comScore

स्नातक चुनाव-2020  : मतदाता पंजीयन की सीमा बढ़ाई जाए,उच्च स्तर पर पहुंचाएं बात

स्नातक चुनाव-2020  : मतदाता पंजीयन की सीमा बढ़ाई जाए,उच्च स्तर पर पहुंचाएं बात

डिजिटल डेस्क, नागपुर। शहर कांग्रेस कमेटी के महासचिव जॉन थॉमस के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने उपविभागीय आयुक्त संजयकुमार डिवरे से मुलाकात की तथा विधान परिषद स्नातक चुनाव-2020 के लिए मतदाता पंजीयन की समय सीमा (6 नवंबर) बढ़ाने की मांग की। चुनाव से संबंधित अन्य मुद्दों पर भी चर्चा की। इन मुद्दों में पंजीयन की समय सीमा बढ़ाने, राजनीतिक कार्यकर्ताओं की ओर से मतदाता पंजीयन के लिए 1 से ज्यादा मतदाताओं के आवेदन स्वीकारने, चुनाव के लिए भी आम चुनाव की तरह जनता में जागरूकता लाने, प्रिंट मीडिया तथा इलेक्ट्रानिक मीडिया में स्नातक चुनाव को लेकर सरकारी स्तर पर प्रचार-प्रसार की मांग की गई।  विधान परिषद स्नातक चुनाव क्षेत्र का विधायक स्नातक ही होना चाहिए, ताकि वह स्नातकों की समस्याओं को विधान परिषद मंे उठा सके और स्नातकों के साथ न्याय कर सकें। उपविभागीय आयुक्त संजय कुुमार डिवरे के साथ उपरोक्त सारे मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई। उन्होंने मांगों का निवेदन  संबंधित उच्च अधिकारी तक पहुंचाने का आश्वासन दिया। प्रतिनिधिमंडल में विनय सहारे, प्रवीण खोब्रागड़े, शाकीर अब्बास अली, दिपेश कोलुरवार, अशोक निमसरकार, डायना लिंगे आदि शामिल हैं। 

शेगांव विकास कार्यों की हाईकोर्ट को दी गई जानकारी
बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ में सोमवार को शेगांव के विकास कार्य से जुड़ी जनहित याचिका पर सुनवाई हुई, जिसमें रेलवे ने कोर्ट को बताया कि शेगांव होम प्लेटफॉर्म का काम पूरा कर उसे शुरू किया जा चुका है, वहीं शेगांव-आकोट मार्ग पर अंडरब्रिज भी तैयार हो गया है। पीडब्लूडी ने हाईकोर्ट को बताया कि क्षेत्र में स्काय वॉक का कार्य भी पूरा हाे चुका है, अंतिम निरीक्षण के बाद उसका अधिकार संस्थान को दे दिया जाएगा। मामले में सभी पक्षों को सुनकर हाईकोर्ट ने चार सप्ताह बाद सुनवाई रखी है। 

विकास कार्य प्रगति पर 
गजानन महाराज शताब्दी महोत्सव के उपलक्ष्य में शेगांव के विकास कार्यों के लिए याचिका दायर की गई थी। अन्य तीर्थ क्षेत्रों की तुलना में शेगांव के धीमे विकास को देखते हुए राज्य सरकार ने पेयजल, सड़क व बिजली जैसी सुविधाओं के लिए 250 करोड़ रुपए दिए, लेकिन अतिक्रमण के चलते विकास कार्य मंद पड़ गए। न्यायालय ने वर्ष 2010 में मुख्य सचिव को नए सिरे से विकास प्रारूप तैयार करने के निर्देश दिए। इसके बाद भी श्रद्धालुओं के लिए सुविधाएं पर्याप्त नहीं होने को लेकर एक बार फिर न्यायालय में जनहित याचिका दायर की गई। हाईकोर्ट के दखल के बाद शेगांव में विविध विकास कार्य प्रगति पर हैं। एड. फिरदोस मिर्जा बतौर न्यायालयीन मित्र कामकाज देख रहे हैं। 
 

कमेंट करें
9S78O