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स्वच्छता में इंदौर नंबर वन, नागपुर के पिछड़ने के हैं कई कारण, जनजागरण महज खानापूर्ति

स्वच्छता में इंदौर नंबर वन, नागपुर के पिछड़ने के हैं कई कारण, जनजागरण महज खानापूर्ति

डिजिटल डेस्क, नागपुर । स्वच्छ भारत अभियान में इंदौर लगातार अपना स्थान नंबर वन बनाए हुए हैं। नागपुर की रैंकिंग में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है। नागपुर को नंबर वन बनाने के लिए आम नागरिक और सरकारी अमले को हाथ में हाथ डालकर आगे बढ़ना होगा। स्वच्छता के मामले में इंदौर और नागपुर के बीच काफी फासला है। इसे कम करने के लिए आम नागरिकों की भागीदारी जरूरी है। नागरिकों को स्वच्छता अभियान से जोड़ने के लिए जनप्रतिनिधि को पहल करनी होगी, तभी जाकर देश के नक्शे में नागपुर को स्वच्छ शहर की पहचान मिल सकेगी। संयुक्त प्रयास के बिना स्वच्छ नागपुर का सपना, सपना बनकर रह जाएगा।

इंदौर की खूबी
गीला, सूखा कचरा अलग-अलग संकलन
100 प्रतिशत कचरे पर प्रक्रिया की व्यवस्था
कॉलाेनियों में होम कंपोस्ट, बर्तन व थैला बैंक
सूखा कचरा खरीदी कर नागरिकों का प्रोत्साहन
जीरो वेस्ट इवेंट का आयोजन
12 तरह का सूखा कचरा मशीन से अलग छांटने की व्यवस्था
मलबे का निपटारा करने के लिए प्लांट
ईंट और पेवर ब्लॉक बनाने के लिए कचरे का उपयोग
कचरे से कंपोस्ट खाद और सीएनजी ईंधन बनाने की व्यवस्था

नागपुर की खामी
गीला, सूखा कचरा एकत्रित संकलन में कमी
कचरे पर प्रक्रिया की पर्याप्त व्यवस्था नहीं
प्लास्टिक पर पूरी तरह रोक लगाने में नाकाम 
जनजागरण के नाम पर केवल खानापूर्ति
सूखे कचरे की छंटनी की व्यवस्था नहीं
कंपोस्ट खाद बनाने की नाकाफी व्यवस्था
ईंट और पेवर ब्लॉक में उपयोग नहीं
सीएनजी ईंधन बनाने की कोई व्यवस्था नहीं

यह भी एक पहलू
इंदाैर में स्वच्छता के प्रति आम नागरिक जागरूक हैं। ऐसा नहीं है कि वहां के लोगों में पहले से जागरूकता रही। सरकारी अमले से लेकर जनप्रतिनिधियों ने दिन-रात महेनत कर लोगों के दिलों में स्वच्छता का महत्व कूट-कूट कर भर दिया। आज लोग खुद जागरूक हो गए। सड़क पर कचरा या गंदगी फैलाना तो दूर, दूसराें की हरकत पर भी पैनी नजर रखते हैं। यदि कोई रास्ते पर गंदगी फैला रहा है, तो उसी को साफ करने पर मजबूर किया जाता है। नागपुर में जागरूकता का अभाव है। शहर में 3 स्वयंसेवी संस्थाएं लोगों में बरसों से जनजागरण कर रही हैं। दो स्वयंसेवी संस्थाएं नि:शुल्क सेवा दे रही हैं। एक स्वयंसेवी संस्था को मनपा की तिजोरी से सालाना लाखों रुपए भुगतान िकया जा रहा है। मनपा का स्वयंसेवी संस्थाओं पर कोई नियंत्रण नहीं है। उनके काम का लेखा-जोखा भी उपलब्ध नहीं है। स्वच्छता का महत्व समझ नहीं पाने से लोग खुलेआम सड़कों पर गंदगी करते हैं। कोई रोक-टोक करने वाला नहीं है।

एनडीएस के भरोसे निगरानी
शहर में गंदगी फैलाने वालों पर निगरानी रखने के िलए मनपा ने उपद्रव शोध दल (एनडीएस) का गठन किया है। दल में 87 जवान कार्यरत थे। 114 जवानों की भरती की गई है। मनपा के 10 जोन हैं। सभी जोन में एनडीएस की टीम कार्यरत है। उनके कंधों पर 21 प्रकार की जिम्मेदारियां हैं। गंदगी फैलाने वालों पर कार्रवाई करने के अधिकार भी उन्हीं को दिए गए हैं। 20 जवानों के भरोसे जोन में गंदगी फैलाने वालों पर नजर रखी जा रही है।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।