दैनिक भास्कर हिंदी: सरोगेसी से मां बनने वाली महिलाओं के लिए नीति तैयार करे सरकार - हाईकोर्ट

July 3rd, 2019

डिजिटल डेस्क, मुंबई। सरोगेसी के जरिए मां बननेवाली एक महिला को बांबे हाईकोर्ट ने राहत प्रदान की है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को ऐसी महिलाओं को मातृत्व अवकाश दिए जाने को लेकर नीति तैयार करने पर विचार करने को कहा है। मामला पुणे विश्वविद्यालय में सहायक प्रोफेसर रीटा दोशी (परिवर्तित नाम) से जुड़ा है। दोशी साल 2012 में सरोगेसी के जरिए मां बनी थी। सरोगेसी से जन्में बच्चे के लालन पालन के लिए दोशी ने विश्वविद्यालय में मातृत्व अवकाश के लिए आवदेन किया था। लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन ने नियमों का हवाला देकर उन्हें छुट्टी देने से इंकार करते हुए उनके छुट्टी से जुड़े आवेदन को राज्य के उच्च शिक्षा विभाग के पास विचारार्थ भेज दिया था। 

राज्य के उच्च शिक्षा विभाग ने 28 जुलाई 1995 के शासनाादेश का हवाला देकर दोशी के मातृत्व अवकाश से जुड़े आवेदन पर विचार नहीं किया। इसके बाद दोशी ने अधिवक्ता निखिलेश पोटे के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर की। बुधवार को मुख्य न्यायाधीश प्रदीप नांदराजोग व न्यायमूर्ति एनएम जामदार के सामने याचिका पर सुनवाई हुई। इस दौरान अधिवक्ता पोटे ने कहा कि सरकार के पास सरोगेसी के जरिए मां बननेवाली महिलाओं को मातृत्व अवकाश देने के संबंध में कोई नीति नहीं है। मेरे मुवक्किल को अपने बच्चे के पालन पोषण के लिए 120 दिन की छुट्टी (पेडलीव) लेनी पड़ी है। इसलिए मेरे मुवक्किल को बच्चे के पालन पोषण के लिए गए मातृत्व अवकाश का भुगतान करने का निर्देश दिया जाए। क्योंकि सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी के मुताबिक अभी भी मेरे मुवक्किल का छुट्टी से जुड़ा आवेदन राज्य के उच्च शिक्षा विभाग के पास विचारार्थ प्रलंबित है।  वहीं सरकारी वकील ने खंडपीठ के सामने कहा कि उन्हें इस मामले में निर्देश लेने के लिए वक्त दिया जाए। 

मामले से जुड़े दोनों पक्षों को सुनने के बाद खंडपीठ ने कहा कि चूंकी याचिकाकर्ता साल 2012 में सरोगेसी के जरिए मां बनी थी। इस लिए अब याचिकाकर्ता के मातृत्व अवकाश के मुद्दे पर विचार करने की जरुरत नहीं है। रही बात छुटि्टयों के भुगतान की तो हम छुटि्टयों के भुगतान से जुड़ी मांग को स्वीकार करते हैं। खंडपीठ ने सरकार को सरोगेसी के जरिए मां बननेवाली महिलाओं को मातृत्व अवकाश दिए जाने के बारे में विचार करने को कहा है। यह कहते हुए खंडपीठ ने याचिका को समाप्त कर दिया।