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हाईकोर्ट : ईसाई मिशनरी पर मॉब लिंचिंग की साजिश का आरोप, निजी अस्पतालों में मुफ्त कोरोना इलाज की याचिका पर 5 लाख का जुर्माना

हाईकोर्ट : ईसाई मिशनरी पर मॉब लिंचिंग की साजिश का आरोप, निजी अस्पतालों में मुफ्त कोरोना इलाज की याचिका पर 5 लाख का जुर्माना

डिजिटल डेस्क, मुंबई। पालघर जिले के गड़चिंचले गांव में दो महीने पहले हुई दो साधुओं और उनकी हत्या की वारदात को विवेक विचार मंच नाम की संस्था ने पूर्वनियोजित साजिश बताया है। संगठन से जुड़े लोगों ने मंगलवार को मीडिया के सामने एक रिपोर्ट पेश की जिसके आधार पर यह दावा किया गया। हाइकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश अंबादास जोशी की अध्यक्षता में सात सदस्यों की समिति ने पूरे मामले की छानबीन की है। इस आधार पर दावा किया गया कि इस वारदात के पीछे वामपंथी संगठनों और ईसाई मिशनरियों की साजिश है। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि सत्ताधारी पार्टी का एक स्थानीय नेता भी इस साजिश में शामिल है, इसलिए मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआइए) या केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से कराई जानी चाहिए।  संस्था से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता संतोष जनाटे ने पत्रकारों से बातचीत में दावा किया काशीनाथ चौधरी नाम के जिस नेता की भूमिका इस मामले में संदिग्ध है, उसे घटना के 1 महीने बाद घटनास्थल पर पहुंचे गृह मंत्री अनिल देशमुख ने दौरे में अपने साथ रखा था। जबकी देशमुख लगातार ऐसे बयान दे रहे हैं. जिससे मामले की जांच प्रभावित हो इसलिए मामले की जांच केंद्रीय जांच एजेंसियों को करनी चाहिए। संस्था ने अपनी जांच रिपोर्ट मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, गृह मंत्री अनिल देशमुख और पुलिस महानिदेशक संजीव जायसवाल को भी भेजी है। जनाटे ने कहा कि जांच में पाया गया कि हमला दो बार में हुआ पहला हमला अफवाह के चलते हुआ लेकिन डेढ़ घंटे बाद साजिश के तहत लोगों को इकट्ठा कर पुलिस के सामने साधुओं को मौत के घाट उतार दिया गया। इस सत्यशोधक समिति में जोशी के साथ वकील समीर कांबले, वकील प्रवर्तक पाठक, सामाजिक कार्यकर्ता संतोष जनाटे, पत्रकार किरण शेलार, पूर्व पुलिस अधिकारी लक्ष्मण खरखडे और सामाजिक कार्यकर्ता माया पोतदार शामिल थीं। स्थानीय लोगों से बातचीत के आधार पर यह रिपोर्ट तैयार की गई है। रिपोर्ट में दावा किया गया है की मामले में कई निर्दोष आदिवासियों को पकड़ा गया है, जबकि मुख्य आरोपियों को छोड़ दिया गया है।

तो गड़चिरोली बन जायेगा गड़चिचले

जनाटे ने दावा किया कि इलाके के आदिवासी समुदाय को लंबे समय से विकास के लिए बन रही बुलेट ट्रेन जैसी परियोजनाओं के खिलाफ भड़काया जा रहा है। वामपंथी और ईसाई मिशनरियों ने हिन्दू धर्म के प्रति उनके मन में जहर घोला है। यहां लोकतंत्र और संविधान के खिलाफ माहौल बनाया जा रहा है और अगर सरकार जल्द ही कदम नहीं उठाती  तो यह इलाका भी गडचिरोली जैसे नक्सल प्रभावित इलाकों में शामिल हो जाएगा।

क्या है मामला

16 अप्रैल को सैकड़ो लोगों ने बच्चा चोर समझकर गाड़ी में सवार साधुओं सुशीलगिरी महाराज और कल्पवृक्षगिरी महाराज के साथ उनके ड्राइवर नीलेश तेलगाने को पीट पीटकर मार दिया था। मौके पर पहुंची पुलिस की टीम भी उन्हें बचा नहीं पाई थी और भीड़ पुलिसवालों पर हमलाकर साधुओं को उनके कब्जे से खींच ले गए थे।  साधुओं की हत्या की बात सामने आते ही इस मामले ने तूल पकड़ लिया था। मामले की जांच सीआईडी को सौंप दी गई।  


हाउसिंग सोसायटियों के लिए निर्देश देने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से हाईकोर्ट का इंकार

उधर बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाउसिंग सोसायटी की ओर से प्रवेश को लेकर मनमाने तरीके से लगाई जा रही पाबन्दियों के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करने से इंकार कर दिया है। इस विषय पर पेशे से वकील यूसुफ इकबाल ने जनहित याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया था कि सोसायटी में प्रवेश करनेवाले मेहमानों व नौकरों से कोरोना न होने की रिपोर्ट मांगी जा रही हैं। सोसायटी की ओर से लगाई गई ऐसी पाबंदिया तर्कसंगत नहीं है। इसलिए सरकार को सभी हाउसिंग सोसायटी के लिए एक समान दिशा -निर्देश जारी करने का निर्देश दिया जाए। 

मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता की खंडपीठ के सामने याचिका पर सुनवाई हुई। इस दौरान राज्य के महाधिवक्ता आशुतोष कुम्भकोणी ने कहा कि सरकार हाउसिंग सोसायटी के इस तरह के मामलों में हस्तक्षेप नहीं करती। वित्तीय गड़बड़ी व कानून के उल्लंघन से जुडी शिकायतें देखती हैं। याचिका में उठाए गए मुद्दे को याचिकाकर्ता सक्षम प्राधिकरण के सामने अपनी बात रख सकता है, अथवा को ऑपरेटिव कोर्ट में जा सकता हैं। इन दलीलों को सुनने के बाद खंडपीठ ने कहा कि हमारे सामने ऐसा कोई उदाहरण नहीं पेश किया गया है, जो सोसायटी की पाबंदी के कारण किसी की परेशानी को दर्शाए। यह कहते हुए खंडपीठ ने याचिका पर सुनवाई से इंकार कर दिया और उसे सक्षम प्राधिकरण के सामने अपनी बात रखने को कहा। इसके बाद याचिकर्ता ने अपनी याचिका वापस ले ली। 

निजी अस्पतालों में मुफ्त कोरोना इलाज के लिए याचिका दायर करने वाले पर 5 लाख का जुर्माना

बॉम्बे हाईकोर्ट ने निजी अस्पतालों में भी कोरोना के मरीजों को निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराए जाने की मांग को लेकर याचिका दायर करने वाले याचिकाकर्ता पर पांच लाख रुपए का जुर्माना लगाया है। हाईकोर्ट ने याचिका को निरर्थक करार देते हुए यह जुर्माना लगाया है। शिक्षाविद व सामाजिक कार्यकर्ता सागर जोधले ने यह याचिका दायर की थी। मंगलवार को यह याचिका मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता की खंडपीठ के सामने याचिका सुनवाई के लिए आयी। याचिका पर गौर करने के बाद खंडपीठ ने कहा कि सरकार कोरोना माहमारी से लड़ रही है। ऐसे में यह याचिका हमे निरर्थक प्रतीत हो रही है। हमे सरकार की ओर से निजी अस्पताल में इलाज को लेकर जारी की गई अधिसूचना में कोई खामी नहीं दिखाई दे रही। इसलिए याचिकाकर्ता पर पांच लाख रुपए का जुर्माना लगाया जाता हैं।

हालांकि याचिकाकर्ता ने खंडपीठ के सामने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसले पेश किए। किंतु खंडपीठ ने उन पर गौर नहीं किया। याचिकाकर्ता के डोंबिवली व कल्याण में कई शैक्षणिक संस्थान हैं। इससे पहले राज्य के महाधिवक्ता आशुतोष कुम्भकोणी ने याचिका का विरोध किया। याचिका में दावा किया गया था कि सरकार ने 21 मई 2020 को निजी अस्पताल में कोरोना के इलाज के संबंध में जो अधिसूचना जारी की है, यदि उसके तहत भी लोगों का इलाज किया गया तो जनरल वार्ड में भी इलाज कराने का बिल 75 हजार से एक लाख रुपये के बीच आएगा। जिसे आम आदमी वहन नहीं कर पाएगा। याचिका में सरकार की ओर से जारी की गई अधिसूचना को अमान्य घोषित करने की मांग की गई थी। याचिका में आग्रह किया गया था कि सभी अस्पतालों में इलाज की दर को लेकर एक समरुप नीति बनाने का निर्देश दिया जाए और इसे कड़ाई से लागू कराया जाए। क्योंकि महाराष्ट्र में काफी तेजी से कोरोना मरीजों की संख्या बढ़ रही है। लोग को बेड मिलने में मुश्किलें आ रही है। इलाज के अभाव में भी लोगों की मौत हो रही है। इसलिए सरकारी सहित निजी अस्पताल में भी कोरोना के इलाज की मुफ्त व्यवस्था की जाए। इसके साथ ही अस्पतालों को पैथोलॉजी जांच में वस्तु एवं सेवा कर से छूट दी जाए। 

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।