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तीन राज्यों से जुड़ा सरकारी अस्पताल बदहाल, टार्च के उजाले में हो रहा मरीजों का उपचार

तीन राज्यों से जुड़ा सरकारी अस्पताल बदहाल, टार्च के उजाले में हो रहा मरीजों का उपचार

डिजिटल डेस्क, अहेरी (गड़चिरोली)। अतिदुर्गम व पिछड़े जिलों में शुमार गड़चिरोली की समस्याएं सुलझने का नाम नहीं ले रही है। क्षेत्र में सुविधाएं मुहैया कराने के सरकार के दावे खोखले साबित हो रहे हैं। दक्षिण गड़चिरोली में सबसे बड़े अस्पताल का दर्जा प्राप्त अहेरी के उपजिला अस्पताल में बिजली बंद होने की समस्या गंभीर बनी हुई है। जिसके कारण अस्पताल में भर्ती मरीजों का इलाज टॉर्च की सहायता से किया जा रहा है। 

उल्लेखनीय है कि  अस्पताल की बिजली गुल होने पर स्वास्थ्य कर्मचारियों को मोबाइल का टॉर्च शुरू कर मरीजों का उपचार करना पड़ा। बताया जा रहा है कि, पिछले कुछ दिनों से बिजली गुल होने की समस्या काफी बढ़ गई है। बता दें कि, अहेरी उपविभाग में अहेरी, भामरागड़, मुलचेरा, सिरोंचा और एटापल्ली तहसील प्रमुखता से शामिल हैं । इन तहसीलों के विभिन्न गांवों के मरीज  उपचार के लिए अहेरी उपजिला अस्पताल में आते हैं। इसके अलावा उपविभाग से सटे तेलंगाना और छत्तीसगढ़ के मरीज भी इसी अस्पताल में आते हैं जिस अस्पताल से तीन राज्य जुड़े हों वहां स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर होनी चाहिए लेकिन  अस्पताल में अनेक समस्या होने के कारण उपचार के लिए आनेवाले मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। आएदिन, बिजली गुल की समस्या के कारण अस्पताल में कार्यरत स्वास्थ्य कर्मचारी और मरीजों को भारी त्रासदि का सामना करना पड़ रहा है। फलस्वरूप अस्पताल प्रबंधन इस ओर गंभीरता से ध्यान देकर उपजिला अस्पताल में जनरेटर समेत अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराए, ऐसी मांग क्षेत्र के ग्रामीणों ने की है। 

कार्य अधूरा छोड़कर ठेकेदार नदारद  

पिछले  साल शॉर्टसर्किट से अस्पताल की वायरिंग जल गयी थी। जिसके बाद दुबारा वायरिंग के लिए 20 लाख रुपयों की निधि मंजूर हुई। मात्र जनरेटर की वायरिंग अब तक पूर्ण नहीं हुई और कार्य अधूरा छोड़ ठेकेदार चला गया। इस संदर्भ में संबंधित इंजीनियरिंग को अनेक बार सूचित करने के बाद भी अनदेखी की जा रही है। जिसके कारण बिजली संबंधी समस्या से अस्पताल प्रबंधन पूरी तरह त्रस्त हो गया है। - डॉ. कन्ना मड़ावी , अधीक्षक, उपजिला अस्पताल, अहेरी
 

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।