दैनिक भास्कर हिंदी: घर बैठ कर कोरोना टीका लगवाने वाले  नेताओं को हाईकोर्ट ने फटकारा

April 9th, 2021

डिजिटल डेस्क, मुंबई। बांबे हाईकोर्ट ने घर में कोरोना का टीका लेनेवाले महाराष्ट्र के कुछ नेताओं को कड़ी फटकार लगाई है। हाईकोर्ट ने कहा यदि देश के प्रधानमंत्री व राष्ट्रपित अस्पताल जाकर कोरोना का टीका लगवा सकते है तो यहां के नेता ऐसा क्यों नहीं कर सकते। उन्हें भी प्रधानमंत्री व राष्ट्रपति की राह अपनानी चाहिए। इस दौरान कोर्ट ने राज्य में कोरोना के टीके की कमी को लेकर भी चिंता व्यक्त की और कहा कि इस ओर ध्यान दिया जाना चाहिए। अदालत ने कहा कि हम कोरोना के टीकाकरण की प्रक्रिया को भी सुविधाजनक बनाने के लिए कदम उठाएंगे। कोर्ट ने कहा कि यदि उन्हें अब पता चला कि राज्य के नेताओं को उनके घरों में टीका लगाया जा रहा है तो इस मामले में कार्रवाई करेंगे।

मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता व न्यायमूर्ति गिरीष कुलकर्णी की खंडपीठ ने यह बात पेशे से वकील धृति कापडिया व कुनाल तिवारी की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान कही। याचिका में मांग की गई है कि 75 साल से अधिक उम्र वालों को घर-घर जाकर कोरोना की टीका लगाया जाए। खास तौर से ऐसे लोगों को जो दिव्यांग हैं और व्हीलचेयर या बिस्तर पर हैं। 

इससे पहले केंद्र सरकार की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता अद्वैत सेठना ने कहा कि फिलहाल घर-घर टीका लगाने की सुविधा उपलब्ध नहीं है। इस पर खंडपीठ ने कहा कि जब इस तरह की सुविधा व नीति नहीं है तो महाराष्ट्र के कुछ नेता कैसे घर में कोरोना का टीका लगवा रहे हैं। आखिर यह नेता दूसरों से अलग कैसे हैं। टीकाकरण को लेकर एक जैसी नीति होनी चाहिए। खंडपीठ ने कहा कि राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री सहित हर कोई टीकाकरण केंद्र व अस्पताल में जाकर कोरोना का टीका ले रहा है। लेकिन महाष्ट्र के नेता ऐसा नहीं कर रहे हैं। यह गलत संदेश देता है।

खंडपीठ ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि भविष्य में उन्हें पता चला कि महाराष्ट्र के नेता घर में टीका ले रहे हैं तो संबंधित विभाग के खिलाफ कार्रवाई करेंगे। अब तक जो हो चुका सो हो चुका लेकिन अब यदि नेताओं के घर में टीका लेने की जानकारी मिली तो हम कार्रवाई करेंगे। इस दौरान खंडपीठ ने राज्य में कोरोना के टीके की कमी को लेकर भी चिंता व्यक्त की। और कहा कि इस मामले में ध्यान दिया जाना जरुरी है। 

खंडपीठ ने फिलहाल मामले की सुनवाई 21 अप्रैल 2021 तक के लिए स्थगित कर दी है। खंडपीठ ने कहा कि हम अगली सुनवाई के दौरान देखेंगे कि बुजुर्गों के लिहाज से टीकाकरण प्रक्रिया को कैसे सुविधाजनक बनाया जा सकता है। अभी टीका के पंजीयन की प्रक्रिया ऑनलाइन है। हमारे देश के ज्यादातर बुजुर्गों के पास इंटरनेट नहीं हैं। इस पहलू पर विचार होना जरुरी है।
 

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