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सेक्सुअली हैरेसमेंट बर्दाश्त नहीं, आईसीसी और स्पेशल सेल का होगा गठन,यूजीसी के आदेश

सेक्सुअली हैरेसमेंट बर्दाश्त नहीं, आईसीसी और स्पेशल सेल का होगा गठन,यूजीसी के आदेश

डिजिटल डेस्क, नागपुर। उच्च शिक्षा संस्थानों में छात्राओं और महिला कर्मचारियों के लिए सुरक्षित और स्वस्थ वातावरण की अनिवार्यता पर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग सख्त हुआ है। यूजीसी ने राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय समेत देश भर के शिक्षा संस्थानों को अपने यहां इंटरनल कंप्लेट कमेटी (आईसीसी) और स्पेशल सेल का गठन करने के आदेश दिए हैं। यहां लिंगभेद और हिंसा से जुड़े मसले हल किए जाएंगे। साथ ही साथ लिंगभेद विरोधी जागरूकता के लिए विविध उपक्रम भी चलाए जाएंगे।

सुरक्षित वातावरण मिले
 यूजीसी के अनुसार, महिलाओं में उच्च शिक्षा का स्तर बढ़ाने की पहली शर्त यह है कि उच्च शिक्षा संस्थानों में उनके लिए सुरक्षित और साफ-सुथरा वातावरण हो। इसके लिए उच्च शिक्षा के मौजूदा ढांचे में अाईसीसी और स्पेशल सेल जैसे घटक जरूरी है। इसके बाद ही गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा और रिसर्च का उद्देश्य सफल हो सकता है। यूजीसी मानता है कि शिक्षा संस्थानों मंे इन प्रयासों के माध्यम से समाज मंे भी महिलाओं के लिए एक सुरक्षित वातावरण तैयार होगा। ऐसे में विश्वविद्यालय और कॉलेज कैंपस में छात्राओं और महिला कर्मचारियों से जुड़े मसले हल करने के लिए इस प्रकार की कमेटी और सेल जरूरी है। 
नोटिफिकेशन जारी  : नोटिफिकेशन में यूजीसी ने साफ किया है कि वे यौन हिंसा प्रतिबंधात्मक कानून के प्रावधान को सख्ती से लागू करना चाहते हैं। साथ ही यौनाचार और अन्य प्रकरणों की स्टूडेंस ग्रीवियंस रिड्रेसल पोर्टल पर शिकायतों को बढ़ावा देना चाहते हैं। यूजीसी ने नागपुर विवि समेत सभी शिक्षा संस्थानों को नि:शुल्क हेल्पलाइन नंबर 1800-111-656 नोटिस बोर्ड और अन्य जगह लगाने को कहा है।

प्राथमिक शिक्षकों को मिलेगा पहचान-पत्र
राज्य सरकार के समग्र अभियान -2019-20 के तहत पहली से आठवीं कक्षा तक के सभी प्राथमिक शिक्षकों को पहचान-पत्र दिए जाएंगे। महाराष्ट्र प्राथमिक शिक्षा परिषद की राज्य प्रकल्प संचालक वंदना कृष्णा ने नागपुर समेत प्रदेश भर की जिला परिषद और मनपा शिक्षा विभाग को यह आदेश जारी किया है। राज्य में करीब 3 लाख 68 प्राथमिक शिक्षक हैं। समग्र अभियान के तहत सरकार ने यह या उपक्रम शुरू करने का निर्णय लिया है। सरकार इस पर 50 रुपए प्रति पहचान-पत्र यानी कुल 1 करोड़ 93 लाख रुपए खर्च करने की तैयारी कर रही है। इसका उद्देश्य प्राथमिक शिक्षकों को एक पहचान देना है। परिपत्रक में कहा गया है कि, पहचान-पत्र का प्रारूप राज्य प्राथमिक शिक्षक परिषद द्वारा तय किया गया है। ऐसे में राज्य भर मंे सभी प्राथमिक शिक्षकों को एक समान पहचान-पत्र दिए जाएंगे। पहचान-पत्र तैयार करने का काम शैक्षणिक सत्र 2019-20 के आखिर तक पूरा किया जाना है। 

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।