दैनिक भास्कर हिंदी: जिला परिषद के शिक्षा विभाग में बह रही उल्टी गंगा, विस्तार अधिकारी के नियंत्रण में गट शिक्षणाधिकारी

December 23rd, 2018

डिजिटल डेस्क, नागपुर। जिला परिषद के शिक्षा विभाग में उल्टी गंगा बह रही है। विस्तार अधिकारी को उपशिक्षणाधिकारी का प्रभार सौंपा गया है। गट शिक्षणाधिकारी वरिष्ठ रहकर भी विस्तार अधिकारी के नियंत्रण में काम कर रहे हैं। शिक्षा विभाग की गजब कार्यप्रणाली जिला परिषद में चर्चा का विषय बनी हुई है। जिला परिषद के प्राथमिक शिक्षा विभाग में उपशिक्षणाधिकारी के दो पद मंजूर हैं। एक पद सेवानिवृत्ति और एक का तबादला होने से लंबे समय से दोनों पद रिक्त हैं। उनका पदभार शिक्षणाधिकारी कार्यालय में कार्यरत दो विस्तार अधिकारियों को सौंपा गया है। विस्तार अधिकारी से गट शिक्षणाधिकारी पद वरिष्ठ हैं।

विस्तार अधिकारियों के कंधों पर उपशिक्षणाधिकारी की कमान सौंपे जाने से गट शिक्षणाधिकारियों को उनके नियंत्रण में काम करना पड़ रहा है। कनिष्ठ अधिकारियों के नियंत्रण में करने पड़ने से वरिष्ठ अधिकारियों के स्वाभिमान को ठेस पहुंच रही है। हालांकि वरिष्ठों के निर्णय के विरोध में खुलकर बाेलने के लिए कोई आगे नहीं आ रहा है, लेकिन अंदर ही अंदर असंतोष की भावना पनप रही है।

शिक्षा विभाग शैक्षणिक गुणवत्ता बढ़ाने नए-नए प्रयोग कर रहा है। इन प्रयोगों पर प्रत्यक्ष अमल की जिम्मेदारी भगवान भरोसे छोड़ दी गई है। शिक्षा विभाग में उपशिक्षणाधिकारी, गटशिक्षणाधिकारी, विस्तार अधिकारी, केंद्र प्रमुख तथा मुख्याध्यापकों को अनेक पद रिक्त हैं। प्रभारी के कंधों पर अतिरिक्त बोझ डालकर शैक्षणिक गुणवत्ता बढ़ाने के शिक्षा विभाग के प्रयास जारी हैं। बिना सेनापति के सेना को युद्ध लड़ने के लिए मैदान में उतारने की शिक्षा विभाग द्वारा कोशिश किए जाने से जिला परिषद स्कूलों में विद्यार्थी संख्या तेजी से घट रही है। इसे रोकने के लिए रिक्त पदों पर तत्काल भरती करने की मांग जोर पकड़ रही है।

विविध संवर्ग के रिक्त पद

पद                         मंजूर      कार्यरत      रिक्त

उप शिक्षणाधिकारी     02       00            02
गट शिक्षणाधिकारी     13        04           09 
विस्तार अधिकारी        54       27          27
केंद्र प्रमुख               136         51         85
उ. श्रे. मुख्याध्यापक     87       34         53

रिक्त पद तत्काल भरे
अनिल नासरे, जिला महासचिव, महाराष्ट्र राज्य प्राथमिक शिक्षक समिति के मुताबिक विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास की दृष्टि से इतने बड़े पैमाने पर पर्यवेक्षीय पद रिक्त रहना ठीक नहीं है। सभी रिक्त पद तत्काल भरने चाहिए, ताकि शैक्षणिक गुणवत्ता बढ़ाने का लक्ष्य पूरा हो सके।