतन बढ़ोतरी का प्रावधान है। याचिका में मुख्य रुप से इस परिपत्र को लागू करने व इसके तहत निर्धारित किए गए लाभ को याचिकाकर्ताओं (शिक्षको) को देने का निर्देश देने की मांग की गई थी।  

याचिका के अनुसार नाशिक जिला परिषद की ओर से 5 सितंबर 2010 को याचिकाकर्ताओं को श्रेष्ठ शिक्षक के पुरस्कार से नवाजा गया था। पर उन्हें सरकार के 12 दिसंबर 2000 के परिपत्र के तहत निर्धारित लाभ नहीं मिला है। याचिका में कहा गया था कि हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने 5 अप्रैल 2018 को श्रेष्ठ शिक्षक पुरस्कार से नवाजे गए पात्र शिक्षको को उनका लाभ देने का भी निर्देश दिया था। न्यायमूर्ति केके तातेड़ व न्यायमूर्ति रियाज छागला की खंडपीठ के सामने याचिका पर सुनवाई हुई। मामले से जुड़े सभी पक्षों को सुनने व याचिका में उल्लेखित तथ्यों पर गौर करने के बाद खंडपीठ ने कहा कि साल 2018 से पहले पुरस्कार पाने वाले शिक्षकों के नाम पर अतिरिक्त लाभ देने के बारे में विचार किया जाए और इस विषय पर सरकार अथवा जिला परिषद की ओर से लिए गए निर्णय की जानकारी याचिकाकर्ताओं को लिखित रुप में दी जाए। इसके साथ ही याचिका को समाप्त कर दिया। 

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