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ज्यादा फीस वसूलने वाले अस्पतालों पर भड़के स्वास्थ्य मंत्री, प्रशासन से कहा- करें कार्रवाई 

ज्यादा फीस वसूलने वाले अस्पतालों पर भड़के स्वास्थ्य मंत्री, प्रशासन से कहा- करें कार्रवाई 

डिजिटल डेस्क, मुंबई। प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने निजी अस्पताल की ओर से कोरोना के मरीजों से मनमानी फीस वसूले जाने की शिकायतों पर कड़ी नाराजगी जताई है। टोपे ने कहा कि मरीजों के बिल में पीपीई किट के लिए 2 से 4 हजार रुपए लगाए जा रहे हैं। एन-95 मास्क के लिए ज्यादा पैसे लिए जा रहे हैं। मरीजों से अलग-अलग तरीके से पैसे लेने की कोशिश अक्ष्मय अपराध है। टोपे ने कहा कि सरकार ने कोरोना इलाज के लिए निजी अस्पताल की दर तय की है। लेकिन दुर्भाग्य से स्थानीय प्रशासन की ओर से आदेश का सही तरीके से अमल नहीं हो पा रहा है। जिलाधिकारी और मनपा आयुक्त को अपने अधिकार का उपयोग करना चाहिए। टोपे ने कहा कि निजी अस्पतालों में प्रशासन की ओर से नियुक्त आडिटर के जांचने के बाद ही मरीजों को बिल दिया जाना चाहिए। इससे मरीजों की तरफ से ज्यादा फीस लेने की शिकायतें नहीं आएंगी।  

मृत्युदर कम करने पर जोर दे रही सरकार 

टोपे ने कहा कि राज्य में कोरोना के मरीजों की संख्या बढ़ सकती है लेकिन अब सरकार का जोर कोरोना की मृत्यु दर को कम करने पर है। उन्होंने कहा कि राज्य में हर रोज लगभग 8 हजार नए मरीज मिल रहे हैं। इसका मतलब है कि राज्य में कोरोना के टेस्ट ज्यादा हो रहे हैं। महाराष्ट्र में गुजरात, मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों से अधिक टेस्ट हो रहे हैं। हर जिले में एंटीजन टेस्ट शुरू किया गया है। इसके अलावा एंटीबॉडी टेस्ट भी शुरू किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य में कोरोना के मरीजों के लिए बेड की कमी नहीं है। फिर भी सरकार ने राज्य के सरकारी अस्पतालों में बेड बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। टोपे ने कहा कि सभी निजी अस्पताल के डॉक्टरों को एंटीजन टेस्ट किट अनिवार्य रूप से लेनी चाहिए। एंटीजन टेस्ट के जरिए 15 से 20 मिनट में कोरोना संक्रमण के बारे में पता चल सकता है। टोपे ने कहा कि क्वारंटाइन सेंटर में महिलाओं की सुरक्षा की दृष्टि से निगरानी के लिए जिलाधिकारी और मनपा आयुक्त को निर्देश दिए जाएंगे। 

जेल नहीं लगे क्वारेंटाईन सेंटर 

टोपे ने कहा कि क्वारंटाइन सेंटर में मरीजों को उपलब्ध कराए जाने वाले भोजन और दूसरी व्यवस्था की निगरानी के लिए जिलाधिकारियों और मनपा आयुक्त को अपने स्तर पर अधिकारियों की नियुक्ति करना चाहिए। क्वारंटाइन सेंटर मरीजों को कैद खाना नहीं लगना चाहिए। जहां पर खराब भोजन दिया जा रहा है वहां पर कार्रवाई की जाएगी। टोपे ने कहा कि मुंबई में लोकल ट्रेनें, स्विमिंग पूल, जिम और मॉल शुरू करने के बारे में मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के फैसला लेंगे। लेकिन पूजा स्थल, धार्मिक कार्यक्रम और राजनीतिक दलों की सभाएं और रैलियों की अनुमति के लिए अभी विचार नहीं किया जा सकता है। इसमें काफी समय लगेगा। टोपे ने कहा कि विपक्ष के नेता द्वारा बुलाई गई बैठक में अफसरों को नहीं जाने के बारे में सरकार ने कोई नया फैसला नहीं किया है बल्कि भाजपा सरकार के समय के पुराने फैसले की सरकार ने याद दिलाई है। 

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Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

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डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

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ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।