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रेल टिकट की पारदर्शिता के लिए शुरू हुई पहल बन गई मुसीबत

रेल टिकट की पारदर्शिता के लिए शुरू हुई पहल बन गई मुसीबत

रेलवे आरक्षण केन्द्र के डिस्प्ले बोर्ड महीनों से खराब पड़े समन्वय न होने से यात्रियों-रेलकर्मियों में हो रही बहस
डिजिटल डेस्क जबलपुर ।
रेलवे टिकट बनाने की प्रक्रिया की पारदर्शिता के लिए मुख्य रेलवे स्टेशन स्थित मुख्य आरक्षण केन्द्र पर लगाए गए  सभी 16 डिस्प्ले बोर्ड बंद होने के कारण टिकट बनाने वाले रेल स्टाफ और यात्रियों के बीच हर रोज बहस हो रही है जो आरक्षण केन्द्र के स्टाफ के लिए सिरदर्द बनता जा रहा है। जानकारी के अनुसार आधुनिकीकरण योजना के तहत रेल मंडल के वाणिज्य विभाग ने साल की शुरूआत में पीपीपी मोड के तहत मुख्य आरक्षण केन्द्र के काउंटर्स पर डिस्प्ले लगाए गए थे ताकि यात्री टिकट बनाते हुए डिस्प्ले बोर्ड में देख सकें, यात्रा और यात्री से संबंधित सही जानकारी आपसी समन्वय से भरी जा सके और किसी प्रकार की गलती न हो। इसका एक उद्देश्य समय की बचत भी था लेकिन पिछले 8 महीने से डिस्प्ले बोर्ड बंद होने से यात्री परेशान हो रहे हैं। 
मुँह पर मास्क होने से बात हो पाना भी मुश्किल 

 कोविड-19 की वजह से रेल स्टाफ और यात्रियों को मुँह पर मास्क लगाना पड़ रहा है, ऊपर से काउंटर पर प्लास्टिक की पन्नी लगी है। ऐसे में हालात ये हैं कि न तो रेेल स्टाफ यात्री की बातों को समझ पा रहा है, न ही यात्री रेल स्टाफ की बात.. जिसकी वजह से उनके बीच दिन भर बहस होती रहती है, जिससे तनाव के हालात बन रहे हैं। सबसे परेशानी की बात यह है िक यात्रियों और रेल स्टाफ को बात करने के लिए चीखना पड़ रहा है। यात्रियों का कहना है िक अगर डिस्पले बोर्ड बंद हो गए हैं तो कम से कम पुरानी व्यवस्था वाले माइक की लगवा दिए जाएँ ताकि माइक के जरिए टिकट संबंधी बातचीत तो रेल स्टाफ से संभव हो सके।
ठेका कैंसल करेंगे या कोई और उपाय
ये सही है कि मुख्य आरक्षण केन्द्र के सभी डिस्प्ले बोर्ड बंद हैं। प्राइवेट कंपनी को पीपीपी मोड के तहत ठेका दिया था लेकिन आर्थिक तंगी के कारण वो काम सही तरीके से नहीं कर पाई, जिसकी वजह से यात्रियों को परेशानी हो रही है। ट्रेनों के चलने के बाद अब डिस्प्ले बोर्ड का काम जरूरी है, इसके लिए या तो पुराना ठेका कैंसल किया जाएगा या फिर कोई उपाय करेंगे ताकि यात्रियों की बेहतर सुविधाएँ मिलती रहें। 
देवेश सोनी, डीसीएम


 

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Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

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डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

जानिए भास्कर प्रॉपर्टी के बारे में:
भास्कर प्रॉपर्टी ऑनलाइन रियल एस्टेट स्पेस में तेजी से आगे बढ़ने वाली कंपनी हैं, जो आपके सपनों के घर की तलाश को आसान बनाती है। एक बेहतर अनुभव देने और आपको फर्जी लिस्टिंग और अंतहीन साइट विजिट से मुक्त कराने के मकसद से ही इस प्लेटफॉर्म को डेवलप किया गया है। हमारी बेहतरीन टीम की रिसर्च और मेहनत से हमने कई सारे प्रॉपर्टी से जुड़े रिकॉर्ड को इकट्ठा किया है। आपकी सुविधाओं को ध्यान में रखकर बनाए गए इस प्लेटफॉर्म से आपके समय की भी बचत होगी। यहां आपको सभी रेंज की प्रॉपर्टी लिस्टिंग मिलेगी, खास तौर पर जबलपुर की प्रॉपर्टीज से जुड़ी लिस्टिंग्स। ऐसे में अगर आप जबलपुर में प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान बना रहे हैं और सही और सटीक जानकारी चाहते हैं तो भास्कर प्रॉपर्टी की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।